सांस की बीमारी भी नहीं रोक पाई शिवभक्ति, ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले बुजुर्ग
कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों की आस्था के अनोखे रंग देखने को मिल हैं। कोई बैसाखी के सहारे चला, कोई हाथ-पैर से लाचार होकर भी आगे बढ़ा। इन्हीं में शामिल एक बुजुर्ग शख्स ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे कांवड़ यात्रा निकाली।

मुजफ्फरनगर, नीरज कुमार शर्मा
UP News: कांवड़ यात्रा में इस बार शिवभक्तों की अटूट आस्था के अनोखे रंग देखने को मिले। कोई बैसाखी के सहारे चला, कोई हाथ-पैर से लाचार होकर भी आगे बढ़ा, तो कोई आंखों पर पट्टी बांधकर। इन्हीं में शामिल मुजफ्फरनगर के मूल निवासी 80 साल साल के परशुराम शर्मा की भक्ति पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
कांवड़ यात्रा में शिव के प्रति सच्ची भक्ति के आगे उम्र और बीमारी जैसी रुकावटें भी बौनी साबित हो जाती हैं। उत्तराखंड के ज्वालापुर निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग भक्त परशुराम शर्मा जो जनपद मुजफ्फरनगर के गांव नरा के मूल निवासी हैं, की यात्रा पूरे क्षेत्र में प्रेरणा और कौतुहल का विषय बनी हुई है। सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रहे परशुराम शर्मा को डॉक्टरों ने घर पर ही रहने और बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी थी। इसके बावजूद शिव के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ।
बुजुर्ग अपनी स्कूटी पर ऑक्सीजन के दो सिलेंडर बांधकर ज्वालापुर से मुजफ्फरनगर के शिव चौक तक करीब 93 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे। मुजफ्फरनगर जनपद के नरा गांव के मूल निवासी परशुराम अब तक 13 बार कांवड़ ला चुके हैं। इस 14वीं यात्रा में उन्होंने शिव चौक पहुंचकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया और अपनी मन्नत पूरी की।
कांवड़ यात्रा में आस्था के कई अन्य रूप
दिव्यांग और बुजुर्ग भक्त: कांवड यात्रा में बहुत से शिव भक्त दिव्यांग भी इस बार कांवड़ लेकर पहुंचे। इनमें किसी के दोनो पैर नहीं है, तो कोई चलने को मोहताज है किसी के हाथ व पैर सही है। कोई सड़क पर घिसर कर आ रहा है, तो कोई अपने परिजनों के साथ।
कई श्रद्धालु इस बार कांवड़ यात्रा में ऐसे भी मिले जो पालकी में छोटे बच्चों को बैठाकर जल लाते नजर आए। इनमें कोई बेटी की खुशी के लिए पालकी में लेकर आया, तो कोई बेटी को बेटे से अधिक मानते हुए लाया।
मासूमों का उत्साह
इस साल सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चों ने भी बड़े उत्साह के साथ कांवड़ उठाई। बहुत से बच्चे अपने माता-पिता या परिजनों के साथ कांवड लेकर आए, तो एक बच्चों की टोली तो ऐसी भी रही, जो अपने माता-पिता को बिना बताए घर से हरिद्वार पहुंचे और वहां जाकर परिजनों को बताया, वह भी कांवड़ लेकर आए।
ड्राइवर छोरी ने भी उठाई कांवड़
सोशल मीडिया पर ‘ड्राइवर छोरी’ के नाम से मशहूर 23 साल की नीशू भी अपने भाइयों के साथ 21 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई है। नीशू ने यह कांवड़ अपने माता-पिता के उत्तम स्वास्थ्य और युवाओं को नशे की गर्त से दूर रखने की कामना के साथ उठाई है। हरियाणा के जींद जिले के गांव हाड़वा की रहने वाली नीशू पेशेवर रूप से लोडर चलाती हैं। अपनी इसी मेहनत और अनोखे अंदाज के कारण फेसबुक पर ड्राइवर छोरी के नाम से उनके 47 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। नीशू इस कठिन यात्रा में अकेली नहीं हैं, उनके साथ उनके भाई मंदीप, अजय भी हैं।


