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होनहार नौशीन का नतीजा देख आंसुओं से नम हुई माता-पिता की आंखें

सीबीएसई बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा की टॉपर्स लिस्ट में छठा स्थान पाने वाली होनहार बिटिया नौशीन फातिमा खुद अपनी कामयाबी को नहीं देख सकी। 29 अप्रैल को...

होनहार नौशीन का नतीजा देख आंसुओं से नम हुई माता-पिता की आंखें
हिन्दुस्तान टीम,अमरोहाTue, 14 May 2024 06:30 PM
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सीबीएसई बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा की टॉपर्स लिस्ट में छठा स्थान पाने वाली होनहार बिटिया नौशीन फातिमा खुद अपनी कामयाबी को नहीं देख सकी। 29 अप्रैल को बुखार की चपेट में आई नौशीन की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वहीं बेटी का परीक्षा परिणाम देख माता-पिता की आंखों से आंसु बह निकले। आगे चलकर जज बनने का सपना देखनी वाली मेधावी नौशीन की असमय मौत से भीतर तक टूट चुके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बना है।
सीबीएसई बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा के नतीजों ने जहां मेधावी छात्र-छात्राओं संग उनके अभिभावकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी तो वहीं एक मेधावी छात्रा ऐसी भी रही जो खुद अपनी कामयाबी को नहीं देख सकी। माता-पिता भी टॉपर्स लिस्ट में शामिल अपनी बेटी की कामयाबी का जश्न मानने से दूर उसकी याद में जार-जार रोते नजर आए। उझारी के मोहल्ला कुरैशियान निवासी नौशीन फातिमा पुत्री मशकूर अहमद सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल गजरौला में कक्षा दस की छात्रा थी। बचपन से ही मेधावी और बेहद होनहार नौशीन सेल्फ स्टडी के बूते अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा रही थी। बोर्ड परीक्षा में भी उसने अपना बेहतर प्रदर्शन दिया। वहीं परीक्षा के बाद नौशीन बुखार की चपेट में आ गई। लगातार 15 दिन तक दिल्ली के अलग-अलग नामचीन अस्पतालों में उसका उपचार चला बावजूद इसके वह जिंदगी की जंग हार गई, 29 अप्रैल को उसका निधन हो गया। होनहार बिटिया को खोने के बाद परिजनों पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। i सोमवार को आए परीक्षा के नतीजों ने एक बार फिर नौशीन के माता-पिता की आंखों को नम कर दिया। परीक्षा में 97.60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली नौशीन ने टॉपर्स लिस्ट में छठा स्थान हासिल किया। पेशे से प्रॉपर्टी डीलर नौशीन के पिता मशकूर अहमद व बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका माता निशात परवीन बेटी के नतीजे को देख आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। बोले नौशीन बचपन से ही सेल्फ स्टडी के दम पर ही आगे बढ़ी। जज बनना उसका सपना था लेकिन समय से पहले ही उसके सारे सपने भी छूट गए। होनहार बिटिया के बिछुड़न के दर्द से पूरा परिवार अब गमगीन है। कक्षा सात और नौ में पढ़ने वाली नौशीन की दोनों छोटी बहनें भी सच्चा मार्गदर्शक खोने से मायूस हैं।

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