जकात निकालने से माल महफूज़ रहता है: सैयद मजहर चिश्ती

Mar 06, 2026 05:47 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, औरैया
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Auraiya News - पवित्र माह रमजान के तीसरे जुमे की नमाज नगर की मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। नमाजियों और रोजेदारों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने भाग लिया। उलमा-ए-किराम ने रोजा, जकात और जरूरतमंदों की मदद पर जोर दिया। नमाज के बाद सामूहिक दुआ की गई और एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी गई।

जकात निकालने से माल महफूज़ रहता है: सैयद मजहर चिश्ती

फफूंद, संवाददाता। पवित्र माह रमजान के तीसरे जुमे की नमाज नगर सहित आसपास के क्षेत्रों की मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों और रोजेदारों की भारी भीड़ उमड़ी। आम जुमे की अपेक्षा रमजान के जुमे पर मस्जिदें अधिक भरी नजर आईं। नौजवानों और बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में बच्चों ने भी मस्जिदों में पहुंचकर अल्लाह की इबादत की और नमाज अदा की। नगर की प्रमुख मस्जिदों में दरगाह हजरत पीर बुखारी शाह रहमतुल्लाह अलैह की मस्जिद, मोहल्ला तरीन स्थित मदीना मस्जिद और जामा मस्जिद आस्ताना आलिया समदिया में बड़ी संख्या में नमाजियों ने शिरकत की।

नमाज से पहले उलमा-ए-किराम ने अपने बयान में रोजा, जकात, सदका और तरावीह की फजीलत बयान करते हुए रमजान की बरकतों पर रोशनी डाली और लोगों को जरूरतमंदों की मदद करने की नसीहत दी।जामा मस्जिद आस्ताना आलिया समदिया में नमाज से पहले मौलाना सैयद मजहर मियां चिश्ती ने कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इस महीने में अल्लाह की राह में ज्यादा से ज्यादा सदका और खैरात करनी चाहिए तथा गरीबों और जरूरतमंदों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसे अल्लाह तआला ने माल और दौलत से नवाजा है, उसे जकात अदा करने में किसी तरह की कोताही नहीं करनी चाहिए। जकात निकालने से माल कम नहीं होता बल्कि वह महफूज रहता है और उसमें बरकत पैदा होती है।उन्होंने जकात से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि जकात इस्लाम के अहम अरकान में से एक है और इसे सही तरीके से अदा करना हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर फर्ज है। उन्होंने लोगों से रमजान के तीसरे अशरे की ताक रातों में शबे कद्र की तलाश करने की भी नसीहत दी और कहा कि इस रात की इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत के बराबर मिलता है।वहीं दरगाह पीर बुखारी शाह मस्जिद में हाफिज रिजवान चिश्ती ने कहा कि जकात निकालने से इंसान का माल पाक हो जाता है और अल्लाह तआला खुद उसके माल का रखवाला बन जाता है। उन्होंने रमजान में जरूरतमंदों की मदद कर भाईचारे और इंसानियत की मिसाल कायम करने की अपील की। पीर बुखारी शाह मस्जिद में जुमा की नमाज हाफिज सैयद अब्दुल्लाह मियां चिश्ती ने अदा कराई, जबकि जामा मस्जिद आस्ताना आलिया समदिया में पेश इमाम कारी अय्यूब चिश्ती ने नमाज पढ़ाई। मोहल्ला तरीन स्थित मदीना मस्जिद में मुफ्ती मुजीब की इमामत में नमाज अदा की गई।नमाज के बाद मस्जिदों में सामूहिक दुआ की गई, जिसमें मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए अल्लाह से दुआएं मांगी गईं। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की बरकतों की मुबारकबाद भी दी।

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