
सपा सांसद सुमन के घर पर हमला करना पड़ा भारी, आठ के खिलाफ चार्जशीट, पुलिस ने बढ़ाईं धाराएं
राणा सांगा के खिलाफ विवादित बोल के चलते सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के घर पर करणी सेना ने धावा बोला था। पथराव करके गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए थे। घर पर भी पथराव किया था।
राणा सांगा के खिलाफ विवादित बोल के चलते सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के घर पर करणी सेना ने धावा बोला था। पथराव करके गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए थे। घर पर भी पथराव किया था। पुलिस कर्मी जख्मी हुए थे। इस मामले में उनके बेटे रणजीत सुमन ने मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है। मुख्य आरोपित ओकेंद्र राणा और मोहित सिकरवार के खिलाफ विवेचना प्रचलित रखी है।
26 मार्च को संजय प्लेस में एचआईजी फ्लैट स्थित सपा सांसद रामजीलाल सुमन के घर हमला हुआ था। पुलिस को पहले से पता था कि करणी सेना के कार्यकर्ता आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐलान किया गया था। पुलिस ने बैरियर लगाए थे। करणी सेना के कार्यकर्ता बैरियर तोड़ते हुए एचआईजी फ्लैट में घुसे थे। इस घटनाक्रम से आगरा पुलिस की बहुत किरकिरी हुई थी। पुलिस को बैरियर से गिराते हुए ओकेंद्र राणा गाड़ी लेकर आगे बढ़ा था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना के बाद रणजीत सुनम ने हरीपर्वत थाने में बवाल, मारपीट, जान से मारने की धमकी, लूट आदि धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
मुकदमे की विवेचना पहले इसरार अहमद ने ग्रहण की। उनके बाद धर्मेंद्र सिंह को मिली। धर्मेंद्र सिंह से विवेचना इंस्पेक्टर क्राइम सत्येंद्रपाल सिंह को मिली। 17 मई 2025 को एसआईटी का गठन किया गया। विवेचना के दौरान वादी मुकदमा रणजीत सुमन ने एससी होने का प्रमाण पत्र दिया। इसके बाद विवेचना तत्कालीन एसीपी हरीपर्वत विनायक भौसले को मिली। उन्होंने आरोपपत्र लगाया।
इनके खिलाफ भेजी गई चार्जशीट
मारपीट, बलवा, तोड़फोड़, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और एससी/एसटी एक्ट के तहत चार्जशीट लगाई गई है। चार्जशीट में अवागढ़ निवासी विनय प्रताप सिंह जादौन, जलेसर निवासी योगेंद्र सिंह जादौन, जगनेर निवासी संदीप परमार, फिरोजाबाद निवासी अजय उर्फ राहुल जादौन, एत्मादपुर निवासी अभिजीत सिंह सिरकवार, अछनेरा निवासी दीपक सिसौदिया, फिरोजाबाद निवासी नरेश सिंह व सादाबाद निवासी शिवम कुमार को आरोपित बनाया गया है। मुकदमे के खिलाफ ओकेंद्र राणा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर थी। इस वजह से ओकेंद्र राणा और उसके साथी मोहित सिकरवार के खिलाफ विवेचना प्रचलित रखी गई है।
करानी होगी जमानत
पुलिस ने इस मामले में पहले आरोपपत्र मामूली धाराओं में तैयार किया था। सात आरोपियों को सात से कम सजा का आरोपित होने के चलते नोटिस देकर छोड़ दिया गया था। विवेवना में एसी/एसटी एक्ट की बढोत्तरी के बाद आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोपियों को अपनी जमानत करानी पड़ेगी।





