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बसपा ने छोड़ा है, अमरोहा नहीं छोडूंगा : दानिश

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली के बसपा से निलंबन ने जिले का सियासी पारा चढ़ा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का नया...

बसपा ने छोड़ा है, अमरोहा नहीं छोडूंगा : दानिश
हिन्दुस्तान टीम,अमरोहाSun, 10 Dec 2023 12:45 AM
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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली के बसपा से निलंबन ने जिले का सियासी पारा चढ़ा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का नया दौर शुरू हुआ है। एक ओर उनके पार्टी के साथ ही अमरोहा छोड़ने की बात होने लगीं तो दूसरी खुद दानिश ने इसे सिरे से खारिज किया है। कहा कि पार्टी से निलंबन के बावजूद हर दम, हर कदम पर वह अमरोहा की जनता के साथ खड़ा रहेंगे और यहीं से अगला चुनाव भी लड़ेंगे। हालांकि आगे के सियासी सफर के सवाल को वह टाल गए।
बीते आम चुनाव में अमरोहा लोकसभा सीट सपा-बसपा-रालोद गंठबंधन के तहत बसपा के खाते में गई थी। यहां पार्टी नेतृत्व ने कुंवर दानिश अली को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। चुनाव से ठीक पहले बसपा का दामन थामने वाले दानिश को तब प्रतिद्वंदियों ने पैराशूट उम्मीदवार करार दिया था। बावजूद इसके अपनी राजनीतिक कौशल और सांगठनिक क्षमता के बूते वह मतदाताओं को साधने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे तब के सांसद कंवर सिंह तंवर को शिकस्त दे दी। बसपा ने शुरुआत में उन्हें संसदीय दल का नेता चुना। इसके बाद से ही मीडिया, सोशल मीडिया पर उनके बयानों को लेकर खूब चर्चा रही। क्षेत्रीय समस्याओं के साथ ही वह राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी खुलकर बोलते रहे। इसी के कारण कई बार आलोचनाओं के शिकार भी बने। भाजपा सांसद के सदन के अंदर उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों के बाद वह फिर सुर्खियों में रहे। पहले राहुल गांधी से मुलाकात और फिर महुआ मोइत्रा के खुले समर्थन के कारण भी दानिश चर्चा में रहे।

उधर, इसी बीच बसपा ने शनिवार को उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए पार्टी से निलंबित कर दिया। जानकारी मिलते ही अमरोहा में पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसद समर्थकों के साथ ही विपक्ष एवं आम जनता में भी तरह-तरह की चर्चा होने लगी। देर शाम तेजी से चर्चा चली कि दानिश बसपा का साथ छूटने के बाद अपने लोकसभा क्षेत्र को भी अलविदा कहने जा रहे हैं। कयास लगाए जाने लगे कि वह किसी अन्य पार्टी से किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि दानिश अली ने हिन्दुस्तान ने बातचीत में कहा कि अफवाहों का बाजार गर्म है, रहने दीजिए। मैं पहले भी अमरोहा की जनता के साथ खड़ा था, आज भी हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा। दावा किया कि अपना अगला चुनाव भी इसी सीट से लड़ेंगे।

पूरे कार्यकाल बेबाक बोल के चलते सुर्खियों में रहे दानिश

अमरोहा। क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सांसद कुंवर दानिश अली हर मुद्दे पर बेबाक राय रखने के लिए पहचाने जाते हैं। बीते दिनों अमरोहा रेलवे स्टेशन परिसर में अमृत भारत स्टेशन योजना के उद्घाटन समारोह के दौरान भी उनके यही बेबाक बोल देशभर की सुर्खियों में रहे थे। तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर भारत माता की जय और वंदे मातरम नहीं बोलने का आरोप लगाया था। मंच पर इसको लेकर उनकी शिक्षक विधायक डा.हरि सिंह ढिल्लो से हुई नोकझोंक के वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। सड़क से संसद तक भाजपा ने उन पर हमलावर रुख अपनाया। माफी मांगने तक की मांग की। हालांकि तब दानिश ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक किया था।

देवगौड़ा के करीबी, विरासत में भी सियासत

अमरोहा। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेहद करीबियों में शुमार दानिश अली की सक्रिय राजनीति में बड़ी दस्तक बीते लोकसभा चुनाव में ही हुई। खुद देवगौड़ा की सिफारिश पर बसपा ने उनका टिकट रातोंरात घोषित किया और फिर उन्होंने जीत भी दर्ज की। हालांकि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि शुरुआत से ही राजनीतिक रही। उनके दादा कुंवर महमूद अली 1957 में डासना से विधायक व साल 1977 में हापुड़ से सांसद निर्वाचित हुए। जनता दल सेक्यूलर से अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले दानिश खुद भी पार्टी में जनरल सेकेट्री रह चुके हैं। पार्टी के भीतर कर्नाटक की राजनीति में भी उनकी हमेशा अहम भूमिका रही। हालांकि गढ़ विधानसभा से एक चुनाव में उनको हार का सामना भी करना पड़ा था।

-मैने अपने निवार्चन के बाद से लगातार पार्टी के नियम, सिद्धांतों का पालन कर जनहित और जनसरोकारों की आवाज को बुलंद किया। केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले भी आवाज बुलंद की थी और आगे भी लगातार करता रहूंगा। अमरोहा की जनता के साथ मेरा साथ हमेशा बना रहेगा, इसको लेकर कोई गलतफहमी न पाली जाए।

कुंवर दानिश अली, सांसद

-कार्रवाई पार्टी शीर्ष नेतृत्व स्तर से की गई है। स्थानीय स्तर पर इससे अधिक कुछ भी कहना उचित नहीं है। पार्टी के भीतर कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी तक के लिए एक समान नियम हैं, जिनका पालन सभी को करना होगा।

सोमपाल सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा

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