बेटे से डोसा ऑर्डर करने को कहा; रिटायर्ड फौजी ने गोली मारकर खुदकुशी की, जबड़ा और भेजा उड़ा
कानपुर के बर्रा में रिटायर्ड फौजी रामबाबू राजपूत (55) ने रविवार को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। बेटे ने बताया कि वह कुछ दिनों से अवसाद में थे। परिजनों ने बंदूक की सफाई के दौरान गोली चलने की बात कही है, जबकि पुलिस को आत्महत्या का शक है। मामले की जांच जारी है।

कानपुर के बर्रा में रहने वाले रिटायर्ड फौजी ने रविवार दोपहर बेटे से डोसा और पानी के बताशे का ऑनलाइन आर्डर कराने के बाद अपनी दोनाली बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली लगने से उनका जबड़ा और भेजा उड़ गया था। चूंकि इस बंदूक की लंबाई थोड़ी ज्यादा होती है, ऐसे में आशंका है कि उन्होंने ठोड़ी पर बंदूक की नाल रखी और पैर से ट्रिगर दबाकर गोली चला दी। हालांकि परिजनों का कहना है कि बंदूक की सफाई करते समय गोली चली है लेकिन साक्ष्य और बेटे के बयान आत्महत्या की ओर ही इशारा कर रहे हैं। बर्रा के दामोदरनगर निवासी 55 वर्षीय रामबाबू राजपूत 13 साल पहले फौज से रिटायर हुए थे। परिवार में पत्नी संतोषी, बेटी नेहा और इकलौता बेटा सूरज है। सूरज ने बताया कि पिता वर्तमान में कानपुर देहात के पुखरायां स्थित स्टेट बैंक शाखा में गार्ड की नौकरी करते थे। वह कुछ दिनों से किसी बात को लेकर अवसाद में थे।
रिटायर्ड फौजी ने गोली मारकर खुदकुशी की
रविवार दोपहर करीब तीन बजे वह कमरे में आराम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर वह मां के साथ ऊपर कमरे में पहुंचा तो पिता खून से लथपथ पड़े थे। पुलिस को सूचना देकर पड़ोसियों की मदद से उन्हें हैलट अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ देर बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार गोली लगने से रामबाबू का पूरा सिर और जबड़ा उड़ गया था, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं, बर्रा थाना प्रभारी रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों ने सफाई के दौरान गोली चलने की बात कही है।आत्महत्या करने की भी बात सामने आ रही है। जांच की जा रही है।
कागज और पेन मंगवाना
बेटे सूरज ने बताया कि पिता ने घटना से पहले सादा कागज और पेन लाने की बात कही थी। वह कागज व पेन निकाल ही रहा था, तभी गोली चल गई। ऐसे में आशंका है कि वह जान देने से पहले कुछ लिखना चाहते थे।
जबड़े और भेजे का उड़ना
परिजन कह रहे कि सफाई करते समय गोली चली। हालांकि जब भी कोई बंदूक साफ करता है तो पैर में रखकर या नाल ऊपर की ओर करके करता है। ऐसे में गोली चलती है तो जबड़े और भेजे का उड़ना भी संदेह पैदा करता है।
फौजी से ऐसी गलती कैसे
चूंकि रामबाबू फौज से रिटायर्ड थे। ऐसे में तय है कि वह हथियारों के रखरखाव से भलीभांति परिचित होंगे। ऐसे में वह लोडेड बंदूक की सफाई करने की लापरवाही नहीं कर सकते


