बीमा कंपनी को देना होगा आठ लाख का क्लेम, 25 हजार का जुर्माना
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए आठ लाख रुपये के क्लेम का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज से करने का आदेश दिया। कारोबारी कादिर की पत्नी की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया था। आयोग ने कंपनी को मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना। आठ लाख रुपये के क्लेम का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज से करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। मामला हसनपुर से जुड़ा था। कारोबारी कादिर की पत्नी निशा ने तीन जून 2022 को एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी कराई थी। 15 अगस्त 2022 को अचानक सीने में दर्द के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद नामिनी कादिर ने सभी बीमा कंपनी में क्लेम का दावा किया लेकिन बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2023 को उनका दावा खारिज कर दिया।
तर्क दिया कि पॉलिसी गलत तथ्यों पर ली गई थी और जरूरी जानकारियां छिपाई गई थी। इसके बाद कादिर ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था। आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित द्वारा वाद की सुनवाई की। तारीखों पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी धारक की मौत के करीब डेढ़ माह बाद पॉलिसी को निरस्त किया जो संदेह के घेरे में हैं। कंपनी साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी लेते समय कोई जानकारी छिपाई गई थी। आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को क्लेम राशि का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज से करने का आदेश दिया।
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