DA Image
29 जनवरी, 2020|1:45|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

इनसे सीखें : दृष्टिहीन महावीर ने लिख दी कामयाबी की इबारत

इनसे सीखें : दृष्टिहीन महावीर ने लिख दी कामयाबी की इबारत

किसान के घर पैदा हुए जन्मजात दृष्टिहीन महावीर ने मेहनत और हौसले के दम पर अपनी कामयाबी की इबारत लिख दी। नगर की एसबीआई शाखा में जूनियर क्लर्क के पद पर तैनाती पाई। शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए उनकी ये कामयाबी बड़ी नजीर बनकर उभरी है।बुलंदशहर जिले के मकनपुर गांव निवासी पेशे से किसान कैलाश सिंह के घर में जब महावीर ने जन्मजात दृष्टिहीन के रूप में जन्म लिया तो हर किसी को दुख हुआ। इसके कुछ साल बाद उनकी पुत्री बिन्नी भी जन्मजात दृष्टिहीन पैदा हुई तो दुख और बढ़ गया। दो जन्मजात दृष्टिहीन के अलावा चार और बच्चों की परवरिश ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी। लेकिन किसान की चिंता उस वक्त काफूर हो गई, जब उन्होंने जन्मजात दृष्टिहीन बच्चों को अपने बाकि बच्चों से अधिक प्रतिभावान पाया। पिता ने दोनों भाई-बहन को स्थानीय स्तर पर दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में दाखिला दिलाकर शिक्षा दिलाई। भाई-बहन शुरू से कक्षावार प्रथम श्रेणी में पास होते रहे। यह देखकर माता-पिता का सीना खुशी से फूल जाता। आगे चलकर महावीर ने प्रथम श्रेणी में एमए, बीएड, यूपीटेट, सीटेट की परीक्षाएं पास कीं। बेरोजगारी के दौर में महावीर ने मोमबत्ती बनाने के कारखाने में भी काम किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मेहनत और हौसले के दम पर कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए। बीते साल जून माह में महावीर ने बैंकिंग की परीक्षा पास की। मुख्य परीक्षा के बाद जूनियर एसोसिएट क्लर्क के पद पर चयन हुआ। इसी सप्ताह बुधवार को महावीर सिंह ने नगर की एसबीआई की मुख्य शाखा में जूनियर क्लर्क के पद पर ज्वाइनिंग ली। अब यहां बैंक शाखा में हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल है। हर कोई उनके अथक अनवरत परिश्रम को सराहता है।

इंसेट :दृष्टिहीन बहन ने भी हांसिल की कामयाबी

अमरोहा। महावीर की बहन बिन्नी भी जन्मजात नेत्रहीन हैं। वह भी शैक्षिक रूप से बेहद होनहार रहीं। फिलहाल वह दिल्ली के लाजपत नगर में एनजीओ द्वारा संचालित दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में बतौर शिक्षिका तैनात हैं। जन्मजात दृष्टिहीन भाई-बहन की इस कामयाबी पर अब हर किसी को नाज है। दोनों भाई-बहन शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए नजीर बने हैं।

हौंसला और हिम्मत हो तो हर मंजिल आसान

अमरोहा। महावीर अपनी कामयाबी के साथ ही अपने परिजनों पर भी गर्व करते हैं। उनका कहना है कि उनके परिजनों ने जन्म के बाद से कभी भी उन्हें परिवार पर बोझ नहीं समझा। हर दम उनकी हौंसलाअफजाई की और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह बताते हैं कि बचपन से ही उनकी शिक्षा और बेहतर परवरिश के लिए परिवारजन बेहद संजीदा रहे। कभी भी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह अधंता के कारण कामयाब नहीं हो सकते। इसके साथ ही अपनी हिम्मत और हौंसले की भी उन्होंने अपनी कामयाबी में अहम वजह बताया।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Learn from them the blind Mahavir wrote the words of success