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27 अक्तूबर, 2020|6:34|IST

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दादी-नानी के नुख्से से सेहत की सुरक्षा होगी

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अम्बेडकरनगर। कोरोना संकटकाल में आमतौर पर लोग पुरानी चिकित्सा व्यवस्था की तरफ बढ़े भी हैं। दादी-नानी के नुक्से से घरों में सर्दी जुखाम बुखार जैसे सामान्य रोगों का लोग इलाज कर रहे हैं। संक्रमण से बचाव के लिए घर में बने देसी काढ़ो का इस्तेमाल कर किया जा रहा है। अब सरकार भी पुरानी चिकित्सा पद्धति को अपनाने की दिशा में कार्य कर रही है। पुरानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की कवायद कर रही है। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही आयुर्वेद को बढ़ावा देने पर जोर दिया था, लेकिन अब सरकार गैर एलोपैथिक पद्धति मसलन आयुर्वेद, होम्योपैथिक, यूनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय आयुष मिशन आयुष मंत्रालय भारत सरकार की ओर से सभी जिलों में जिला आयुष समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी की ओर से सभी जिलाधिकारी को बीते 29 सितम्बर को पत्र भेजा गया है। अपर मुख्य सचिव आयुष विभाग उत्तर प्रदेश शासन, अध्यक्ष कार्यकारी निकाय उत्तर प्रदेश राज्य सोसाइटी लखनऊ के प्रशांत द्विवेदी ने सभी जिलाधिकारी को भेजे पत्र में जिला आयुष जिला समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। गठित समिति उत्तर प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत भी होगी। समिति आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। अपर मुख्य सचिव जल्दजिला आयुष समिति का गठन करने का आदेश दिया है।हर जिले में होगी गठित होगी दो समिति: हर जिले में दो तरह की समिति का गठन होगा। एक समिति शासी निकाय की होगी तो दूसरी समिति कार्यकारी निकाय होगी। शासी निकाय समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी तथा सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी होंगे। समिति के सदस्य क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी, प्राचार्य आयुष महाविद्यालय, परियोजना निदेशक डीआरडीए, जिला परियोजना अधिकारी डीपीओ आईसीडीएस, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, आयुष एसोसिएशन के प्रतिनिधि और एसडीएम होंगे।सीडीओ होंगे कार्यकारी समिति के अघ्यक्ष: दूसरी ओर कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी होंगे। उपाध्यक्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्षेत्रीय अधिकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी और सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी होंगे। जबकि जिला चिकित्सालय के अधीक्षक, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला पंचायत राज अधिकारी, औषधि निरीक्षक, प्राचार्य आयुष महाविद्यालय और प्रभारी आयुष अनुसंधान संस्थान सदस्य होंगें।

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  • Web Title:Health will be safe from grandmother 39 s tips