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अमरोहा में सेटेलाइट से होगी धान के खेतों की निगरानी

अमरोहा में सेटेलाइट से होगी धान के खेतों की निगरानी

संक्षेप:

Amroha News - वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए धान की पराली जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। एनजीटी के नियमों का पालन करते हुए किसानों पर जुर्माना और एफआईआर की कार्रवाई होगी। सैटेलाइट के जरिए निगरानी की जाएगी और...

Aug 24, 2025 10:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अमरोहा
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वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए धान की पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस बार कड़ाई से एनजीटी के नियमों का पालन कराया जाएगा। पराली जलाने पर किसानों पर जुर्माने की कार्रवाई के साथ ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सेटेलाइट के जरिए धान के खेतों की निगरानी होगी। जिला और तहसील स्तर पर उड़नदस्ता टीम गठित की जा रही हैं। पराली को गोशालाओं में भेजा जाएगा। किसान पराली व फसल अवशेष जलाने के बजाए इन्हें सड़ाकर जैविक खाद बनाकर खेती में ही प्रयोग करें। इससे पर्यावरण व जमीन का स्वास्थ्य दोनों ही अच्छे रहेंगे। अमरोहा जिले में 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल उगाई गई है।

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एक माह बाद धान की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य शुरू होगा। बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते धान की पराली जलाने पर रोक लगी है। एनजीटी के नियमों का जिले में कड़ाई से पालन कराया जाएगा। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए शासन व कृषि विभाग अलर्ट है। पराली जलाने वालों पर निगाह रखने के लिए सैटेलाइट की मदद ली जाएगी। इसमें लगे सेंसर अग्नि जनित स्थल की रोड मैपिंग कर मैसेज के जरिये संबंधित क्षेत्र के सचल दस्तों को संदेश भेजते हैं। इसके बाद दिए गए अक्षांश व देशांतर पर जाकर जांच के बाद उत्तरदायी किसानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। जिला स्तर पर एडीएम और तहसील स्तर पर एसडीएम की निगरानी में उड़नदस्ता टीम गठित की जाएंगी। उड़नदस्ता टीम में पुलिस, राजस्व गन्ना विभाग, पंचायत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी शामिल रहेंगे । पहली बार पराली जलाने पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा जबकि दूसरी बार 15 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। कृषि विभाग के रिकार्ड मुताबिक बीते साल धान की पराली व गन्ना फसल अवशेष जलाने के मामले में छह किसानों से जुर्माना वसूला गया था। इस बार पराली को सरकारी खर्च पर गोशाला भेजा जाएगा। ढुलाई पर आने वाला खर्चा मनरेगा से वहन किया जाएगा। बताया कि धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार कड़े कदम उठाए गए हैं। किसान पराली व फसल अवशेष जलाने के बजाए इन्हें सड़ाकर जैविक खाद बनाकर खेती में ही प्रयोग करें। इससे पर्यावरण व जमीन का स्वास्थ्य दोनों ही अच्छे रहेंगे। संसाधनों का प्रयोग कर पराली, फसल अवशेषों का खाद बनाएं। इससे खेती व पर्यावरण दोनों से सेहत सही रहेगी। साथ ही जनपद, राज्य व देश को प्रदूषण मुक्त करने में योगदान रहेग। टीमों की निगरानी के साथ सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। - मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी धान की पराली एवं फसल अवशेषों को जलाने के बजाये, किसान इसे सड़ाकर खाद बनाएं। जिससे भूमि में जीवांश कार्बन में वृद्धि होगी और सूक्ष्म जीव सुरक्षित रह सकेंगें। धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार कड़े कदम उठाए गए हैं। पराली जलाने वालों पर निगाह रखने के लिए सैटेलाइट की मदद ली जाएगी। - राम प्रवेश, उप कृषि निदेशक