
पाला और शीतलहर के कारण फसलों में नुकसान
Auraiya News - कड़ाके की सर्दी और पाले के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। आलू की फसल में झुलसा रोग की शुरुआत हो गई है, जिससे पैदावार कम होने की आशंका है। मटर और चना की फसलों पर भी पाला का बुरा असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने फसलों को बचाने के उपाय बताए हैं।
कड़ाके की सर्दी के साथ गिरता पाला और शीतलहर से किसान चिंतित होने लगे हैं, पाला पड़ने से आलू की फ़सल में झुलसा रोग की शुरुआत हो गई है। मटर, चना की फसल में नुकसान हो रहा है। पाला, शीतलहर के कारण पड़ रही कड़ाके की ठंड से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पाले के कारण आलू की फ़सल मे झुलसा रोग की शुरुआत हो गई है। आलू की पक्की फ़सल तैयार हो रही है। फसल में झुलसा रोग लग जाने के कारण पैदावार कम होने के आसार हैं। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। चना, मटर जैसी फसलों में भी पाला पड़ने से नुकसान होगा।
पाला से इन फसलों का फूल प्रभावित होगा। जिससे फसल के दाने कमजोर बनेंगे फलस्वरूप पैदावार कम हो सकती है। रवी की अन्य फसलों में भी पाला नुकसान पहुंचा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र औरैया के प्रभारी डॉक्टर राम पलट ने बताया कि आलू की फसल में झुलसा रोग की शुरुआत हो चुकी है। फसल को रोग से बचाने के लिए 600 से 800 लीटर पानी में दवा मिलाकर फसल में छिड़काव करें। फसल को प्रतिदिन देखें। रोग के लक्षण दिखने पर तुरन्त दवा का छिड़काव करें। झुलसा रोग में आलू के पौधे की पत्तियों पर काले तरह के निसान आने लगते हैं। पत्तियां सूखे तरह की लगने लगती हैं। सरसों की फसल में फलियां बन चुकी हैं। दाना भी पड़ गया है। इसलिए सरसों की फसल में नुकसान होने की संभावना कम है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




