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20 जनवरी, 2021|1:29|IST

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अजब : मोर्चरी वाहन को बना दिया डिलीवरी वैन, शव लेकर भटकते रहे परिजन

अजब : मोर्चरी वाहन को बना दिया डिलीवरी वैन, शव लेकर भटकते रहे परिजन

1 / 2जनपद के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की संवेदनहीनता का अजब नजारा आए दिन सामने आता रहता है। अफसरों ने शव वाहन को डिलीवरी वैन में तब्दील कर दिया गया है।...

अजब : मोर्चरी वाहन को बना दिया डिलीवरी वैन, शव लेकर भटकते रहे परिजन

2 / 2जनपद के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की संवेदनहीनता का अजब नजारा आए दिन सामने आता रहता है। अफसरों ने शव वाहन को डिलीवरी वैन में तब्दील कर दिया गया है।...

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अमरोहा। मनोज कुमार

जनपद के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की संवेदनहीनता का अजब नजारा आए दिन सामने आता रहता है। अफसरों ने शव वाहन को डिलीवरी वैन में तब्दील कर दिया गया है। विभागीय स्तर पर एक शव वाहन को विभागीय सामग्री को ढोने में लगा दिया गया है, जबकि दूसरे का इस्तेमाल कोरोना जांच के सैंपलों को लैब तक ले जाने में किया जा रहा है। आंकड़े भी महकमे की लापरवाही की स्वयं तस्दीक कर रहे हैं। बीते पूरे साल में मोर्चरी पर आए 316 में से केवल 44 शवों के परिजनों को सरकारी शव वाहन नसीब हो सका। ऐसे में मृतकों के परिजन शव लेकर भटकते हैं और निराश होकर कोई ठेले पर और कोई रिक्शे से अपनों का शव घर तक ले जाता है। अफसर वाहनों की खराबी का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

जनपद में पोस्टमार्टम हाउस पर लाए गए शव और सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान जान गंवाने वाले मृतकों के शवों को घर तक पहुंचाने के लिए जिले के स्वास्थ्य विभाग को दो शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरतमंदों को शव वाहन की नि:शुल्क सुविधा का लाभ दिलाने के लिए शासन की गाइडलाइन के मुताबिक एक शव वाहन पोस्टमार्टम हाउस पर जबकि दूसरे को जिला अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए। इसके उलट स्वास्थ्य विभाग क अफसरों की नाक के नीचे एक शव वाहन का इस्तेमाल कोरोना की जांच के सैंपलों को लैब तक पहुंचाने किया जा रहा है, जबकि दूसरा वाहन सीएमएसडी से दवाएं और लॉजिस्टिक को जिले की सीएचसी और पीएचसी तक ढो रहा है। ऐसे में लोग अपनों का शव रिक्शों और ठेलों पर ढोने को मजबूर हो रहे हैं।

इंसेट :

मजबूर परिजनों से मनमाना किराया वसूल रहे निजी एंबुलेंस चालक

अमरोहा। निजी एंबुलेंसों के चालक सरकारी अस्पतालों से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक आर्थिक शोषण कर रहे हैं। शवों को घरों तक पहुंचाने की एवज में मनमानी रकम वसूली जा रही है। हालत यह है कि जिला अस्पताल परिसर समेत पोस्टमार्टम हाउस पर रोजाना एक साथ कई निजी एंबुलेंस खड़ी देखी जा सकती हैं।

सवा लाख रुपये खर्च के बाद भी जंक खा रहा शव वाहन

अमरोहा। विभाग का शव वाहन छह माह पहले लखनऊ को कोरोना जांच को सैंपल ले जाते वक्त बरेली में खराब हो गया था। शव वाहन को ठीक कराने में एक लाख 30 हजार रुपये खर्च किए गए। वाहन से शव पहुंचाने के बजाय इसे फिर से कोरोना सैंपल ढोने के काम पर लगा दिया गया। महीनेभर पहले दोबारा खराब होने के पर अब शव वाहन जिला अस्पताल में खड़ा जंक खा रहा है। वाहन को ठीक कराने के बजाय महकमे के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

ये है शव वाहन की उपलब्धता की प्रकिया

अमरोहा। शव वाहन की उपलब्धता की प्रकिया बेहद सरल है। सीएमओ या सीएमएस को उनके सीयूजी नंबर पर फोन करते हुए कोई भी जरूरतमंद शव वाहन की उपलब्धता की मांग कर सकता है। बावजूद इसके मांग पूरी नहीं होने पर शिकायत दोनों ही जिम्मेदार अधिकारियों एवं जिला प्रशासन या फिर आला स्वास्थ्य अफसरों के स्तर तक की जा सकती है।

कोट :

शव वाहन की सुविधा पोस्टमार्टम हाउस पर मुहैया कराई जाएगी। खराब शव वाहन को जल्द ठीक कराया जाएगा।

डा.सौभाग्य प्रकाश, सीएमओ

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  • Web Title:Astonishing Delivery van made to Morchari vehicle relatives wandering with dead bodies