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25 सितम्बर, 2020|3:52|IST

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यूरिया के दुकानों का चक्कर लगाने पर विवश हो रहे किसान

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अम्बेडकरनगर। फसलों में टापड्रेसिंग करने के लिए किसानों में यूरिया के लिए मची हायतोबा की स्थिति कम होने का नाम नहीं ले रही है। काला बाजारी एवं ओवर रेटिंग को रोकने के लिए जिला प्रशासन की ओर से भले ही सभी 111 न्याय पंचायतों में कर्मचारियों की तैनाती कर दिया गया है किन्तु प्राईवेट दुकानदारों की ओर से अधिक मूल्य वसूल करने पर विराम शतप्रतिशत नहीं लग पा रहा है। कृषि महकमें के दावों पर गौर करें तो यूरिया का भरपूर स्टाक है और जहां से डिमांड आ रही है वहां भेजा भी जा रहा है किन्तु जहां भी यूरिया होने की जानकारी मिलते ही किसानों का मजमा लग जाता है। कटेहरी विकास खंड के साधन सहकारी समिति अन्नावां में उर्वरक होने की खबर मिलते सोमवार को किसानों का तांता लग गया। सुबह से लगी किसानों की लम्बी लाइन दोपहर तक चली किन्तु इसमें भी कई किसानों को मांग के अनुरूप खाद न मिलने से कई किसानों के दूसरे न्याय पंचायत के निवासी होने से उन्हें बगैर उर्वरक लिए घर जाने पर विवश होना पड़ा। यूरिया का बिक्री मूल्य 266.50 रुपए प्रति बोरी के साथ खतौनी की नकल एवं आधार कार्ड को देखकर किसानों में वितरित तो किया गया किन्तु शायद ही किसी को दो बोरी से अधिक दिया गया हो। किसानों की मांग के बावजूद सचिव ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि अभी अधिकतम तो बोरी ही दे सकते हैं दो से चार दिन में पुन: खाद आने पर दिया जा सकेगा। कटेहरी विकास खंड क्षेत्र के चनहा पकड़ी निवासी प्रगृतिशील कृषक राम प्रकाश ने कहा कि यूरिया खाद का संकट लगभग प्रत्येक वर्ष होता है किन्तु कृषि महकमें के जिम्मेदार अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए के चलते इस पर अंकुश नहीं लग पाता है। किसानों की जरूरत के पूर्व यदि कृषि महकमा चेत ले तो इस समस्या का सामना ही न करना पड़े। सारंगपुर निवासी कैलाश विहारी का आरोप है कि समितियों पर उर्वरक यदि किसानों की जोतबही के आधार पर दिया जाए तो इसकी समस्या न आए किन्तु समिति के प्रशासक एवं सचिव एक दूसरे से मिलीभगत करके यूरिया का संकट उत्पन्न कराने में आग में घी डालने का कार्य करते हैं। अकबरपुर विकास खंड के मरूई निवासी राजेश वर्मा ने कहा कि दुकानों पर कहीं-कहीं नोटिस बोर्ड पर उपलब्धता चस्पा होने पर उर्वरक न होने का पता चल जात है कि सरकारी समितियों पर शायद ही यह व्यवस्था कहीं होगी जिससे किसानों को पता चल सके। समितियों के निकटवर्ती बाजारों में उर्वरकों की बिक्री करने वाले समितियों से साठ-गांठ करके यूरिया को ठम्प कर लेते हैं जिससे निर्धारित मूल्य से अधिक यानि 50 से एक सौ रुपए अधिक देकर खाद लेने के लिए किसानो को मजबूर होना पड़ता है। अफजलपुर निवासी कृषक छोटेलाल का आरोप है कि मौजूदा समय में धान की फसल में यूरिया की टापड्रेसिंग करने के साथ अन्य शाकभाजी की फसलों की बुवाई करने में यूरिया की आवश्यकता अधिक होती है जिसका भरपूर फायदा प्राईवेट दुकान उठा रहे हैं। बड़ी बाजारों में विभाग की ओर से दुकानों की चेकिंग करने के साथ कमी पाए जाने पर कार्रवाई कतिपय लोगों के विरुद्ध तो कर दिया जाता है किन्तु छोटी बाजारों में जिम्मेदार अधिकारियों के न पहुंचने पर उनकी बल्ले-बल्ले रहती है। बोरी न देकर वह फुटकार यानि 40 किलोग्राम तक खाद दे देतें हैं किन्तु बोरी मांगने पर न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

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  • Web Title:Farmers are being forced to visit urea shops