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मंशापुर कुटी के महंत को गाली देने और धमकाने का ऑडियो वायरल

मंशापुर कुटी के महंत को गाली देने और धमकाने का ऑडियो वायरल

संक्षेप:

Ambedkar-nagar News - प्रदेश सरकार साधु-संतों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, लेकिन मंशापुर में महंत सुखराम दास को प्रधान प्रतिनिधि द्वारा अपमानित किए जाने का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य के दौरान महंत को गालियाँ दी गईं, जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने सुरक्षा बल की तैनाती और कार्रवाई की मांग की है।

Sun, 2 Nov 2025 05:05 PMNewswrap हिन्दुस्तान, अंबेडकर नगर
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भीटी, संवाददाता। प्रदेश सरकार एक ओर साधु-संतों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, वहीं जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने संत समाज और श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। जय बाबा डम्बर दास महाराज मंशापुर कुटी के महंत बाबा सुखराम दास को प्रधान प्रतिनिधि की ओर से गाली-गलौज और अपमानित किए जाने का गंभीर आरोप लगा है। मामला मंशापुर बाजार स्थित मंदिर की जमीन से जुड़ा हुआ है, जिस पर कथित रूप से जबरन निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस दौरान महंत सुखराम दास किसी कार्यवश बस्ती गए हुए थे। मौके का फायदा उठाते हुए निर्माण कार्य तेजी से चलाया गया।

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जब महंत के भतीजे ने इस पूरे मामले की जानकारी ग्राम प्रधान मंगला सिंह के पुत्र अविनाश सिंह को दी, तो वह आगबबूला हो गया और उसने महंत को गालियां व धमकी दी। इस बीच, सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरल हो रही है, जिसमें कथित रूप से प्रधान प्रतिनिधि की आवाज सुनाई दे रही है जो महंत को अपशब्द कह रहा है और धमकाने की बात कर रहा है। हालांकि, इस वायरल ऑडियो की हिन्दुस्तान पुष्टि नहीं करता है। घटना के बाद श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। लोगों का कहना है कि साधु-संतों का अपमान योगी सरकार की मर्यादा और हिंदुत्व की भावना पर सीधा प्रहार है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ऐसे अराजक तत्वों और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रदेश में साधु-संतों की गरिमा सुरक्षित रह सके। सुरक्षा बल की तैनाती की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत मंदिर परिसर में सुरक्षा बल की तैनाती करे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके और साधु-संतों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मंदिर की भूमि का नहीं, बल्कि आस्था और संत सम्मान का मुद्दा है और अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है।