
बोले बाराबंकी:समय से नहीं आते कर्मचारी मायूस लौट रहे हैं फरियादी
Ambedkar-nagar News - जिले में जनसुनवाई व्यवस्था लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित की जाती है। लेकिन राजस्व और अन्य विभागों के कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण लोगों को समस्याओं के निस्तारण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीण लंबे सफर के बाद भी खाली हाथ लौटते हैं।
जिले में आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित होने वाली जनसुनवाई व्यवस्था जनता के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आती है। तहसील, ब्लॉक और थानों पर होने वाली यह सुनवाई कई नागरिकों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान कर रही है। लेकिन व्यवस्था में एक बड़ी खामी लोगों को परेशान कर रही है राजस्व व अन्य विभागीय कर्मचारियों की अनुपस्थिति या देर से पहुंचना। जनसुनवाई में जिले के बड़े अफसर व पुलिस प्रशासन तो मौजूद रहते हैं और लोगों की शिकायतें दर्ज कर समाधान कराने का प्रयास करते हैं। लेकिन राजस्व, बिजली, नगर पंचायत, पशुपालन और अन्य विभागों के कर्मचारी समय से मौजूद न हों तो कागजों की जांच और सत्यापन में देरी होती है।
इससे शिकायतों का उसी दिन निस्तारण नहीं हो पाता और फरियादियों को कई-कई बार वापस लौटना पड़ता है। जनसुनवाई में आने वाले ज्यादातर लोग गांवों से लंबा सफर तय कर पहुंचते हैं। कई लोग किराया खर्च करते हैं और मजदूरी का नुकसान झेलते हैं। ऐसे में कर्मचारी न मिलने पर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। एक फरियादी ने बताया कि हम सुबह से आ जाते हैं, अफसर व थाने के कोतवाल व दरोगा तो बैठे हैं लेकिन हमारा फाइल देखने वाला राजस्व कर्मचारी अभी तक नहीं आया। बोले बाराबंकी:समय से नहीं आते कर्मचारी मायूस लौट रहे हैं फरियादी तहसील व थाना परिसर में आम जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए सरकार की ओर से आयोजित जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों को राहत देना है,और लोगों को भी इससे काफी फाइदा मिल रहा है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। तहसील मुख्यालयों व थाने में होने वाली जनसुनवाई के दौरान ग्राम पंचायतों में तैनात लेखपालों की अनुपस्थिति लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। शिकायत लेकर आने वाले लोग बताते हैं कि अफसर व कोतवाल तो मौजूद होते हैं, लेकिन उनकी फाइलों की जांच करने वाले लेखपाल समय पर नहीं पहुंचते या कई बार आते ही नहीं हैं। ऐसे में उनकी शिकायतें दर्ज तो हो जाती हैं, पर समाधान अधर में लटक जाता है। कई फरियादी सुबह-सवेरे दूरस्थ गांवों से बस, बाइक या पैदल चलकर अपना काम धंधा बन्द कर जनसुनवाई में पहुंचते हैं। उम्मीद होती है कि उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन लेखपाल के न होने के कारण उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। एक वृद्ध किसान ने बताया कि कई बार जनसुनवाई में आया हू हर बार कहा जाता है कि लेखपाल आएंगे तो रिपोर्ट बनेगी। अगर रिपोर्ट ही नहीं बनेगी तो हम यहा क्यों आएं,जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों में ज्यादातर मामले निम्न प्रकार के होते है, खतौनी संशोधन, सीमांकन,अवैध कब्जा, मुआवज़ा, भूमि संबंधी विवाद इन सभी मामलों का मुख्य अभिलेख लेखपाल के स्तर पर तैयार होता है, इसलिए बिना लेखपाल के न तो जांच होती है, न रिपोर्ट बनती है और न ही निस्तारण। लोगों की माने तो कई बार अधिकारी भी लेखपालों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताते हैं, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। लोगों की मांग हैं तय समय में उपस्थिति अनिवार्य हो,फरियादियों ने प्रशासन से मांग की हैं कि जनसुनवाई के दिन लेखपालों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए। अनुपस्थित लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई हो शिकायतों का डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए। एक हेल्प डेस्क बने जहां तत्काल रिपोर्ट बन सके। जनता का कहना है कि जनसुनवाई सिर्फ सुनवाई नहीं, बल्कि निस्तारण की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि लेखपाल समय पर उपलब्ध होने लगें तो भूमि संबंधी शिकायतों का तत्काल समाधान हो सकता है और फेरबदल, चक्कर तथा मानसिक परेशानी से जनता को बड़ी राहत मिलेगी। अब उम्मीद प्रशासनिक सख्ती और सुधारात्मक कदमों की है ताकि जनसुनवाई अपने उद्देश्य के अनुरूप जनता को न्याय दिला सके। लोगों ने प्रशासन से यह मांग उठाई है कि जनसुनवाई में हर विभाग के नामित कर्मचारी समय से उपस्थित रहें कर्मचारियों की उपस्थिति का अलग से रजिस्टर में उनकी हाजिरी दर्ज की जाए। तीन बार अनुपस्थित रहने पर संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई हो। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए, ताकि शिकायतों के समाधान का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। जनता का कहना कि जनसुनवाई तभी सार्थक जब समाधान उसी दिन मिले, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जनसुनवाई में ही मौके पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन हो जाए तो लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। तहसील व ब्लॉकों के लगाने पड़ रहे चक्कर, लोग परेशान बाराबंकी। शासन भले ही आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का दावा कर रहा हो, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। जनपद की विभिन्न तहसीलों में प्रमाणपत्र बनवाने आए लोगों को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कहीं पोर्टल पर तकनीकी खराबी है तो कहीं कर्मचारियों की लापरवाही और असंवेदनशीलता पीड़ितों को परेशानी में डाल रही है। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आवेदन तो आसानी से हो जाता है, लेकिन उसके बाद सत्यापन, रिपोर्ट और अनुमोदन की प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं। कई मामलों में आवेदन बिना कारण के निरस्त भी कर दिया जाता है, जिससे छात्रों, बेरोजगारों और योजना लाभार्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा है मौके पर सत्यापन। कई बार लेखपाल गांव तक नहीं जाते और रिपोर्ट तहसील में अटकी रहती है। रिपोर्ट बन भी जाए तो उस पर अनुमोदन के लिए कानूनगो और नायब तहसीलदार की अनदेखी बनी रहती है। आवेदन की प्रक्रिया में कई लोग जन सेवा केंद्रों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन वहां से न तो उन्हें आवेदन की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलती है और न ही किसी त्रुटि को सुधारने का मार्गदर्शन। कई बार सेंटर संचालक भी गलत जानकारी भर देते हैं जिससे आवेदन निरस्त हो जाता है। इनकी भी सुनिए अगर हेल्प डेस्क पर सभी विभाग मौजूद हों, तो बुजुर्गों को लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। आधी समस्याएं उसी दिन दूर हो सकती हैं। -सरिता देवी तहसील व थाना दिवस लोगों की समस्याओं को सुनने के सभी विभागीय कर्मचारी मौजूद रहें तो समस्याओं का समाधान उसी दिन हो सकता है। -सर्वजीत पशुपालन विभाग के कर्मचारी नहीं आते, इसलिए पशु बीमारी और मुआवजा संबंधी शिकायतें लंबित रहती हैं। हर विभाग अपने कर्मचारी को उपस्थित करे। -प्रेम कुमार एक दिन में कई समस्याओं का समाधान हो सकता है, सरकार ने अच्छी व्यवस्था बनाई है, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही से जनता परेशान है। -लतीफ जनसुनवाई में सुरक्षा और अनुशासन की व्यवस्था होनी चाहिए, बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए प्राथमिक सुविधा और अलग लाइन होनी चाहिए। -धर्मराज लेखपाल और कानूनगो अगर समय से मिल जाएं तो खतौनी और जमीन विवाद निपट सकता है और परेशानी नहीं होगी। -ओम प्रकाश बोले जिम्मेदार थाना समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों पर दोनों पक्ष को मौके पर बुलाया जाता है। दोनों पक्षों को सुनकर उनका समाधान किया जाता है। भूमि के विवाद में राजस्व कर्मियों व पुलिस की टीम मौके पर भेज कर सर्वसम्मति से उनकी समस्याओं को निस्तारण किया जाता है। लंबित मामलों के निस्तारण के लिए टीम गठित करके उनका समाधान किया जाता है। -रितेश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) बाराबंकी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




