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पीठ दर्द में लाभ दिलाता है उत्तानमंडूकासान

पीठ दर्द में लाभ दिलाता है उत्तानमंडूकासान

उत्तानमंडूकासन योग। ‘उत्तान का अर्थ तना हुआ और ‘मंडूक का अर्थ मेढक होता है। उत्तानमंडूकासन की अंतिम मुद्रा में शरीर सीधे तने हुए मेढक के समान लगती है। इसलिए यह नाम दिया गया है। इस आसन में सिर को कोहनियों से थामा जाता है। ताकि सिर पीछे की ओर न जाए। अगर इसको सही तरीके से किया जाए तो इसके बहुत सारे स्वस्थ लाभ है।

सबसे पहले आप वज्रासन में बैठ जाएं। दोनों घुटनों को फैलाएं। अब आप दाईं बांह उठाएं, मोड़ें और दाएं कंधे के ऊपर से पीछे ले जाकर हथेली को बाएं कंधे के नीचे रख दें। उसी तरह से अब आप बाईं बांह को मोड़ें तथा ऊपर से लेकर जाकर हथेली को दाएं कंधे के नीचे रख दें। अपने आपको ऊपर की ओर खीचें।

अपने हिसाब से इसी मुद्रा में बने रहें और धीरे धीरे इसकी अवधि को बढ़ाएं। वापस आते समय धीरे-धीरे बाईं बांह और फिर दाईं बांह हटाएं। घुटनों को आरंभिक अवस्था मंे ले आएं। यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

इस आसन का नियमित अभ्यास से आप पीठ दर्द से निजात पा सकते हैं। यह योगाभ्यास गले के दर्द में लाभकारी है। यह आसन डायाफ्राम की गति को सुधारने में सहायक होता है। इसके अभ्यास से धीरे धीरे आपके घुटने मजबूत होने लगता है। उत्तानमंडूकासन आसन आपके कोहनी को भी सबल बनाता है।

इस आसन के लगातार अभ्यास से आप कंधे के दर्द को रोक सकते हैं। इस आसन को अगर बहुत देर तक मेन्टेन किया जाए तो इससे पेट के बगल की चर्बी को कम किया जा सकता है।

इसके नित्य अभ्यास से आप अपने श्वसन संबंधी परेशानियों को भी सुधार सकते हैं। अंडाशय और टेस्टिस के लिए भी लाभकारी है।

उत्तानमंडूकासन उनको नहीं करनी चाहिए जिनको ज्यादा कमर दर्द हो। अगर आपके घुटने में परेशानी हो तो इस आसन का अभ्यास न करें। कोहनी में दर्द होने पर भी इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए। यह आसन उनको नहीं करनी चाहिए जिनके कंधे में बहुत दर्द हो।

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  • Web Title:Benefits in Back Pain