
बोले औरैया
Auraiya News - झूलते तारों से ग्रामीणों की परेशानी चरम पर, खेतों में कटाई-मड़ाई ठपफोटो: 1 लटक रहा तार दिखाती महिलाएं। 2 सड़क पर लटक रहा बिजली का तार।फफंूद, संवाददाता।ग्राम पंचायत फफंूद देहात के मजरा ग्रान मड़ैयां में...
झूलते तारों से ग्रामीणों की परेशानी चरम पर, खेतों में कटाई-मड़ाई ठप फोटो: 1 लटक रहा तार दिखाती महिलाएं। 2 सड़क पर लटक रहा बिजली का तार। फफंूद, संवाददाता। ग्राम पंचायत फफंूद देहात के मजरा ग्रान मड़ैयां में पिछले वर्ष से झूलते विद्युत तार ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका दोनों पर गंभीर खतरा बने हुए हैं। खेतों और सड़क के किनारे लगे दो खंभों के बीच विद्युत तार इतने नीचे आ गए हैं कि हारवेस्टर, ट्रैक्टर, थ्रेशर जैसे बड़े कृषि उपकरण तथा उपज से लदे वाहन तारों के नीचे से निकल ही नहीं पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लगातार लापरवाही किसी भी वक्त बड़ा हादसा करा सकती है।
आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की जनचर्चा के दौरान कुसमा देवी, महादेवी, आनंद कुमार, राजू, तिलक सिंह, रामबीर आदि का कहना है कि एक खंभा काफी झुक चुका है, जिससे पूरी विद्युत लाइन असंतुलित हो गई है। झुके तारों के कारण किसानों की कटाई-मड़ाई का काम प्रभावित हो रहा है। जब धान, गेहूं या अन्य फसलें पककर तैयार होती हैं और किसानों को समय पर कृषि मशीनें खेतों तक ले जानी होती हैं, तभी यह समस्या सबसे बड़ी बाधा बनती है। खेतों की कटाई में देरी होने से किसानों को कम भाव मिलते हैं और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। ग्राम मड़ैयां के ग्रामीणों ने बिजली विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि कटाई-मड़ाई प्रभावित न हो और किसी अनहोनी से पहले समस्या का समाधान हो सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से बड़े स्तर पर शिकायत दर्ज कराएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ विभाग की सक्रियता ही उन्हें दुर्घटना से बचा सकती है। ग्रामीण बोले.... झूलते तारों का खतरा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। खेत में जाने वाला मुख्य रास्ता इन्हीं तारों के नीचे से गुजरता है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में हैं। बारिश या तेज हवा चलने पर तार और नीचे आ जाते हैं, ऐसा लगता है कि किसी भी समय चिंगारी गिर सकती है। गांव वालों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर हाल देखने तक नहीं आया। कुसमा देवी हम महिलाएं रोज चारा लेने खेतों में जाती हैं। सबसे पहले ऊपर झूलते तारों को देखकर ही कदम बढ़ाती हैं। खंभा झुक जाने से पूरी लाइन असंतुलित है। डर लगता है कि कभी भी तार टूटकर गिर सकते हैं। खेतों तक सुरक्षित पहुंचना मुश्किल हो गया है। महादेवी झुकते तारों के कारण किसान समय पर फसल की कटाई-मड़ाई नहीं कर पा रहे। हारवेस्टर चालक भी जोखिम उठाकर नीचे से गुजरने को तैयार नहीं होते। रात में खेतों में काम करना बिल्कुल असंभव हो गया है। इससे फसल देर से बिकती है और भाव भी अच्छे नहीं मिलते। यह सीधी-सीधी आर्थिक हानि है। आनंद कुमार यह समस्या महीनों पुरानी है। ग्रामीण कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही इतनी अधिक है कि एक बार भी कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया कि लोग किन मुश्किलों से गुजर रहे हैं। जबकि यह किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती है। राजू झूलते तारों के नीचे से न ट्रैक्टर निकल पा रहा है, न थ्रेशर। गेहूं, चना, सरसों सभी फसलों की मड़ाई प्रभावित होती है। किसान अपने पशुओं को भी इसी रास्ते से खेतों में ले जाते हैं, लेकिन अब बिजली के तारों के कारण डर लगता है। हमारी मांग है कि बिजली विभाग तुरंत खंभा सीधा करे और तारों की ऊंचाई बढ़ाए। तिलक सिंह कई बार ट्रैक्टर निकालने की कोशिश की, लेकिन करंट का खतरा बना रहता है। तेज हवा में तार खतरनाक तरीके से हिलते हैं। रात में गांव के लोग इस मार्ग से गुजरने से डरते हैं। विभाग को तुरंत टीम भेजकर मरम्मत करानी चाहिए, वरना हादसा तय है। रामबीर महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। रोज खेतों में चारा लेने जाने वाली महिलाओं को तारों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चे खेलते-खेलते कई बार बिजली लाइन के पास पहुंच जाते हैं। तार गिरने की स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों को होगा। सगुना देवी बारिश के समय तारों से चिंगारी निकलते हम खुद देख चुके हैं। हवा चलने पर तार जमीन के और भी करीब आ जाते हैं। यह सामान्य स्थिति नहीं है, बल्कि एक गंभीर खतरा है, जिसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। कुसमा यह समस्या किसी एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, किसान—सब गंभीर रूप से प्रभावित हैं। गांव की सामूहिक मांग है कि विभाग जल्द टीम भेजकर झुके खंभे को सही करे और तारों की ऊंचाई बढ़ाए। मनोज कुमारी

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