
लोन के नाम पर रिश्वत लेते बैंक कर्मचारी दबोचा
संक्षेप: Amroha News - हसनपुर में एंटी करप्शन संगठन ने सहकारी ग्राम विकास बैंक के एक कर्मचारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। किसान की शिकायत पर कार्रवाई की गई थी। आरोपी ने बताया कि वह केवल एक मोहरा था और ऊंचे ओहदेदारों को अधिक पैसा जाता है। पुलिस अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
हसनपुर (अमरोहा), संवाददाता। भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) मुरादाबाद इकाई ने गुरुवार दोपहर सहकारी ग्राम विकास बैंक की हसनपुर शाखा के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। किसान की शिकायत पर की गई इस कार्रवाई से बैंक परिसर में हड़कंप मच गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया गया है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के टीम प्रभारी निरीक्षक नवल मारवाह के अनुसार, गांव मंगरौली निवासी किसान कमल सिंह पुत्र हरप्रसाद ने शिकायत दी थी कि उसने सहकारी ग्राम विकास बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया था।

डेढ़ लाख रुपये मिलने के बाद शेष राशि का चेक रोक लिया गया। आरोप है कि बैंक के एमटीएस व सहायक अनोज कुमार सिंह ने ऋण की शेष राशि जारी करने से पहले कुल धनराशि का दस प्रतिशत, यानी 30 हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। आर्थिक तंगी के कारण किसान ने 20 हजार रुपये देने पर सहमति जताई और पूरी बातचीत का ऑडियो साक्ष्य फोन में रिकॉर्ड कर लिया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने गुरुवार को बैंक के पास जाल बिछाया। जैसे ही किसान ने बैंक कर्मचारी अनोज कुमार को 20 हजार रुपये दिए, टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद हुई। टीम प्रभारी ने बताया कि अनोज कुमार पुत्र स्व. देवी सिंह निवासी जलालपुर घना, थाना अमरोहा देहात के खिलाफ कोतवाली हसनपुर में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर बरेली स्थित भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया जाएगा। मैं तो मोहरा था, बड़े खाते थे पैसा हसनपुर। रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए बैंक कर्मचारी अनोज कुमार सिंह ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह केवल माध्यम भर था। उसने बताया कि पूरी रकम का अधिकांश हिस्सा ऊंचे ओहदे पर बैठे लोग लेते हैं और उसे सिर्फ एक-दो हजार रुपये मिलते हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसकी सेवानिवृत्ति अगले महीने है और गिरफ्तारी से उसकी पेंशन पर खतरा मंडरा गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बैंक शाखा में लंबे समय से यह रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था। किसानों से ऋण स्वीकृति के नाम पर सुविधा शुल्क वसूला जाता था और जो पैसा देने से इंकार करते, उनका चेक रोक लिया जाता। बुधवार को ही एंटी करप्शन टीम के एक सिपाही ने सिविल ड्रेस में किसानों से पूछताछ की थी, जिसमें इस बात की पुष्टि हुई थी। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रेमपाल सिंह ने बताया कि विवेचना में अन्य संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके नाम आगे की रिपोर्ट में जोड़े जा सकते हैं।

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