मौसम की मार से फसलों को बचाने के लिए किसानों को किया जागरूक
Amroha News - बेमौसम बारिश के कारण जिले में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल को सूखाने, सुरक्षित रखने और भंडारण से पहले नमी को 12% से कम रखने के लिए सावधानियां बरतें। सही उपाय करने पर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

बेमौसम बारिश से जिले में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। गुरुवार को मौसम खुलने पर किसान फसलों को सूखाने में जुट गए हैं। उधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसान अगर इन सावधानियों का पालन करते हैं, तो वे अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने बदलते मौसम और तेज हवाओं के बीच किसानों को गेहूं की कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह बांधकर ढकने की सलाह दी है। भंडारण से पहले अनाज को सुखाना, नमी 12% से कम रखना और गोदाम साफ रखना जरूरी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।बदलते
मौसम और तेज हवाओं के बीच गेहूं किसानों के लिए इस समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि पकी हुई गेहूं की फसल की समय पर कटाई करें और कटाई के बाद फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाएं।विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह बांधकर ढक देना चाहिए, ताकि तेज हवाओं के कारण फसल एक खेत से दूसरे खेत में न उड़ सके और बारिश से नुकसान न हो। खुले में छोड़ी गई फसल खराब मौसम में भारी नुकसान का कारण बन सकती है। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया किअनाज में नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा उसमें फफूंद और कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है।बोरियों को ऐसे करें उपचारितकिसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे भंडारण के लिए उपयोग होने वाले गोदामों को अच्छी तरह साफ करें। पुराने अनाज, धूल और कचरे को हटाकर दीवारों की दरारों और छेदों की मरम्मत करें, ताकि कीटों का प्रकोप न हो। भंडारण के दौरान बोरियों का उपचार भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बोरियों को 5% नीम के घोल से उपचारित कर धूप में सुखाना चाहिए, जिससे कीटों के अंडे और रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।कटी फसल और अनाज को ऐसे रखें सुरक्षितकटी हुई फसल और अनाज को हमेशा सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें। थोड़ी सी लापरवाही भी पूरे उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसान अगर इन सावधानियों का पालन करते हैं, तो वे अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं।
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