गुंबद ढहने से एक और अधिवक्ताओं की मौत, हंगामे के बाद सीएमओ-स्वास्थ्यकर्मियों पर केस

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
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गोरखपुर स्थित श्मशान घाट पर गुबंद गिरने से दो वकीलों की मौत हो गए। इस मामले में सीएमओ और स्वास्थ्यकर्मियों पर केस भी दर्ज कराया गया है। उधर सीएम योगी ने मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है।

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गोरखपुर में श्मशान घाट पर गुंबद गिरने से दो वकीलों की मौत

Gorakhpur News: गोरखपुर में राप्ती तट स्थित राजघाट के गुरु श्री गोरक्षनाथ घाट पर रविवार सुबह बारिश के दौरान गुंबद अचानक भरभराकर गिर गया। इसमें वहां बैठे दो अधिवक्ता बुरी तरह से घायल हो गए। जिनमें से एक अधिवक्ता ने दोपहर में अस्पताल पहुंचकर दम तोड़ दिया। अब दूसरे अधिवक्ता की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में एंबुलेंस समय से न मिलने-इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर साथी वकीलों ने जिला अस्पताल पर करीब साढ़े चार घंटे प्रदर्शन किया। उसके बाद सीएमओ व कुछ स्वास्थ्यकर्मियों पर केस दर्ज किया गया। डीएम ने निर्माण संरचना-एंबुलेंस रिस्पांस टाइम की जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये आर्थिक मदद की घोषणा की है। प्राथमिक तौर पर बिजली गिरने से गुंबद ढहने की बात सामने आई है। वास्तविक कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।

जानकारी के मुताबिक, अधिवक्ता विनोद तिवारी की मां का रविवार को राजघाट पर अंतिम संस्कार था। इसमें शामिल होने के लिए अधिवक्ता आलोक अस्थाना और संजय सिंह भी घाट पहुंचे थे। अंतिम संस्कार के दौरान बारिश शुरू होने पर दोनों पास में बने चबूतरे पर बैठ गए। इसी दौरान अचानक गुंबद ढह गया और दोनों उसके मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों और सफाईकर्मियों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची। इसके बाद घायल संजय सिंह को मैजिक और आलोक अस्थाना को ऑटो से जिला अस्पताल भेजा गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने आलोक अस्थाना को मृत घोषित कर दिया, जबकि संजय सिंह को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान देर शाम संजय सिंह को भी मृत घोषित कर दिया गया। डीएम दीपक मीणा, एसपी सिटी निमिष पाटील समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने जिला अस्पताल पहुंचकर जानकारी ली।

हादसे के बाद बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे वकील

उधर, हादसे के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने समय पर एंबुलेंस न मिलने और सीएमओ को सूचना दिए जाने के बावजूद इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। सुबह 11 बजे से शाम करीब साढ़े चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने अधिवक्ताओं की मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद मृत अधिवक्ता आलोक अस्थाना की पत्नी शालिनी अस्थाना की तहरीर पर कोतवाली थाने में सीएमओ और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ लापरवाही के आरोप में केस दर्ज किया गया। जिलाधिकारी ने गुंबद की संरचना और हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने मदद के साथ अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे संज्ञान लेते हुए अधिवक्ताओं के निधन पर दुख जताया है। साथ ही पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी पीड़ितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य की निगरानी करते रहें।

क्या बोले जिम्मेदार

इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजेश झा का कहना है कि अधिवक्ताओं की मौत दुखद है। उनके परिजनों के आरोप बेबुनियाद है। घटना की सूचना मुझे जिलाधिकारी से मिली। मैं फौरन जिला अस्पताल पहुंचा। अधिवक्ता की पत्नी से न तो मेरी मुलाकात हुई न ही कोई संवाद हुआ। वहां मौजूद कुछ लोगों ने एम्बुलेंस न पहुंचने की मौखिक शिकायत की, जिसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस मामले में डीएम ने भी जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित व्यक्तियों से कॉल डिटेल मांगी जा रही है। वहीं दूसरी ओर एसपी सिटी निमिष पाटील का कहना है कि घटना दुखद है। इस मामले में मृतक अधिवक्ता की पत्नी की तहरीर पर कोतवाली थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। प्रकरण की जांच की जा रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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