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अंबेडकर नगरगन्ने में पायरिला और काला चिकटा रोग होने पर करें उपचार

हिन्दुस्तान टीम,अंबेडकर नगरPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:01 AM
गन्ने में पायरिला और काला चिकटा रोग होने पर करें उपचार

अम्बेडकरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. हरिकृष्ण गुप्त ने बताया कि गन्ने की फसल में लगने वाले कीटों से बचाव के लिए गन्ना आयुक्त की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने किसान भाइयों से कहा है कि गन्ने की फसल में लगने वाले कीटों से बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाएं अन्यथा पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।

जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने गन्ने की फसल में लगने वाले कीड़ों जैसे पायरिला, ग्रास हॉपर, फाल आर्मीवर्म तथा काला चिकटा से सुरक्षा एवं प्रबंधन के लिए विभागीय अधिकारियों और चीनी मिलों के प्रबंधन को एडवाइजरी जारी की है। गन्ना आयुक्त ने गन्ना विभाग से जुड़े अधिकारियों को जनपद के गन्ना क्षेत्रों का निरीक्षण का रोग से बचाव के लिए आवश्यक निर्देश किसानों को देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते हैं कीटों की रोकथाम नहीं की जाती है तो पूरी फसल बर्बाद होने की आशंका रहेगी। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पायरिला का प्रकोप ज्यादा पाया जाए वहां पर तत्काल गन्ना शोध परिषद से संपर्क कर कार्यवाही शुरु कर देनी चाहिए। गन्ना शोध परिषद की संस्कृति के अनुरूप चीनी मिलों द्वारा पावर स्प्रेयर से वृहद स्तर पर सुरक्षात्मक कीटनाशक एमिडाक्लोप्रैड 150 से 200 मिलीलीटर अथवा प्रोफेनोफास 750 मिलीलीटर को 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव बनाएं। काला चिकटा अधिकतर पेड़ी गन्ने में पाया जाता है। इससे प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली हो जाते हैं तथा उन पर कत्थई रंग के धब्बे पाए जाते हैं इस पत्र कनचुक तथा गोफ के मध्य तक पाए जाते हैं। इसके लिए भी दवा का छिड़काव कट नाजिल से करना चाहिए। फाल आर्मी कीट की उपस्थिति परिलक्षित होने पर प्रभावित पौधों को नष्ट करने जमीन की गुड़ाई करने तथा क्षेत्र का गन्ना बीज बुवाई हेतु प्रयोग में ना लाने की सलाह दी गई है। इस कीट के प्रभाव के आरंभिक चरण में नीम के तेल का प्रयोग कर अंडे देने की प्रक्रिया और लावा व पोषण को रोका जा सकता है इस कीट का प्रयोग होने पर क्लोरपैरोफास तथा मोनोक्रोटोफॉस दवा का छिड़काव करना चाहिए।

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