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अमरोहाअमरोहा में चार औषधि केंद्रों पर लटके ताले, जानें क्यों

हिन्दुस्तान टीम,अमरोहाPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 12:10 PM
अमरोहा में चार औषधि केंद्रों पर लटके ताले, जानें क्यों

अमरोहा। संवाददाता

कोरोना काल में दवाओं की आपूर्ति न मिलने से जन औषधि केंद्र बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं। जिले में कुल 35 में से चार जन औषधि केंद्रों पर ताले लटक गए हैं। दवाओं की सप्लाई बंद होने से संचालकों के आगे रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।

जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती जेनरिक दवाएं मुहैया कराने की सरकारी योजना वर्षों बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की शुरुआत के साथ लोगों को सस्ती जेनरिक दवाओं से कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद जगी थी। सरकारी योजना के शुरुआत में लड़खड़ाने के बाद लोगों को जन औषधि केंद्रों पर एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जिक, एंटी पायरेटिक व जीवन रक्षक समेत कुल 500 से ज्यादा तरह की सस्ती जेनरिक दवाएं मिलने से लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन सालभर बाद ही जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की सप्लाई बंद होने से लोगों को बाहर से मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ीं। दवाएं मंगाने की बहुत कोशिशों के बाद भी संचालक मरीजों को सस्ती जेनरिक दवाएं मुहैया नहीं करा सके। बदहाली की मार झेलते हुए दो साल बाद ही जन औषधि केंद्र बंदी के कगार पर पहुंच गए। गौरतलब है कि बीते साल कोरोना काल के दौरान जन औषधि केंद्रों पर दवाओं का टोटा होने से ज्यादातर पर ताले लटक गए थे। अब दूसरे साल भी कोरोना काल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में दवाओं का टोटा होने से लोग मंहगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। दवाओं की आपूर्ति न मिलने से जहां जन औषधि केंद्रों की बंदी का आशंका बनी है, वहीं संचालकों के आगे रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।

संचालकों का मानदेय भी लटका

अमरोहा। सरकार की योजना में भरोसा जताते हुए बेरोजगार युवाओं ने जेनरिक दवाओं की खरीद, मेंटिनेंस और दूसरी व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च कर जन औषधि केंद्र शुरू किए थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी संचालक जन औषधि केंद्रों में दवाएं उपलब्ध नहीं करा सके। संचालकों की मानें तो राज्य स्तर पर जेनरिक दवाओं के स्टॉक में कमी आने से जन औषधि केंद्रों को दवाओं की आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। एडवांस भुगतान के बाद भी दवाओं की सप्लाई नहीं मिल रही है। बहरहाल, दवाओं की आपूर्ति न मिलने से जिले में कुल 35 में से चार जन औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं। जो जन औषधि केंद्र चल रहे हैं, उनके संचालकों का महीनों से मानदेय लटका हुआ है।

नहीं मिला मानदेय तो संचालकों ने छोड़ा काम

अमरोहा। जिला अस्पताल परिसर में तीन साल पहले जन औषधि केंद्र की शुरुआत के साथ लोगों को सस्ती जेनरिक दवाओं से कम खर्च में इलाज मिलने से राहत मिली थी। सालभर बाद ही जन औषधि केंद्र पर दवाओं का टोटा होने से मरीजों के परिजनों को बाहर से मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ीं। दो साल बाद जन औषधि केंद्र मरीजों को 500 के सापेक्ष बामुश्किल 50 तरह की दवाएं भी मुहैया नहीं करा सका। दवाओं की सप्लाई बंद होने से संचालकों के आगे रोजी रोटी की समस्या बन गई। दवाओं की सप्लाई न मिलने और संचालकों को एक साल तक मानदेय नहीं मिलने पर जन औषधि केंद्र के दोनों संचालकों ने छह माह पहले इस्तीफा दे दिया। महीनों तक जन औषधि केंद्र पर ताला लटकने के साथ ही लोगों को सस्ते इलाज की उम्मीद खत्म हो गई।

जन औषधि केंद्रों में भी मिल रही हैं कोविड की दवाएं

अमरोहा। औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि जन औषधि केंद्रों में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के शासन से निर्देश मिले हैं। इस संबंध में संचालकों से बात की गई है। मरीजों को कोविड की दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। संचालकों की समस्याओं से शासन को समय-समय पर अवगत भी कराया जा रहा है। उधर, जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र में महीनों तक टाला लटकने के बाद सप्ताहभर पहले ही एक अन्य संचालक ने जन औषधि केंद्र को दोबारा शुरू किया है। संचालक ने बताया कि जन औषधि केंद्र में 200 तरह की जेनरिक दवाओं के साथ ही कोरोना मरीजों के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि जेनरिक दवाएं तो बिक रही हैं, लेकिन मांग न होने से कोरोना की दवाएं नहीं बिक रही हैं।

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