DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  अंबेडकर नगर  ›  इस बार सूतक मान्य नहीं फिर भी सावधानी जरूरी: आचार्य राकेश पांडेय

अंबेडकर नगरइस बार सूतक मान्य नहीं फिर भी सावधानी जरूरी: आचार्य राकेश पांडेय

हिन्दुस्तान टीम,अंबेडकर नगरPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:01 AM
इस बार सूतक मान्य नहीं फिर भी सावधानी जरूरी: आचार्य राकेश पांडेय

जहांगीरगंज। इस साल का पहला चन्द्र ग्रहण 26 मई को लगेगा। चन्द्र ग्रहण बुधवार को वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में दोपहर में करीब सवा तीन बजे से आरम्भ होकर शाम के समय 7.19 बजे समाप्त होगा। देश में चन्द्र ग्रहण इस बार उपछाया चंद्रग्रहण के रूप में दिखेगा इसलिए कोई सूतक मान्य नहीं होगा।।

जहांगीरगंज के खिद्दिरपुर गांव निवासी मॉरीशस में सनातन धर्म की ध्वजा फहरा रहे आचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि चंद्र ग्रहण के शुरू होने से पहले चंद्रमा धरती की उपछाया में प्रवेश करता है, जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश किए बिना ही बाहर निकल आता है तो उसे उपछाया ग्रहण कहते हैं। जब चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है तब पूर्ण चंद्रग्रहण लगता है। आचार्य राकेश पांडेय के अनुसार इस बार चन्द्र ग्रहण पूर्वी एशिया, उत्तरी व दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों सहित और ऑस्ट्रेलिया से यह पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। यह चंद्र ग्रहण जापान, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, बर्मा, सिंगापुर, फिलीपींस, उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका में भी पूर्ण व स्पष्ट दिखाई देगा, लेकिन भारत में उपछाया ग्रहण ही दिखेगा। पूर्ण ग्रहण के समय भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा और इसलिए देश के अधिकतर लोग पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं देख पाएंगे पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में चंद्र ग्रहण का आखिरी नजर आएगा, वह भी पूर्वी आसमान की ओर बहुत करीब जब चंद्रमा निकलने का ही समय हो रहा होगा। आचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि ग्रहण के नौ घण्टे पहले ही सूतक लग जाता है। इस बार ग्रहण के उपछाया रूप में लगने के कारण सूतक मान्य नहीं होगा। जिससे किसी भी तरह के धार्मिक कार्य पर पाबंदी नहीं होती है। फिर भी किसी नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए सावधानी जरूरी है। इसलिए इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। भोजन के ऊपर कुशा एवं तुलसी पत्ती रखनी चाहिए, गर्भवती महिलाओं को धारदार वस्तु जैसे चाकू आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए, पशुओं पर गेरू लगाकर सूतक के प्रभाव से बचा जा सकता है। ग्रहण काल के समय जप और ध्यान करें।

सूतक काल में इनसे बचें: आचार्य राकेश पांडेय के मुताबिक सूतक काल में भोजन, शयन, मैथुन, संगीत, गीत, नृत्य, मनोविनोद, मूर्ति स्पर्श जैसी चीजों का पूरी तरह से परित्याग कर देना चाहिए। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को चाकू, कैंची या किसी भी प्रकार की नुकीली चीजों से बचना चाहिए। यहां तक कि सब्जी भी नहीं काटें तो बेहतर। ऐसी महिलाओं को ग्रहण आरंभ होने के चार घंटे पहले ही सात्विक भोजन कर लेना चाहिए। उन्हें भूलकर भी ग्रहण नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर इसका दुष्प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर हो सकता है। उसके अंगहीन होने का खतरा रहता है। गर्भपात की आशंका भी रहती है। गर्भवती को पेट पर गोबर व तुलसी का लेप लगा लेना चाहिए, जिससे राहु व केतु का कुप्रभाव वहां तक नहीं पहुंचे।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें

वास्तविक ग्रहण के समय किसी भी तरह के शुभ काम करने की मनाही होती है।

चंद्र ग्रहण के वक्त भगवान की मूर्ति नहीं छूनी चाहिए। साथ ही सूतक के चलते मंदिर के कपाट भी बंद रखे जाते हैं।

ग्रहण के दौरान भोजन बनाने और खाने दोनों ही कामों पर रोक होती है। ऐसा करने पर ग्रहों के बदलाव से स्वास्थ पर बुरा असर पड़ सकता है।

ग्रहण के दौरान वाद-विवाद से बचने के लिए भी कहा जाता है। साथ ही बताया जाता है कि पति-पत्नी इस दौरान संयम रखें।

इस दौरान गर्भवती स्त्रिरयों को सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए। ग्रहण का विपरीत असर बच्चे पर हो सकता है, इसलिए हमेशा अपने पास एक नारियल रखें।

संबंधित खबरें