DA Image
21 सितम्बर, 2020|6:07|IST

अगली स्टोरी

आस्था ने ली हिलोरें, घर घर में हुई अनंत भगवान की पूजा

default image

अम्बेडकरनगर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चौदस सोमवार को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया गया। अनन्त चतुर्दशी के पर्व महिलाओं ने सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। हालांकि कोरोना संकट के चलते मंदिरों में परम्परागत सामुदायिक आयोजन नहीं हुए। केवल घरों में पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी गई। पहली बार अन्नत चतुर्दशी को कई बाजारों में होने वाला आल्हा गायन और मेलों का आयोजन भी नहीं हुआ। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को प्रसन्न करने और अनंत फल पाने की इच्छा से श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और भगवान श्रीहरि विष्णु के सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ किया। अधिकांश घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा भी हुई। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के चित्र और शालिग्राम भगवान के समाने 14 गांठ वाला धागा रख कर श्रीहरि की पूजा रोली, मौलि, चंदन, अगरबत्ती, धूप, दीप और नैवेद्य से कर घर घर मे ओम अनंताय नम: मंत्र का जाप हुआ। इसके बाद अनंत रक्षासूत्र को पुरुष बाएं हाथ में और महिलाओं ने बाएं हाथ में बांधा। परम्परा के अनुसार घर घर में विशेष पकवान एक अन्न गेहूं का आटे की रोटी और सेंवई पकाया गया। दूध-मेवा और चीनी से बनी सेंवई से भगवान श्रीहरि भोग लगाया गया और उसी से ब्राह्मणों को भोजन करा के भक्तों ने स्वयं सन्ध्या काल में सूर्यास्त के पूर्व प्रसाद ग्रहण कर व्रत का परायण किया। साथ ही सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की मनौती मांगी। घर घर में अनंत चतुदर्शी के महात्म की कथा भी कहा गया और परिवार वालों ने कथा का श्रवण किया। महाभारत की कथा के अनुसार जब कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था और पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा था तब पांडवों को बहुत कष्ट उठाना पड़ा था। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण पांडवों से मिलने वन आए तो युधिष्ठिर ने उनसे पूछा पीड़ा के निवारण का जानना चाहा था। योगिराज भगवान श्रीकृष्ण ने सभी भाई पत्नी समेत युधिष्ठर को भाद्र शुक्ल चतुर्दशी का व्रत रखने और भगवान अनंत भगवान की पूजा करने की सलाह देते हुए बताया कि वह भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। इनके आदि और अंत का पता नहीं है इसीलिए ये अनंत कहलाते हैं। इनके पूजन से आपके सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे। तब युधिष्ठिर ने परिवार सहित यह व्रत किया और उन्हें पुन: हस्तिनापुर का राज-पाट प्राप्त हुआ था। माना जाता है कि तभी से भगवान अन्नत की भाद्र शुक्ल पक्ष को व्रत रखकर पूजा की जाती है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Faith shook worshiped the eternal God in every house