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28 नवंबर, 2020|8:10|IST

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माननीयों ने ट्रैफिक लाइन का बना दिया कामर्शियल ट्रैक

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अम्बेडकरनगर। ब्रिटिश सरकार ने टांडा के वस्त्र उद्योग को शिखर पर पहुंचाने और सुलभ आवागमन के लिए रेल लाइन बिछवाई थी। अकबरपुर-टांडा रेलखंड पर पर यात्री ट्रेन चलवाई थी। ब्रिटिश सरकार के ट्रैफिक रेल लाइन को देश के संसद में जनता से चुनकर पहुंचे माननीयों ने कॉमर्शियल ट्रैक बना दिया है।देश को आजाद हुए 73 से अधिक का समय बीत चुका है। देश में 17वीं लोकसभा का एक साल पहले ही गठन हो चुका है। दो तिहाई के प्रचंड बहुमत की नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र की सरकार चल रही है। सरकार के पास इतनी बहुमत है कि विपक्ष के नेता तक का पद ही रिक्त है। सरकार की इतनी व्यापकता के बावजूद देश में आज भी अंग्रेजों के समय के तमाम कानून यथावत हैं। राजस्व महकमें के अभिलेखों में दर्ज होने शब्द और पुलिस महकमे की जीडी, चार्जशीट तक की शब्दावली तक नहीं बदली गई है। वहीं अंग्रेजों के समय चल रही यात्री ट्रेन को अवश्य बदल दिया गया है। अंग्रेजी सरकार के ट्रैफिक ट्रैक को कामर्शियल ट्रैक में अवश्य बदल दिया गया है। अकबरपुर टांडा रेलखंड पर अंग्रेजों के समय से चलने वाली यात्री ट्रेन को देश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार ने बंद कर दिया है। ट्रेन को उस सरकार ने 10 फरवरी 1993 को पूरी तरह से बंद किया जिसने आज तक अंग्रेजों के बनाए तमाम कानून को यथावत रखा है। माननीयों की इस निर्णय को अकबरपुर टांडा रेलखंड ही नहीं पूरे जिले की उपेक्षा का सबसे बड़ा प्रमाण कहा जा सकता है। अंग्रेजों के समय समय की दो बोगियों की ट्रेन अकबरपुर टांडा के बीच दिन में तीन बार चलती थी। एक एक कर तीनों फेरा बंद किया गया। 1993 से ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बंद है। इसमें संसद में बैठे देश के पांच सैकड़ा सांसदों के साथ स्थानीय लोकसभा के प्रतिनिधि की भी मौन स्वीकृति रही है। माननीयों की उपेक्षा और स्थानीय सांसद की मौन स्वीकृति का कारण है कि 27 साल पहले बंद हुई अकबरपुर टांडा पैसेंजर ट्रेन का संचालन फिर से होने की संभावना ही नहीं नजर नहीं आ रही है। कारण पूर्व के जनप्रतिनिधियों की तरह वर्तमान के जनप्रतिनिधि भी मौन साधे हुए हैं।माननीयों का मौन रहना रेलवे को दे रहा है बल :संसद में बैठने वाले जनप्रतिनिधियों के मौन रहने के कारण ही अकबरपुर टांडा यात्री रेलवे लाइन पूरी तरह से मालगाड़ी रेल लाइन बन कर रह गई है। यह रेल लाइन ठीक उसी तरह की रेल लाइन हो गई है जैसे तमाम बड़ी रेल लाइनों के समानांतर स्पेशल कमर्शियल लाइन होती है। अब अकबरपुर टांडा रेल लाइन पर केवल माल गाड़ी चलती है। माल गाड़ी भी केवल एनटीपीसी के लिए कोयला और सीमेंट फैक्ट्री के लिए क्लिंकर लाने का काम करती है। रेलवे ऐसा केवल माननीयों के मौन रहने के कारण ही कर पा रहा है। माननीय अगर आवाज बुलंद करते तो रेल लाइन पर यात्री ट्रेन भी चल सकती है। माननीयों के मौन रहने के कारण ही रेलवे को बल मिल रहा है और रेल मंत्रालय अकबरपुर टांडा यात्री ट्रेन का संचालन फिर से नहीं कर रहा है।

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  • Web Title:Honorable people made commercial track of traffic line