
बोले औरैया
Auraiya News - ग्राम पंचायत सिरयाबां के मजरा बेनी पुरवा में सड़क निर्माण का कार्य 14 वर्षों से रुका हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में कच्ची सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है।
थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिरयाबां के मजरा बेनी पुरवा में सड़क निर्माण का मामला बीते 14 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब 14 साल पहले सड़क निर्माण की शुरुआत की गई थी, लेकिन गिट्टी डालने के बाद कार्य बंद हो गया। ग्रामीणों के अनुसार ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया और उसके बाद आज तक न तो निर्माण कार्य आगे बढ़ा और न ही किसी जिम्मेदार ने सुध ली। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की जनचर्चा में महाराज सिंह, बलराम सिंह, सुरेश कुमार, सरोजनी देवी, रेखा देवी, जगदीश चंद्र, रामशंकर, सौरभ कुमार, मनी, अनिल कुमार आदि का कहना है कि बरसात के दिनों में यह कच्ची सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है।
हालात ऐसे हो जाते हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी की तबीयत खराब हो जाए तो उसे चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। एंबुलेंस या अन्य वाहन मजरे तक नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों की जान पर भी बन आती है। बेला-बिधूना मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बसे इस मजरे के लोग सड़क न होने की सजा भुगत रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती और रोजमर्रा के कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से राहत मिल सके। स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बेनी पुरवा मार्ग बेला-बिधूना मुख्य मार्ग से लगभग एक किलोमीटर का है। इसका कुछ हिस्सा वन विभाग के अंतर्गत आता है। वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र एनओसी न मिलने के कारण काम रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कार्रवाई चल रही है मोहम्मद अकील, जेई पीडब्ल्यूडी विभाग बोले ग्रामीण करीब 14 साल से सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया और उसके बाद कोई देखने तक नहीं आया। बरसात में कीचड़ के कारण घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। बीमारों को चारपाई पर ढोना पड़ता है। कई बार शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले। अब सरकार और प्रशासन को इस ओर गंभीरता दिखानी चाहिए। महाराज सिंह सड़क न होने से सबसे ज्यादा परेशानी बरसात में होती है। बच्चों को स्कूल भेजना तक मुश्किल हो जाता है। खेत से फसल निकालने में भी दिक्कत होती है। अधिकारी आते हैं, देखते हैं और चले जाते हैं। 14 साल में अगर सड़क नहीं बन पाई तो यह सिस्टम की नाकामी है। अब मजबूरी में आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। बलराम सिंह बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी समस्या है। वाहन मजरे तक आ ही नहीं पाता। चारपाई पर मरीज को उठाकर ले जाना पड़ता है। कई बार हालत बिगड़ जाती है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न मिलना दुखद है। सरकार विकास की बात करती है, लेकिन हमारा मजरा आज भी पिछड़ा हुआ है। सुरेश कुमार बरसात में घर से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। गर्भवती महिलाओं को भी कीचड़ से होकर जाना पड़ता है। कई बार गिरकर चोट लग जाती है। सड़क बन जाए तो हमारा जीवन आसान हो सकता है। हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। सरोजनी देवी 14 साल में सिर्फ वादे मिले, काम नहीं। नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। बरसात में पूरा मजरा टापू बन जाता है। राशन, दवा सब लाने में दिक्कत होती है। सरकार को हमारी हालत देखनी चाहिए और जल्द सड़क बनवानी चाहिए। रेखा देवी गांव की तरक्की सड़क से जुड़ी होती है, लेकिन हमारे मजरे में यह सपना ही रह गया है। किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाते। बरसात में ट्रैक्टर भी नहीं जा पाता। इतने सालों से समस्या जस की तस है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जगदीश चंद्र हम लोग रोज परेशानी झेल रहे हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बुजुर्ग घर में कैद होकर रह जाते हैं। शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। 14 साल बहुत लंबा समय होता है। अब प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए। रामशंकर युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा दोनों ही सड़क पर निर्भर हैं। सड़क न होने से हम पीछे रह गए हैं। बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं। अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए। जल्द सड़क बने, यही हमारी मांग है। सौरभ कुमार बरसात के दिनों में घर से निकलना डर जैसा हो जाता है। फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है। महिलाओं और बच्चों को बहुत दिक्कत होती है। सड़क निर्माण में देरी समझ से बाहर है। सरकार को हमारी समस्या पर ध्यान देना चाहिए। मनी 14 साल से सड़क अधूरी पड़ी है, यह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। अगर समय रहते काम पूरा कर दिया जाता तो आज यह स्थिति न होती। हम सभी ग्रामीण एकजुट होकर सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। अनिल कुमार

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