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24 सितम्बर, 2020|11:44|IST

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वैदिक संस्कृति की अलख जगा रहीं वेदिका वैदिक संस्कृति की अलख जगा रही वेदिका

वैदिक संस्कृति की अलख जगा रहीं वेदिका
वैदिक संस्कृति की अलख जगा रही वेदिका

जिले की होनहार बेटी ने वैदिक सभ्यता एवं संस्कृति को घर-घर पहुंचाने की शपथ उठाई है। वह आस पास ही नहीं बल्कि दूर दराज जाकर आर्य समाज पद्धति से यज्ञ कराती है। यजमान के घर जाने से पहले वह सौगंध लेती है कि दक्षिणा लेने के लिए मजबूर नहीं करेगा।

हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव खरखौदा निवासी सुरेंद्र सिंह भाटी की 13 वर्षीय बेटी वेदिका रत्नम गांव-गांव जाकर यज्ञ कराती है। आर्य समाज पद्धति से यज्ञ कराने के बदले दक्षिणा के रूप में कुछ नहीं लेती। इतना ही नहीं यज्ञ कराने से पहले यज्ञमान से यह सौगंध लेती है कि दक्षिणा के लिए मजबूर नहीं करेगा। वेदिका यज्ञ में आहुति प्रदान कराते समय कहती है कि नारी भारतीय संस्कृति व सभ्यता की वाहक रही है। पुरुषों को समय नहीं मिलता। वह तमाम कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इसलिए महिलाएं रोजाना यज्ञ कर वैदिक संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने का काम कर सकती हैं। यज्ञ के लिए हवन कुंड और ज्यादा इंतजाम न हो तो एक अंगारी लें। गायत्री मंत्र बोलते हुए उस पर घी व सामग्री की आहुति छोड़ें। यज्ञ जरूर करें। मां ही संतान को संस्कार बना सकती हैं। बेटियों से यज्ञ कराने पर खास ध्यान रहता है। वेदिका का कहना है बेटी तीन घरों को रोशन करती है। कहती जिस घर में यज्ञ होता है, उसमें सुख समृद्धि आती है। यज्ञ के लिए उसे पिता सुरेंद्र सिंह का भरपूर समर्थन मिलता है। वही उसे बाइक से गांव-गांव लेकर जाते हैं। वेदिका रत्नम अब तक सैकड़ों घरों में यज्ञ करा चुकी है।

जन्मदिन 29 जनवरी पर धारण कराएगी जनेऊ

अमरोहा। वेदिका रत्नम सातवीं कक्षा में पढ़ती है। 29 जनवरी को उसका 13वां जन्म दिन है। अपने जन्मदिन पर वह 11 सौ लोगों को जनऊ धारण कराएगी। जिसकी तैयारियां उसने अभी से कर दी है। कार्यक्रम उसके गांव में किया जाएगा। उसके पिता का कहना है हापुड़ जिले में स्थित पूठ गुरुकुल संस्थापक आचार्य धर्मेश्वरानंद व जेबड़ा निवासी मास्टर वीर सिंह से उनको आर्य समाज पद्धति से यज्ञ करने की सीख मिली। जिसे वह बेटी के माध्यम से घर-घर पहुंचा रहे हैं। संसार छोड़ने से 15 दिन पहले ही आचार्य धर्मेश्वरानंद उनके घर आए थे।