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अंबेडकर नगर

बीएचडब्ल्यू विहीन न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र औरंगनगर

हिन्दुस्तान टीम,अंबेडकर नगरPublished By: Newswrap
Thu, 16 Sep 2021 11:31 PM

बीएचडब्ल्यू विहीन न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र औरंगनगर

अम्बेडकरनगर। ग्रामीण अंचल के लोगों के बेहतर स्वास्थ के लिए संचालित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औरंगनगर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बदहाली का आलम इस कदर है कि गत आठ माह से चिकित्सालय महज एक चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है जिसके चलते पीड़ित लोगों को प्राइवेट चिकित्सकों के सहारे महंगा इलाज कराने के लिए विवश होना पड़ा है।

अकबरपुर तहसील क्षेत्र के औरंगनगर में ग्रामीण अंचल के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के दृष्टिगत एक दशक पूर्व से न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किया गया था। डेढ़ दर्जन गांवों जिसमें पहितीपुर, हरिशचंद्रपुर, बरामदपुर जरियारी, खजूरडीह, कुड़िया, खरगपुर, बंदनडीह, पाती, पतोना, मंसापुर, बिरतीयापर, टेकनपुर, आतडीह, बरामदपुर लोहरा एवं रामपट्टी तथा अन्य गांव के लोग यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। कागजी अभिलेखों में यहां पर डॉक्टर नायला आफसीन कार्यरत हैं किंतु वह 13 फरवरी से अवकाश पर चल रही थीं और अब बताया जाता है कि वह दो वर्ष के लिए चाइल्ड केयर लीव पर चली गई हैं। वहीं दूसरे चिकित्सक के रूप में डॉ जीके सेन की भी तैनाती संविदा होम्योपैथ पर है किंतु अधिकांश समय स्वास्थ्य विभाग की आरआरटी व अन्य ड्यूटी पर मॉनिटरिंग करने के लिए लगाया जाता है। फार्मासिस्ट के रूप में डॉ आरएन उपाध्याय, स्टाफ नर्स के रूप में अनुराधा चौधरी, कुमारी शिल्पा गुप्ता एवं वार्डब्वॉय प्रदीप शुक्ला कार्यरत हैं। बीएचडब्ल्यू के रूप में कार्यरत रहीं उर्मिला उपाध्याय का गत 16 मार्च को निधन हो जाने के चलते उनके स्थान पर भी अभी तक किसी की तैनाती अभी तक नहीं हुई है। प्रसव की 24 घंटे सुविधा अब दो महिला कर्मियों के सहारे हो गया है। स्वीपर की व्यवस्था न होने के चलते सफाई व्यवस्था किस तरह हो रही है जिसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। चिकित्सालय में डॉक्टर के न होने पर पीड़ित लोगों को प्राइवेट चिकित्सकों के सहारे अपना इलाज कराने के लिए विवश होना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि यदि यहां डॉक्टर होते तो अप्रशिक्षित झोलाछाप डॉक्टरों को मुंह मांगी रकम देकरके इलाज न कराना पड़ता।

चिकित्सालय के आवास में रहने का फरमान हवा-हवाई

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नजदीकी स्तर पर अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का शासन का फरमान अपनी उपयोगिता नहीं दिखा पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों जिसमें औरंगनगर में तो चिकित्सक की बात तो दूर शायद कोई कर्मचारी रात्रि प्रवास करता होगा जबकि यहां 24 घंटे प्रसव की सुविधा कागजों में चल रही है। तैनाती होने के बाद शायद ही कोई चिकित्सक वहां बने आवासों पर रुकता होगा। चिकित्सकों की तैनाती केवल कागज में होती है। वास्तव में चिकित्सक गांव-देहात के अस्पताल में नियुक्त भले होते हैं मगर वे निवास शहर में करते हैं। नियुक्ति वाले अस्पताल का सरकारी आवास बंद रहता है। इससे ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में प्रतिदिन की ओपीडी में ही तैनात चिकित्सकों की मौजूदगी भी नहीं होती है। मौजूदगी हो भी गई तो उनके आने और जाने का समय ही निश्चित नहीं होता है। रात में कौन कहे दिन में ही चिकित्सक किस्मत वालों को ही मिल पाते हैं और उन्हें इलाज करा पाने का मौका मिल पाता है।

नहीं चलती है पानी की टंकी

लाखों रुपए की लागत से स्वास्थ्य केंद्र परिसर में पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। सरकार की मंशा थी कि यहां पर रहने और पीड़ित को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सकेगा किंतु दशक भर से वह भी अपने दिन बहुरने की बाट जोह रही है। पेयजल की व्यवस्था न होने के चलते मरीजों एवं तीमारदारों को गांव में जाकर गला तर करना पड़ता है।

आवागमन करने वालों को होना पड़ता है कि कीचड़ से सराबोर

मार्ग विहीन स्वास्थ्य केंद्र में इलाज तथा टीकाकरण कराने के लिए आने वाले लोगों को कीचड़ से सरोवर होना पड़ता है। वहीं परिसर में कटीली झाड़ियों के चलते रात्रि में लोगों को जहरीले सांपों का भी सामना करना पड़ता है।

‘बरसात के मौसम के चलते समुचित सफाई व्यवस्था नहीं हो पा रही है। कटीली झाड़ियों की सफाई करने के साथ ही मार्ग को ठीक करने के लिए निर्देश दिया गया है। रिक्त चल रहे पद पर भी शीघ्र ही तैनाती कर दिया जाएगा।

डॉ श्रीकांत शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अम्बेडकरनगर

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