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अहंकारी मनुष्य स्वयं का पतन करता है

हिन्दुस्तान टीम,औरैयाNewswrap
Mon, 29 Nov 2021 06:35 PM
अहंकारी मनुष्य स्वयं का पतन करता है

अजीतमल। संवाददाता

अहंकारी मनुष्य अपने पतन का स्वयं ही कारण बनता है। अहंकार उसके बल, बुद्धि और उसे नियम-संयम को खा जाता है। भगवान इसे हरने के लिए समय-समय पर अवतार लेते हैं।

बाबरपुर कस्बा के मोहल्ला अशोक नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य निशा शास्त्री ने यह बातें कहीं। उन्होंने बताया की अहंकार मनुष्य को स्वार्थी भी बना देता है। मनुष्य अपनी नजरों से तो अहंकार के कारण गिर ही जाता है। दूसरों की नज़रों में भी वह गिर जाता है। भगवान अपने भक्तों की अहंकार से रक्षा करने के लिए समय-समय पर लीला रच कर उनके अहंकार को तोड़ते हैं। उन्होंने गोवर्धन लीला का विस्तार से वर्णन करते हुए इंद्र के अहंकार को भगवान कृष्ण ने किस प्रकार तोड़ा, उसका मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब अहंकार के कारण इंद्र ने वर्षा आरंभ कर दी। तो भगवान श्री कृष्ण ने 7 दिन तक उंगली पर गोवर्धन को धारण कर गोप गवालों की रक्षा की। और इंद्र के अहंकार को दूर कर गोवर्धन की पूजा कराई। इंद्र को ज्ञान उत्पन्न होने पर उसने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। इस अवसर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ रही है।

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