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27 अक्तूबर, 2020|5:23|IST

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पिता की सम्पत्ति नहीं सपना की वरासत कराई पुष्पा

पिता की सम्पत्ति नहीं सपना की वरासत कराई पुष्पा

किसी शायर ने कहा है कि जरूरी नहीं रोशनी चिरागों से ही हो, बेटियां भी घर में उजाला करती हैं। शायर के इस कथन को जिले की एक बेटी चरित्रार्थ कर रही है। ऐसी बेटी है जो माताओं की मां बन रही है। पिता के सपनों को बेटा बन पूरा कर रही। शोषित, वंचित और बेसहारा महिलाओं का सहारा जिले की इस बेटी का नाम पुष्पा पाल है।

जिले के सदर तहसील अकबरपुर की ग्राम सभा बेवाना के मजरे कुटियवा की पुष्पा पाल शोषित, वंचित और बेसहारा लोगों के लिए काम करने वाली युवती है। जो पिता के सपनों को पूरा कर रही है। करीब 10 हजार से अधिक बाल, महिला एवं मानवाधिकार के प्रति लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर चुकी पुष्पा पाल पीड़ितों के दर्द पर मरहम बनने के साथ जन शिक्षण केंद्र कुटियवा की ओर से मदद की हाथ भी बढ़ाती हैं। पिता आरबी पाल की मौत के बाद उनके दायित्व का निर्वहन अपने कंधे पर लेने वाली पुष्पा पाल पिता की कोशिश ने करीब सात साल में अभियान का रूप दे दिया है। पुष्पा की वो मुहिम अब अभियान बन गया है जो पहले चंद लोगों के साथ शुरू हुआ था। ईट भट्ठों, होटलों और अन्य स्थानों पर मेहनत मजदूरी करने वाले बालकों और अशिक्षित महिलाओं को उनका हक दिलाने वाली पुष्पा सभी की दीदी बन गई है।

हुनर के अनुसार कराती हैं रोजगार मुहैया :

करीब पांच दर्जन साथियों और 200 अगुवा लीडरों के जरिए पुष्पा पाल सावित्री बाई फुले नारी संघ का भी गठन किया है। महिला स्वयं सहायता समूह और सावित्री बाई फुले नारी संघ के जरिए छह हजार से अधिक महिलाओं को मनरेगा के साथ उनके हुनर के अनुसार रोजगार अथवा स्व रोजगार मुहैया कराने वाली पुष्पा घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पैरवी करने के गांव-गांव जागरूकता गोष्ठी से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी करती हैं। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत करीब सात हजार महिलाओं और 350 किशोरियों को एनीमिया व अन्य रोगों से बचा चुकी हैं।

पिता की मुहिम का बनाया मिशन :

महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने वाली बेटी पुष्पा अपने पिता के सपनों को पूरा कर रही है। पिता आरबी पाल की 31 अगस्त 2013 की मृत्यु के बाद पुष्पा पाल ने उनकी मुहिम की कमान अपने हाथों ली थी। जन शिक्षण केंद्र के सचिव पद का कमान और पिता के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी पुष्पा पाल ने अपने कंधों पर ली।

मिल चुका है रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार :

पुष्पा पाल अपने बुलंद हौसले से वह सभी कार्य कर रही है जो उसके पिता कर रहे थे। मसलन महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना, बाल मजदूरों को शिक्षा दिलाना, मजदूरों को मेहनताना दिलाना, वंचितों का इलाज कराने, किशोरियों को जागरूक करना, महिला सशक्तिकरण करना और मजदूरों की हक की लड़ाई लड़ने का कार्य कर रही है। इसके लिए पुष्पा पाल को रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार भी मिल चुका है।

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  • Web Title:Pushpa gets the inheritance of Sapna not father 39 s property