बगैर नीट डॉक्टर बनने की कोशिश, फर्जीवाड़ा कर रजिस्ट्रेशन कराया, 41 पर केस की तैयारी
आयुष विभाग में नीट परीक्षा पास किए फर्जी दस्तावेज के आधार पर रजिस्ट्रेशन का खुलासा होने के बाद अब कार्रवाई की रफ्तार तेज हो गई है। फर्जी दस्तावेजों से पंजीकरण कराने वाले 41 अभ्य़र्थी मिले हैं। इन पर अब एफआईआर की तैयारी हो रही है।

आयुष विभाग में बगैर नीट ही फर्जी दस्तावेजों की मदद से बोर्ड में पंजीकरण कराकर डॉक्टर बनने वालों के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी गई है। बोर्ड की तरफ से ऐसे सभी मामलों में एक साथ 23 जिलों में मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। पत्र में अधिकारियों को जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कराकर बोर्ड को उसकी कॉपी भेजने को कहा गया है।
आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड में बिना नीट परीक्षा पास किए फर्जी दस्तावेज के आधार पर रजिस्ट्रेशन का खुलासा होने के बाद अब कार्रवाई की रफ्तार तेज हो गई है। बोर्ड के दस्तावेजों के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी 23 जिलों से जुड़े हैं। इन सभी जिलों को पत्र भेजकर अगले तीन दिन में एफआईआर दर्ज कराकर उसकी कॉपी बोर्ड को भेजने के लिए कहा गया है। विभाग की तरफ से यह निर्देश स्पीड पोस्ट के साथ ही ईमेल के जरिए भी भेज दिया गया है। ताकि डाक मिलने में देरी का बहाना बनाकर कोई क्षेत्रीय अधिकारी बच न सके।
अंतर्राज्यीय गिरोह होने की संभावना
बोर्ड के निवर्तमान उपाध्यक्ष डा. शैलेश कुमार राय के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में पांच फर्जी रजिस्ट्रेशन की शिकायत पर दिल्ली से नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) की टीम यूपी आयी थी। दस्तावेजों की जांच में 41 फर्जी रजिस्ट्रेशन मिले थे। डा. शैलेश ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के साथ ही गृह मंत्री, राज्यपाल, मुख्य सचिव, डीजीपी और एनसीआईएसएम अध्यक्ष को भी पत्र भेजा है। राय ने फर्जी रजिस्ट्रेशन मामले में लखनऊ में एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इस मामले में यूपी के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के गिरोह शामिल हैं। ऐसे में जिलों में एफआईआर होने से इस मामले का खुलासा नहीं हो सकेगा।
इन जिलों में दर्ज होगी एफआईआर
गोंडा, रामपुर, कासगंज, प्रतापगढ़, कुशीनगर, बरेली, लखीमपुर खीरी, संतकबीर नगर, श्रावस्ती, मुरादाबाद, सुल्तानपुर, झांसी, संत रविदास नगर, रायबरेली, महाराजगंज, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सीतापुर, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या, जौनपुर और अमरोहा।
दो की जगह ढाई साल का होगा रेडियोलॉजी का डिप्लोमा
वहीं, उत्तर प्रदेश में रेडियोलॉजी फील्ड में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद (यूपीएसएएचसी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मेडिकल रेडियोलॉजी से जुड़े कोर्सों में बड़ा बदलाव किया है। अब पूर्व की भांति अलग-अलग चलने वाले डिप्लोमा इन सीटी स्कैन टेक्नीशियन, एमआरआई टेक्नीशियन और एक्सरे टेक्नीशियन कोर्स बंद करके नया कोर्स शुरू किया जाएगा। इसकी अवधि दो की जगह ढाई साल की होगी।
उत्तर प्रदेश राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख परिषद के अध्यक्ष डा. कमल पन्त द्वारा गत दिवस इस संबंध में प्रदेश के सभी एलाइड एवं हेल्थकेयर संस्थानों के कुलसचिव और प्रधानाचार्यों को पत्र जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार अब सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे के अलग-अलग दो साल के डिप्लोमा की जगह डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी कोर्स शुरू किया जाएगा। इसकी अवधि दो की जगह ढाई साल होगी, जिसमें छह माह की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है। हर संस्थान में इसकी न्यूनतम 20 और अधिकतम 60 सीटें होंगी।
छात्रों-अस्पतालों दोनों को मिलेगा फायदा
इसके साथ ही दो साल के डिप्लोमा इन ऑप्थेल्मिक असिस्टेंट की अवधि भी बढ़ाकर अब ढाई साल कर दी गई है। हर संस्थान में इसकी न्यूनतम 10 और अधिकतम 40 सीटें होंगी। दरअसल राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) के ड्राफ्ट करिकुलम के अनुसार इसे लागू किया जा रहा है। इसमें एक ही कोर्स में छात्र सीटी, एमआरआई और एक्सरे टीनों की ट्रेनिंग ले सकेंगे। इससे उन छात्र-छात्राओं को लाभ होगा जो रेडियोलॉजी टेक्नीशियन बनना चाहते हैं। वहीं अस्पतालों को भी मल्टी स्किल वाले टेक्नीशियन मिल सकेंगे। फिलहाल यह मान्यता अंतरिम तौर पर दी गई है। एनसीएएचपी द्वारा फाइनल पाठ्यक्रम जारी होते ही सभी संस्थानों को वही लागू करना होगा।


