शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ क्यों कोर्ट पहुंचे आशुतोष ब्रह्मचारी? क्या है पूरा मामला
आशुतोष ब्रह्मचारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ क्यों कोर्ट पहुंचे? आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के पास हमले का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

प्रयागराज में माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के पास मौनी अमावस्या के दिन कथित रूप से हुए जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। अदालत ने थाना प्रभारी झूंसी से स्पष्ट पूछा है कि कोई मुकदमा इस संबंध में दर्ज है अथवा नहीं, अगली तिथि से पहले जवाब दाखिल किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 28 लगाई है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पार्चा ने आशुतोष ब्रह्मचारी के अधिवक्ता के तर्कों को सुनकर एवं पेश प्रार्थना पत्र पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दिया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट(आगरा) के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि माघ मेला 2026 में सेक्टर-6 स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति शिविर में चल रहे अनुष्ठान और महायज्ञ के दौरान 18 जनवरी को निकली श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास कथित रूप से हमला किया गया। उनके अनुयायियों ने आम रास्ते पर अवैध जाम लगाकर यात्रा रोकी और विरोध पर लोगों पर सामूहिक हिंसक हमला किया। साथ ही वादी का गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई। घटना में श्रीकृष्ण सेना के पदाधिकारी भी घायल हुए और ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज की प्रतिमा नीचे गिर गई। यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद भी लगातार फोन पर शिकायत वापस लेने का दबाव और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। प्रार्थना पत्र में अविमुक्तेश्वरानंद पर ‘शंकराचार्य’ पद का अवैध उपयोग कर श्रद्धालुओं को गुमराह करने का भी आरोप है।
प्रार्थना पत्र में अविमुक्तेश्वरानंद, अरविंद मिश्रा, मुकुंदानंद एवं कई दर्जन अज्ञात लोगों को विपक्षी बनाया गया है तथा न्यायालय से बीएनएस की धारा 175 की उप धारा (3) के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश किए जाने की प्रार्थना की गई है।
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