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अमरोहा में डायरिया का कहर, मरीजों से पटे अस्पताल

हिन्दुस्तान टीम,अमरोहाPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 11:00 AM
अमरोहा में डायरिया का कहर, मरीजों से पटे अस्पताल

अमरोहा। संवाददाता

तेजी से करवट बदलते मौसम में बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। इनमें ग्रामीण व शहरी इलाकों के सबसे ज्यादा डायरिया के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बदलते मौसम में चिकित्सक डायरिया को हल्के में न लेने की सलाह दे रहे हैं।

दिन में तेज धूप और रात के समय तापमान गिरने से मौसम में बदलाव आया है। इस बीच मौसमी व संक्रामक बीमारियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। सुबह होते ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइनें लग रही हैं। रहन-सहन से लेकर खानपान में लापरवाही बरतने से अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे ज्यादा डायरिया के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी जिला अस्पताल व नगर सीएचसी की ओपीडी में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने आए मरीजों की भीड़ रही। जिला अस्पताल व नगर सीएचसी में बुधवार को एक हजार से ज्यादा मरीज देखे गए। इनमें 30 फीसदी से ज्यादा मरीज डायरिया से पीड़ित थे। डायरिया के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। बदलते मौसम में चिकित्सक डायरिया को हल्के में न लेने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सक डा.परवेज आलम अंसारी के मुताबिक वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया कई गुना अधिक सक्रिय हो गए हैं। इससे बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है। डायरिया के दौरान शरीर में पानी की कमी होने से मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए मरीज को बार-बार उलटी-दस्त आने पर शरीर में हुई पानी की कमी को पूरा करना जरूरी है।

जानलेवा हो सकता है सीवियर डायरिया

अमरोहा। डा.परवेज आलम अंसारी ने बताया कि डायरिया पीड़ित मरीज को माइल्ड, मोडरेट और सीवियर तीन तरह से प्रभावित करता है। माइल्ड व मोडरेट डायरिया ओआरएस के घोल व सामान्य दवा से ठीक हो जाता है। लेकिन सीवियर डायरिया के कारण मरीज की जान भी जा सकती है। उल्टी-दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी से मरीज की आंखें अंदर की ओर धंसने लगती हैं। शरीर का रंग पीला पड़ जाता है। मरीज के पेट की खाल सिकुड़ने के साथ बेहोशी छाने लगती है। तुरंत इलाज न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है।

कैसे करें बचाव

घर व आसपास साफ सफाई का ध्यान रखें।

खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।

साफ पानी पीएं, हैंडपंप के पानी को उबालकर व छानकर पिएं।

कटे-फटे फल व सब्जियों का इस्तेमाल न करें।

तले-भुने व चिकनाईयुक्त भोजन से परहेज करें, हल्का व सुपाच्य भोजन करें।

फ्रिज में ज्यादा देर तक रखे भोजन से दूरी बना लें।

ठेलों पर मिलने वाले गन्ने व फलों का जूस और शिकंजी का इस्तेमाल न करें।

ताजा व गर्म भोजन करें।

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