
बोले अम्बेडकरनगर:पढ़ाई के लिए युवा लगा रहे गुहार डिजिटल लाइब्रेरी की है दरकार
Ambedkar-nagar News - अम्बेडकरनगर जिले के सरकारी इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेजों के पुस्तकालयों की हालत खराब है। छात्रों को पुरानी पुस्तकों के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिले में केवल एक...
जिले के 32 सरकारी इंटर कॉलेज व एक दर्जन डिग्री कॉलेज के पुस्तकालय का हाल बेहाल है। आधुनिकता के इस माहौल में संबंधित पुस्तकालय का संचालन पुरानी पुस्तकों के सहारे किया जा रहा है। इससे संबंधित कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लग रहा है। जिले में मात्र कटरिया याकूबपुर में ही राजकीय पुस्तकालय की स्थापना है, जहां तक पहुंच मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। इसके बाद भी इस पुस्तकालय में प्रतिदिन औसतन 200 युवा पहुंचते हैं। प्रत्येक ब्लॉक या फिर प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर कम से कम एक राजकीय पुस्तकालय की स्थापना की जरूरत है। इतना ही नहीं, कहीं लाइबे्ररियन की तैनाती ही नहीं है।

पेश है हिन्दुस्तान बोले टीम की एक रिपोर्ट... अम्बेडकरनगर। जिले में 32 सरकारी इंटर कॉलेज जबकि लगभग एक दर्जन डिग्री कॉलेज संचालित हैं। इनमें लगभग 18 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा हासिल कर रहे हैं। ज्यादातर कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है। ज्यादातर पुस्तकालयों में दशकों पुरानी पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज के पुस्तकालय से छात्र-छात्राओं को बड़ी मायूसी हाथ लग रही है। कारण यह कि संबंधित लाइब्रेरी में उन्हें मनपसंद पुस्तकें ही आसानी से नहीं मिलती हैं। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि लाइब्रेरी फीस तो ले ली जाती है, लेकिन नई पुस्तकें उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। नतीजा यह है कि उन्हें इसके लिए निजी डिजिटल लाइब्रेरी का सहारा लेना पड़ता है। इसमें उन्हें आर्थिक चपत भी लगती है। जिले में एकमात्र राजकीय पुस्तकालय अकबरपुर के कटरिया याकूबपुर में संचालित है। ऐसे में ग्राीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं की पहुंच संबंधित लाइब्रेरी तक नहीं हो पताी है। लंबे समय से ब्लॉक मुख्यालय या फिर तहसील मुख्यालय पर राजकीय पुस्तकालय की स्थापना किए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजा यह है कि सबसे अधिक समस्या ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा कहते हैं कि सभी सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज की लाइब्रेरी की दशा में सुधार किया जाए। हाइटेक होते माहौल को देखते हुए इन्हें डिजिटल किया जाए। इनका बेहतर तरीके से संचालन हो, इसका भी ध्यान रखा जाए। इसके अलावा प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर कम से कम एक राजकीय पुस्तकालय की स्थापना की जाए। प्रत्येक पुस्तकालय में लाइबे्ररियन की तैनाती की जाए, जिससे युवाओं को इसका बेहतर तरीके से लाभ मिल सके। मील का पत्थर साबित हो रहा राजकीय पुस्तकालय:एक तरफ जहां सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज की लाइब्रेरी से छात्रों को मायूसी हाथ लग रही है, तो वहीं अकबरपुर के कटरिया याकूबपुर में स्थित राजकीय पुस्तकालय युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। आधुनिक पुस्तकों व वाईफाई से लैस इस पुस्तकालय में प्रतिदिन औसतन दो सौ युवा पहुंचते हैं। अकबरपुर के कटरिया याकूबपुर में जब राजकीय पुस्तकालय की स्थापना हुई, तो छात्र-छात्राओं को एक बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ी। इसमें उन्हें मायूसी भी नहीं हुई। सभी प्रकार की प्रतियोगी पुस्तकों की उपलब्धता से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां पहुंचते हैं। वाईफाई से लैस इस पुस्तकालय में लगभग सभी प्रकार की प्रतियोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं। आसानी से छात्र-छात्राओं को यहां पुस्तकें भी उपलब्ध हो जाती हैं। हालांकि इन सबके बीच इस लाइब्रेरी तक पहुंचने में युवाओं को कई प्रकार की मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है। दरअसल संबंधित पुस्तकालय तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। गड्ढों में तब्दील मार्ग के चलते आए दिन दिक्कतें होती रहती है। सबसे अधिक समस्या बारिश होने की दशा में होती है। अकबरपुर की राधिका व रागिनी कहती हैं कि राजकीय पुस्तकालय तक जाने वाला मार्ग बहुत खराब है। बारिश होने पर वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जिम्मेदारों को इस तरफ ठोस कदम उठाना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकालय का सहारा ले रहे युवा:बीते कुछ वर्ष से पुस्तकालय के प्रति युवाओं का रूझान तेजी से बढ़ा है। जिले में संचालित निजी डिजिटल लाइब्रेरी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में युवा पहुंचते हैं। विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवा डिजिटल पुस्तकालय का बढ़ चढ़कर लाभ ले रहे हैं। सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज के पुस्तकालयों में समुचित सुविधा न मिलने से छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लग रहा है। नई पुस्तकों की उम्मीद लगाकर छात्र-छात्राएं संबंधित कॉलेज के लाइब्रेरी में जाते तो हैं, लेकिन उन्हें उस समय मायूसी हाथ लगती है, जब उन्हें पुरानी पुस्तकें थमाई जाती है। कॉलेज की लाइब्रेरी को हाइटेक किए जाने की मांग समय समय पर छात्र करते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। इससे आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ती है। डिजिटल लाइब्रेरी के नाम पर कुछ पुस्तकालय में वाईफाई तो उपलब्ध है, लेकिन वह भी बेहतर तरीके से काम नहीं करता है। ऐसे में मजबूर होकर युवाओं को निजी डिजिटल पुस्तकालय का सहारा लेते हैं। जेईई की तैयारी में लगे जलालपुर के सौरभ व टांडा के इमरान ने कहा कि वे जिस कॉलेज में पढ़ते हैं, वहां की लाइगब्रेरी में पुरानी पुस्तकें उपलब्ध हैं। आधुनिकता के दौर में पुरानी पुस्तकें बेमानी साबित हो रही हैं। युवाओं के हित को देखते हुए जिम्मेदारों को पूरी गंभीरता दिखानी चाहिए। पुरानी पुस्तकों के सहारे संचालित हैं लाइब्रेरी:जिले में ज्यादातर सरकारी इंटर व डिग्री कॉलज के पुस्तकालय महज नाम के लिए ही रह गए हैं। इनमें रखी ज्यादातर पुस्तकें पुरानी हैं। कई पुस्तकें तो ऐसी हैं, जो एक दशक से भी अधिक पुरानी हैं। ऐसे में संबंधित पुस्तकालय जाने वाले छात्र-छात्राओं को मायूसी हाथ लगती है। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा का माहौल उपलब्ध कराने के लिए पुस्तकालय की स्थापना किए जाने पर अधिक जोर है। इसके लिए आए दिन नए नए दिशा निर्देश भी कॉलेज प्रशासन को दिए जाते हैं। हालांकि तमाम निर्देश के बाद भी संबंधित कॉलेज प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ज्यादातर सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज की लाइब्रेरी में पुरानी पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। नई पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजा यह है कि आधुनिक जानकारी हासिल करने के लिए पुस्तकालय पहुंचने वाले छात्रों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। जलालपुर के राहुल व मनोज तथा आलापुर के मनीष व रेहान कहते हैं कि आए दिन नई नई खोज हो रही है। ऐसे में पुस्तकालय में नई पुस्तकें होनी चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं हो रहा है। कुछ पुस्तकें तो ऐसी हैं, जो अधिक पुरानी हैं। अब ऐसी पुस्तकों से क्या लाभ मिलेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। निजी डिजिटल लाइब्रेरी संचालकों की हो रही बल्ले बल्ले: जिले के सरकारी इंटर व डिग्री कॉलेज की लाईब्रेरी की हालत बेहतर न होने व राजकीय पुस्तकालय की संख्या कम होने का पूरा लाभ निजी डिजिटल लाइब्रेरी के संचालक उठा रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के नाम पर छात्रों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। पुस्तकालय के प्रति युवाओं का रूझान देखते हुए जिले में निजी डिजिटल लाइब्रेरी की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में जिले में 50 से अधिक निजी डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं। इन लाइब्रेरी में युवाओं को वाईफाई समेत कई अन्य प्रकार की बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनके नाम पर आने वाले युवाओं से मोटी रकम की भी वसूली की जा रही है। डिजिटल लाइब्रेरी की तरफ तेजी से युवाओं के बढ़ते रूझान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन आठ हजार युवा संबंधित लाइब्रेरी में पहुंचते हैं। अकबरपुर की रेशमा व कालिंदी कहती हैं कि यदि कॉलेज में लाइब्रेरी की बेहतर सुविधा होती, तो उन्हें निजी डिजिटल लाइब्रेरी का सहारा न लेना पड़ता है। जिम्मेदारों को चाहिए कि सभी इंटर व डिग्री कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की जाए। यदि ऐसा नहीं हो सकता, तो कम से कम नई पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। हमारी भी सुनिए-: विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे बच्चे नवीनतम सामग्रियों का अध्ययन कर सकें। दूसरा फायदा यह होगा कि छात्र छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी हेल्प मिलेगा। जिम्मेदारों को सरकारी इंटर कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए प्रयास करना चाहिए। बृजेश कुमार इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेजों में जो लाइब्रेरी है, उसमें पुरानी पुस्तकें ज्यादा रहती है। जबकि होना यह चाहिए कि प्रत्येक वर्ष नवीनतम संस्करणों को भी शामिल किया जाए। जिससे जो भी सामग्री अपडेट हुई हो, उसका लाभ बच्चों को मिल सके। लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है। ऋषभ विद्यालयों में लाइब्रेरी से जुड़ी व्यवस्थाएं बेहतर न होने का फायदा निजी लाइब्रेरी संचालक उठाते हैं। वे बच्चों को सुविधाएं तो देते हैं, लेकिन उसी के अनुसार फीस भी वसूल करते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थी लाइब्रेरी का लाभ नहीं उठा पाता है। इससे खासी परेशानी होती है। विवेक नगर के कटरिया याकूबपुर में एक मात्र राजकीय पुस्तकालय है। जहां व्यवस्थाएं बेहतर रहती हैं। यहां ठीक ठाक संख्या में अभ्यर्थी व छात्र छात्राएं पहुंचकर पढ़ाई करते हैं। जिसका लाभ उन्हें मिल रहा है। हालांकि दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की पहुंच नहीं हो पाती है। चंदन प्रत्येक तहसील क्षेत्र में एक राजकीय डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अपने पढ़ाई को धार दे सकें। जिला मुख्यालय पर एक राजकीय लाइब्रेरी है, जहां तक हर बच्चा की पहुंच नहीं हो पाती है। ऐसे में प्रत्येक तहसील मुख्यालयों पर व्यवस्था होनी चाहिए। अभिषेक नगर के राजकीय लाइब्रेरी तक जाने वाला मार्ग की स्थिति ठीक नहीं है। इससे अभ्यर्थियों व छात्र छात्राओं को आवागमन में खासी दिक्कत होती है। बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। यदि मार्ग का मरम्मत करा दिया जाए तो आवागमन सुगम हो जाएगा। साथ ही हादसे का भी खतरा नहीं रहेगा। रिशु कुमार निजी लाइब्रेरी का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर छात्र छात्राएं नहीं उठा पाते हैं। कारण यह कि उनके पास उतने पैसे नहीं होते हैं। फिर भी निजी लाइब्रेरी में छात्र छात्राओं की संख्या काफी ज्यादा रहती है। क्योंकि उन्हें वह हर तरह की व्यवस्थाएं मिलती है। जिससे उन्हें परेशानी नहीं होती है। अमित पाल इंटर कॉलेजों में लाइब्रेरियन की तैनाती होनी चाहिए। क्योंकि लाइब्रेरियन न होने से खासी परेशानी होती है। पुस्तकों के रख रखाव में भी समस्या आती है। लाइब्रेरियन के होने से काफी आसानी होती है। इसलिए विद्यालयों में लाइब्रेरियन की तैनाती होना अत्यंत जरूरी है। शालिनी आज के दौर में सब कुछ ऑनलाइन हो चुका है। ऐसे में इसकी महत्ता भी खासी बढ़ गई है। लाइब्रेरी में परीक्षा की तैयारी या पढ़ाई करने में खासी सहूलियतें मिलती है। खासकर जो बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में जुटे हैं। उन्हें एक ही स्थान पर बैठे बैठे सभी कंटेंटस उपलब्ध हो जाते हैं। वंदना निजी डिजिटल लाइब्रेरी की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। लेकिन इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी जैसी व्यवस्था अभी उतनी नहीं हो पाई है। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े बहुत सारे अभ्यर्थी या छात्र छात्राएं डिजिटल लाइब्रेरी का रुख ज्यादा करते हैं। सलोनी मौजूदा समय में सब कुछ ऑनलाइन माध्यम होने से शिक्षा की प्रकृति भी बदल गई है। बहुत सारे बच्चे अब किताबों का अध्ययन के साथ ही लाइब्रेरी का भी सहारा ले रहे हैं। क्योंकि जो चीजें उन्हें किताबों से नहीं मिल पाती है, वह उन्हें लाइब्रेरी के जरिए प्राप्त हो जाती है। आराधना राजकीय विद्यालयों में शिक्षा के साथ साथ लाइब्रेरी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि बच्चों को बेहतर सामग्री उपलब्ध होगी तो उन्हें उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। चूंकि आज का दौर डिजिटल का है तो उसी अनुरूप व्यवस्थाएं भी ठीक होनी चाहिए। साध्वी बोले जिम्मेदार: इस बारे में राजकीय पुस्तकालय कटरिया के प्रभारी हरेंद्र यादव का कहना है कि राजकीय पुस्तकालय में सभी प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध हैं। छात्र-छात्राओं को आसानी से उनकी मन पसंद पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाती है। पुस्तकालय वाईफाई से लैस है। छात्रों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसका भी पूरा ख्याल रखा जाता है।

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