एनएफएचएस-5 के सर्वे में जिले की 50 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी
Amroha News - अमरोहा में पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान हीमोग्लोबिन का स्तर कम है, जिससे हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। गर्भावस्था के दौरान केवल 17 फीसदी महिलाएं आयरन और फॉलिक एसिड की टेबलेट ले रही हैं।

अमरोहा, संवाददाता। पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में जिले की 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने आ रहीं गर्भवती महिलाओं की जांच में हीमोग्लोबिन का स्तर औसत से भी कम सात से नौ ग्राम प्रति डेसीलीटर है। गर्भवतियों के टीकाकरण और प्रसव पूर्व देखभाल की तमाम कवायद के बाद भी इनमें खून की कमी बनी हुई है। कम उम्र में शादी, खानपान की कमी से एनीमिया, प्रसव पूर्व देखभाल की कमी और घरेलू प्रसव जैसी वजहों से जिले में 50 फीसदी तक गर्भवती महिलाओं में खून की कमी सामने आई है। इनमें सात ग्राम प्रति डेसीलीटर हीमोग्लोबिन के स्तर वाली दस फीसदी तक गर्भवती महिलाएं प्रसव के दौरान हाई रिस्क श्रेणी में हैं।
प्रसव पूर्व ब्लड, यूरिन, हीमोग्लोबिन, वजन, अल्ट्रासाउंड, ब्लड प्रेशर समेत दूसरी जांचों के लिए जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व शहरी पीएचसी पर हर महीने की पहली, नौ, 16 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस की कवायद के बाद भी नतीजा सिफर है। गर्भवती महिलाओं को आयरन व कैल्शियम की गोलियों के अलावा नियमित टीकाकरण और प्रसव पूर्व देखभाल पर विभाग फोकस किया कर रहा है। इसके बाद भी हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में सामने आया है कि पांच साल से भी कम अंतर पर करीब 3.3 फीसदी महिलाएं तीसरा या चौथा प्रसव करा चुकी होती हैं। वहीं 1.4 फीसदी मामलों में घरेलू प्रसव भी प्रसूताओं की जान ले रहा है। इसके अलावा कम उम्र में शादी, असुरक्षित प्रसव, पौष्टिक आहार न मिलना भी उच्च जोखिम की वजह बन रहा है। गर्भावस्था के दौरान सिर्फ 17 फीसदी महिलाएं ही आयरन और फोलिक एसिड की टेबलेट ले रही हैं। 180 दिन तक आयरन व फॉलिक एसिड टेबलेट लेने वाली महिलाओं की संख्या जिले में सिर्फ तीन फीसदी है। सरकारी अस्पतालों में एक अप्रैल 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक कुल 10728 संस्थागत प्रसव किए गए। इसके बाद एक अप्रैल 2025 से 20 दिसंबर 2025 तक कुल 11018 प्रसव हुए। यानी चालू वित्ती वर्ष के दौरान बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले 290 ज्यादा प्रसव किए गए। इनमें एनीमिक गर्भवतियों का प्रतिशत करीब 50 है। सर्वे की रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के साथ उन्हें सभी सीएचसी-पीएचसी व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर आयरन व फोलिक एसिड की टैबलेट वितरित की जा रही हैं। एएनएम व आशा कार्यकत्रियों को गर्भवतियों की प्रसव पूर्व देखभाल में लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई है। गर्भवतियों के परिजनों को भी उनके खानपान पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। डॉ.योगेंद्र सिंह, कार्यवाहक सीएमओ
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