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6 अगस्त, 2020|5:45|IST

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119 करोड़ की भूमि से हटा कब्जा

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अशोक पुरी कोआपरेटिव के कब्जे वाली 119 करोड़ की सरकारी भूमि को सरकार के खाते में दर्ज करने का आदेश एसडीएम दिया है। एसडीएम के इस निर्णय के बाद करीब 504 एकड़ जमीन से कब्जा हटाया जाएगा। इसके साथ ही तहसील क्षेत्र के अन्य ग्राम पंचायतों की जमीन को भी कब्जामुक्त कराया जाएगा।

एसडीएम बिधूना ने एंटी भूमाफिया अभियान के तहत में 150 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। एसडीएम राशिद अली ने बताया है कि रूरूखुर्द में अशोकपुरी की जमीन को लेकर अरविन्द पाल से दस्तावेज मांगे गये थे जिसकी जांच करने पर पाया गया फर्जी अभिलेख बनाकर दिये गये थे । जिस पर उनके स्तर पर भूमि को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया। इस भूमि की बाजार की कीमत करीब 119 करोड़ रूपए अंाकी जा रही है। इसके अलावा बरूकुलासर में भी लगभग 58 हेक्टेयर जमीन को पूर्व की तरह चरागाह की श्रेणी में अंकित किया जा रहा है। इसके अलावा चरागाहों व तालाबों आदि की पैमाइश कराई जा रही है। उधर अशोकपुरी सामूहिक एवं औद्यौगिक कृषि समिति लिमिटेड नेबिलगंज अछल्दा के अध्यक्ष अरविन्द पाल ने एसडीएम बिधूना राशिद अली की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब में बताया कि अशोकपुरी सहकारी कृषि एवं औद्यौगिक समिति लिमिटेड अछल्दा दिनांक 10 जनवरी 1952 को निबन्धन संख्या 983 के द्वारा सहकारी समिति अधिनियम व नियमावली के अन्तर्गत रजिस्टर्ड संस्था है। समिति निबन्धन की तिथि से ही उपविधियों, अधिनियम एवं नियमावली के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत अपने सदस्यों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिये लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि समिति का समय समय निर्वाचन, आडिट व संतुलन कार्य हो रहा है। यह समिति 503 एकड़ जमीन पर 70 वर्षों से अपने सदस्यों के साथ अनवरत विधिसम्मत कार्यों के तहत कार्यरत है। वर्तमान में समिति के कुल सदस्यों की संख्या 280 है समिति की अचल सम्पत्ति के साथ इन सदस्यों का भरण पोषण हो रहा है। बताया कि समिति के पास कुल उपलब्ध 503 एकड जमीन में से 126 एकड जमीन ग्वारी मौजा में मौजूद है। जिस पर राजस्व विभाग के कार्मिकों ने धोखाधडी कर 126 एकड जमीन ग्वारी ग्राम समाज के नाम स्थानान्तरित कर दी गई है जिस पर न्यायालय में अनियमित कृत्य के विरूद्ध संघर्ष किया जा रहा है। शेष जमीन 377 एकड रकबा पर समिति अपने नियमित सदस्यों के साथ विगत 70 वर्षों से काबिज है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में समय समय पर राजस्व विभाग व चकबन्दी विभाग एवं सीलिंग आदि के दौरान समिति के नाम भूभाग पर कोई प्रश्नचिन्ह नही लगाया गया। विगत 70 वर्षों के दौरान राजस्व अभिलेखों में यदि कोई कपटपूर्ण कार्यवाही अंकित कर ली गई है तो संस्था की जमीन पर प्रश्न उत्पन्न किया जाना न्यायोचित नहीं है। इसी के साथ उन्होंने नोटिस के हवाले से चेताया कि समिति की जमीन जो 70 वर्षों से समिति के सदस्यों के अधीन है उस पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया गया तो सोनभद्र जैसी स्थिति बन सकती है।