प्रोटोकॉल के फेर में फंसी एम्बुलेंस, इलाज के अभाव में बुजुर्ग ने दम तोड़ा
गोरखपुर में एक बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ा था। एम्बुलेंस उन्हें लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ती रही। इस कवायद में करीब दो से ढाई घंटे लग गए। इस दौरान एम्बुलेंस में ही बुजुर्ग की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक अस्पताल भेजने के संबंध में प्रोटोकॉल के चक्कर में एम्बुलेंस घंटों भटकती रही।

UP News: यूपी के गोरखपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां खजनी के बिगही गांव के 75 वर्षीय छेदी वर्मा को दिल का दौरा पड़ा था। एम्बुलेंस उन्हें लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ती रही। इस कवायद में करीब दो से ढाई घंटे लग गए। इस दौरान एम्बुलेंस में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की है कि अस्पताल भेजने के संबंध में प्रोटोकॉल के चक्कर में एम्बुलेंस घंटों भटकती रही। इससे मरीज को समय से इलाज नहीं मिल सका। करीब 40 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ा। सीएचसी जाकर रेफर कराना पड़ा। देरी के कारण मरीज की जान नहीं बच सकी। इस शिकायत का जवाब स्वास्थ्य विभाग को नहीं सूझ रहा है।
वाकया बीते 26 अप्रैल का है। बुजुर्ग के पुत्र आकाश ने बताया कि पिता को सीने में तेज दर्द और सांस फूलने की शिकायत हुई। इस पर फौरन 108 एम्बुलेंस बुलवाई। घर से जिला अस्पताल की दूरी लगभग 17 किलोमीटर थी। वह बड़ा अस्पताल है। वहां हृदयरोग के इलाज की सुविधा है, जबकि पास की सीएचसी हरनही विपरीत दिशा में 12 किलोमीटर दूर है। पिता की हालत देखते हुए उन्होंने एम्बुलेंस चालक से सीधे जिला अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई। इस पर चालक व ईएमटी ने बताया कि प्रोटोकॉल है कि मरीज को नजदीक के सीएचसी ले जाएं। किसी मरीज को गांव से सीधे जिला अस्पताल नहीं ले जा सकते।
प्रक्रिया में लगे दो घंटे
आकाश ने बताया कि एम्बुलेंस पहले हरनही सीएचसी ले गई। वहां पिता को इमरजेंसी में भर्ती कराकर चालक वाहन लेकर चला गया। इसके बाद सीएचसी के डॉक्टर ने जिला अस्पताल के लिए रेफर किया। एक बार फिर से एम्बुलेंस के लिए सूचना दी गई। इस सूचना पर एम्बुलेंस को सीएचसी पर पहुंचने में करीब 35 मिनट लगे। इस दरम्यान पिता की तबीयत और बिगड़ती गई। सीएचसी से जिला अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस में ही उनकी मौत हो गई।
सीएम पोर्टल पर की शिकायत
आकाश ने कहा कि हम बार-बार कह रहे थे कि सीधे जिला अस्पताल ले चलो। 20 से 30 मिनट में जिला अस्पताल पहुंच जाते। पर चालक व ईएमएटी प्रोटोकॉल से बंधे थे। अगर समय पर जिला अस्पताल पहुंचा दिया गया होता तो पिता की जान बच सकती थी। आकाश ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल व जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत पर शासन ने स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। उन्हें अभी तक संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
इस मामले में सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है। घटना दुखद है। इस मामले में एम्बुलेंस संचालन करने वाली सेवा प्रदाता कंपनी से जवाब मांगा गया है। बुधवार को इसमें रिमाइंडर दिया जाएगा। ऐसी घटना दोबारा न हो इसके उपाय किए जाएंगे। सभी ईएमटी व चालकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें इस बात की ट्रेनिंग दी जाएगी कि वह गंभीर मरीजों की पहचान कैसे करें। इसके लिए एम्बुलेंस सेवा प्रदाता से पत्राचार किया जाएगा। जिस मरीज को हायर सेंटर ले जाने की जरूरत हो उसे सीएचसी न ले जाया जाए।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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