Amroha News: गंगा का कटान शुरू, ताश के पत्तों की तरह ढहे अंत्येष्टि स्थल के कमरे
Amroha News: गंगा का जलस्तर कम होने के चलते भूमि और फसलों का कटान फिर से शुरू हो गया है। सतेड़ा घाट के अंत्येष्टि स्थल के दोनों कमरे गंगा में समा गए हैं। पिछले 30 गांवों के 250 से अधिक किसानों की 7000 बीघा से अधिक भूमि और फसल बह चुकी हैं। किसान हरे चारे के लिए अन्य क्षेत्रों से सामान लाने को मजबूर हैं।

Amroha News: गंगा का जलस्तर कम होने के संग भूमि व फसलों का कटान फिर से शुरू हो गया है। तहसील क्षेत्र के सतेड़ा घाट पर अंत्येष्टि स्थल के दोनों कमरे भी गुरुवार को दिन में गंगा की धार में समा गए। 28 सेकेंड के भीतर दोनों कमरे ताश के पत्तों की तरह ढहकर गंगा में विलीन हो गए। जानकारी के मुताबिक पिछले करीब एक माह से गंगा तहसील क्षेत्र के सतेड़ा से लेकर गंगानगर तक भूमि व फसलों का कटान कर रही है। अब तक 30 गांवों के 250 से अधिक किसानों की 7000 बीघा से अधिक भूमि व फसल गंगा की धार में बह चुकी है। करीब सप्ताहभर पहले सतेड़ा घाट के अंत्येष्टि स्थल के दोनों चबूतरे व शौचालय तथा किसान के खेत का कुआं भी गंगा में समा गए थे। इससे पूर्व सतेड़ा की मढैया निवासी तीस किसानों की झोपड़ी भी गंगा में बह गई थीं। इसी बीच गंगा का जल स्तर बढ़ने से कटान काम हो गया था। लेकिन पिछले 24 घंटे से गंगा का जलस्तर कम हुआ तो कटान फिर से तेजी के संग शुरू हो गया। गुरुवार दोपहर सतेड़ा के अंत्येष्टि स्थल के नजदीक बने दोनों कमरे भी 28 सेकेंड के भीतर ढहकर गंगा में समा गए। यहां मौजूद ग्रामीणों ने कमरे गिरने का वीडियो भी बनाया। ग्राम प्रधान करन सिंह ने बताया जा रहा है कि सप्ताहभर पहले पानी की धार कटान करते हुए इन कमरों की नींव तक पहुंच गई थी। गुरुवार को दोनों कमरे गंगा में समा गए। रोजगार सेवक प्रीतम सिंह के मुताबिक गंगा ने फिर से कटान शुरू कर दिया है। फसल व भूमि का गंगा तेजी से कटान कर रही है.
दूसरे क्षेत्रों से हरा चारा लाने को मजबूर किसान
हसनपुर। गंगा के टापू पर बसे गांव गंगानगर, सतेड़ा की मढैया, धोरिया की मढैया, सिरसा गुर्जर की मढैया के संग तटबंध किनारे बसे धोरिया, दयावली, चक की मढैया, सिरसा गुर्जर, पिपलौती, सतेड़ा, महमूदाबाद समेतकरीब 30 से अधिक गांवों के किसानों को पशुओं के हरे चारे के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी तटबंध से सटा होने की वजह से भीतर की हजारों हेक्टेयर भूमि व फसलें जलमग्न है। लंबे समय से खेतों में पानी भरा होने से इन खेतों में घास व हरा चारा सूख गया है, जिसके चलते क्षेत्र के किसानों को पशुओं का पेट भरने के लिए कई किमी दूर से हरा चारा लाना पड़ रहा है। किसान दीपक कुमार ने बताया कि कई गांव के लोग गंगानगर पुल से होकर बुलंदशहर जनपद से घास व हरा चारा ला रहे हैं जबकि तमाम किसान सैद नगली व उझारी क्षेत्र के गांवों से धान फसल की पुआल व घास ट्रैक्टर-ट्राली से ला रहे हैं.
जलस्तर में कमी और फसल नुकसान का सर्वे
गंगा का जलस्तर कम हुआ है। लेकिन, गुरुवार को सतेड़ा के अंत्येष्टि स्थल के नजदीक बने कमरे गंगा में समा गए हैं। भूमि व फसलों का कटान फिर से शुरू होने की सूचना है। पानी कम होने पर फसल व भूमि क्षति का सर्वे कराया जाएगा.
हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम


