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20 जनवरी, 2021|3:19|IST

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र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही संविधान का प्राण

र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही संविधान का प्राण

औरैया। हिन्दुस्तान संवाद

गुरुवार को दिबियापुर के विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय एवं वैदिक इंटर कॉलेज में संविधान दिवस एवं मिशन शक्ति के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए छात्रों ने रैली भी निकाली।

विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय में स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने संविधान एवं महिला संरक्षण, महिला सशक्तिकरण की शपथ ली। एनएसएस प्रभारी प्रोफ़ेसर यश कुमार ने संविधान दिवस के अवसर पर शपथ दिलाई।इस मौके पर संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर सभी संविधान सभा के सम्मानित सदस्यों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई । संचालन कर रहे डॉक्टर आलोक यादव ने संविधान में निहित मूल्यों के संरक्षण का विद्यार्थियों से आवाहन किया।डॉक्टर इकरार अहमद ने लोकतंत्र की जीवंतता के लिए विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संविधान का प्राण बताया। प्रोफेसर यश कुमार ने संविधान निर्माताओं की मंसा के अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने किसी भी सरकार के लिए समालोचना के अधिकार को लोकतंत्र का प्राण बताया। डॉक्टर जीपी मिश्र ने आवाहन किया यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ-साथ दूसरों की भलाई का भी चिंतन करें तो समाज एवं राष्ट्र में बहुत सुधार हो सकता है | प्रोफेसर आनंद पाल गौतम ने आवाहन किया कि संविधान में निहित मूल्यों का कड़ाई से अनुपालन करें। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्य डॉक्टर इफ्तेखार हसन ने 26 नवंबर को भारतीय संविधान के पारित होने तथा अंगीकृत किए जाने का दिवस बताया। संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया।भारतीय संविधान का आधार स्तंभ एवं आत्मा प्रस्तावना है जिसमें भारतीय लोकतंत्र का आधार जिन मूल्यों को बनाया गया है वह है- समानता, स्वतंत्रता, आपसी भाईचारा एवं न्याय। इन चार मजबूत स्तंभों पर हमारा संविधान टिका हुआ है। प्रत्येक शासन सत्ता का यह कर्तव्य है कि संविधान में निहित मूल्यों समानता ,स्वतंत्रता ,भाईचारा एवं न्याय को ईमानदारी से क्रियान्वयन करें। देश की वास्तविक शासक जनता है, क्योंकि देश का संविधान गण तांत्रिक एवं लोकतांत्रिक पद्धति के आधार पर पूर्णतया जनता पर आधारित है। यदि जनता अपने मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सचेत रहती है तथा शासन के निर्णयओं की पहरेदारी करती है तभी लोकतंत्र सही मायने में फलीभूत होगा एवं चिरस्थाई होगा। प्राचार्य डॉक्टर हसन एवं प्रोफेसर आलोक यादव को जिला प्रशासन ने शक्ति मिशन अभियान में सलाहकार बनाया है। संविधान दिवस के उपरांत विद्वान वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण ,महिला सुरक्षा ,महिला स्वावलंबन एवं महिलाओं के आत्मसम्मान के संरक्षण हेतु अपने विचार रखे। मिशन शक्ति की सामग्री विद्यार्थियों को वितरित की गई। साथ ही महिला संरक्षण हेतु सभी को शपथ दिलाई गई।डॉ संदीप ओमर ने कहा कि देश की आधी आबादी को सही मायने में आत्मनिर्भर बनाए बिना हम सशक्त लोकतंत्र की कल्पना नहीं कर सकते। प्रोफेसर श्रीनंदन पांडे ने नारी सुरक्षा हेतु समाज की जागरूकता पर बल दिया। डॉक्टर आलोक यादव ने नारी स्वावलंबन को मौलिक अधिकारों में वर्णित समानता एवं स्वतंत्रता के मूल्यों को फलीभूत होना बताया |डॉक्टर हसन ने महाविद्यालय में एक माह तक चलने वाले जूडो कराटे एवं महिला आत्मरक्षा की कार शालाओं को विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बताया|

इस गोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थियों की बड़े स्तर पर सहभागिता रही। प्रोफ़ेसर निशांत अग्रवाल, डॉ संदीप कुमार, पुस्तकालय प्रभारी नरेंद्र कश्यप, राहुल शुक्ला, दिलीप रावत, ओम व्रत पांडे, विश्राम सिंह यादव, सत्यदेव यादव, अनुपम तिवारी और पप्पू किशन प्रताप, नितेश कुमार संतोष कुमार आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यशाला प्राचार्य डॉक्टर इफ्तेखार हसन की अध्यक्षता एवं निर्देशन में संपन्न हुई

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  • Web Title:Freedom of speech and the life of the constitution