झांसी जेल से प्रयागराज लाए जा रहे अतीक के बेटे अली का काफिला अचानक रुका; बदला गया रूट
अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए अतीक के बेटों अली और उमर को जेल से निकालकर प्रयागराज ले जाया जा रहा है। इस बीच अली के काफिले का रूट अचानक से बदल दिया गया। सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों भाइयों को अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है।

माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद आज उसके शव को प्रयागराज के कसारी-मसारी में सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिली इजाजत पर अतीक के बेटे अली को झांसी और उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज ले जाया जा रहा है। दोनों को कड़ी सुरक्षा के साथ प्रयागराज ले जाया जा रहा है। इस बीच खबर है कि झांसी जेल से प्रयागराज ले जाए जा रहे अली के काफिले को सुरक्षा कारणों से उरई के बाहर बड़ागांव क्षेत्र में अचानक रोका गया। काफिला करीब दो मिनट तक रुका रहा। इसके बाद बदले रूट से प्रयागराज की ओर रवाना हो गया।
अली के काफिले के रूट को अचानक बदला गया है। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार अली को झांसी-खजुराहो हाईवे के रास्ते प्रयागराज ले जाया जाना था, लेकिन अंतिम समय में रूट बदलकर झांसी-कानपुर मार्ग से काफिला रवाना किया गया। सुरक्षा कारणों के चलते काफिले को उरई के बाहर बड़ागांव क्षेत्र में करीब 2 मिनट के लिए रोका गया। अचानक काफिले के रुकने से आसपास के लोग सकते में आ गए। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बीच 6 गाड़ियों का काफिला कुछ देर ठहरने के बाद प्रयागराज की ओर रवाना हो गया।
अली अहमद को लेकर चल रहे काफिले में पहले से तय रूट में बदलाव कर उसे झांसी होते हुए कानपुर के रास्ते प्रयागराज ले जाया जा रहा है। रूट परिवर्तन की वजह से रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। बड़ागांव में काफिला रुकने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई। लोगों का कहना था कि अचानक इतनी गाड़ियों के साथ काफिला रुकने से थोड़ी देर के लिए हर कोई सकते में था लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण कोई अव्यवस्था नहीं हुई। फिलहाल अली अहमद का काफिला झांसी-कानपुर मार्ग से होते हुए यमुना पुल को क्रॉस कर जिला कानपुर देहात पहुंच गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर रूट में बदलाव किया गया और आगे भी आवश्यकतानुसार व्यवस्था की जाएगी।
भाई के जनाजे में शामिल होने की मिली है इजाजत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतीक अहमद के जेल में बंद दोनों बेटों मोहम्मद उमर और अली अहमद को अपने छोटे भाई आबान अहमद के जनाजे में शामिल होने और अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में निभाने के लिए सशर्त कस्टडी पैरोल की मंजूरी दी है।
बुआ और भाई से एक घंटे मुलाकात की मिली अनुमति
कस्टडी पैरोल के दौरान उमर और अली को अपनी बुआ परवीन कुरैशी और छोटे भाई अहजम अहमद से एक घंटे तक मिलने की अनुमति दी गई है। यह मुलाकात पुलिस की मौजूदगी में तय स्थान पर होगी। अंतिम संस्कार और परिजनों से मुलाकात पूरी होते ही दोनों को वापस संबंधित जेलों में भेज दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकीलों ने कस्टडी पैरोल पर कोई सैद्धांतिक आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद कोर्ट ने मानवाधिकारों और न्याय के सिद्धांतों का हवाला देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।
मीडिया से नहीं करेंगे बात
कोर्ट ने कहा है कि पैरोल के दौरान दोनों भाई न तो मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) से बात करेंगे और न ही किसी सार्वजनिक सभा या जुलूस का हिस्सा बनेंगे। जनाजे में वे केवल धार्मिक रस्में कराने वाले धर्मगुरु, अपनी बुआ और भाई से ही बातचीत कर सकेंगे।


