यूपी में एटीएस की कार्रवाई: पाकिस्तानी गैंगस्टर के लिए काम कर रहे चार और संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
यूपी में एटीएस ने 200 संदिग्धों को खंगाला। एटीएस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए काम कर रहे चार और संदिग्ध आतंकियों को बुधवार को एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया।

यूपी में एटीएस ने बड़ी कार्रवाई की है। एटीएस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए काम कर रहे चार और संदिग्ध आतंकियों को बुधवार को एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया। इनमें सहारनपुर निवासी महकाब (22 वर्ष) व शाहरुख (20 वर्ष), मुजफ्फरनगर निवासी गगनदीप उर्फ गुरी सिंह (25 वर्ष) और हरिद्वार निवासी मुशर्रफ (22 वर्ष) शामिल हैं।
एटीएस ने इससे पूर्व पाकिस्तानी गैंगस्टर व आईएसआई से जुड़े चार संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा था। यह चौथा ग्रुप पकड़ा गया है। पाकिस्तनी गैंगस्टर ने स्लीपर सेल के इस ग्रुप को एक स्कूल संचालक व अस्पताल पर हमले समेत अन्य टास्क सौंपे गए थे। आरोपितों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर और गहनता से पूछताछ की भी तैयारी है। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार पाकिस्तनी गैंगस्टर शहजाद भट्टी व आबिद जट आईएसआई के इशारे पर भारतीय युवकों के अलग-अलग ग्रुप बनाकर उन्हें आर्थिक लाभ का प्रलोभन देकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश में सामाजिक सौहार्द, एकता, अखंडता, संप्रभुता एवं सुरक्षा को क्षति पहुंचाने की साजिश रच रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एटीएस और एसटीएफ ने संयुक्त रूप से प्रदेश में लगभग 200 संदिग्धों को खंगाला, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जिन पर एटीएस आगे की छानबीन कर रही है। एटीएस शहजाद भट्टी व आबिद जट्ट के नेटवर्क को तोड़ने के लिए इससे पहले तीन मुकदमे दर्ज कर कई संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
इंस्टाग्राम के जरिए सौंपे गए थे ये टास्क
एटीएस के अनुसार आरोपी महकाब और गगनदीप उर्फ गुरी ने पूछताछ में बताया कि वे इंस्टाग्राम के माध्यम से पाकिस्तानी गैंगेस्टरों से जुड़े थे। आबिद जट्ट ने उन्हें अन्य राज्य की एक राजनैतिक पार्टी के कार्यालय, अस्पताल तथा कई स्कूलों का संचालन करने वाले एक व्यक्ति को निशाना बनाने का टास्क सौंपा था। इसके लिए पहले रेकी करने के लिए कहा गया था। आबिद जट्ट ने यह भी कहा था कि यह काम हो जाने के बाद अगला टारगेट दिया जाएगा।
वीडियो काल से दिए जा रहे हुक्म
एटीएस के अनुसार आबिद जट्ट वीडियो काल के माध्यम से आरोपितों को देश में कई स्थानों पर आतंकी गतिविधियों से दहशत फैलाने के लिए अधिक से अधिक नवयुवकों को अपने साथ जोड़ने का संदेश देता था। उसके कहने पर ही महकाब और गगनदीप ने अपने साथ शाहरुख और मुशर्रफ को जोड़ा गया था। आरोपी सोशल मीडिया के प्लेटफार्मों के माध्यम से अस्पताल उड़ाने के लिए रेकी और हथियार खरीदने की योजना बना रहे थे।
नोएडा में की थी मीटिंग
आरोपी महकाब व गगनदीप ने मार्च 2026 में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से नोएडा में मीटिंग की थी, जिससे वह अपने आतंकी मंसूबों को अंजाम दे सकें। पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को खुश कर सकें। मीटिंग में अभियुक्तों के बीच पैसे व हथियार आदि लेने की बात हुई थी। एटीएस ग्रुप से जुड़े कुछ अन्य युवकों की भी तलाश कर रही है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


