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अंबेडकर नगर

यात्री ट्रेन बंद करने वाली कांग्रेस का जिले से साफ हुआ सूपड़ा

हिन्दुस्तान टीम,अंबेडकर नगरPublished By: Newswrap
Thu, 22 Oct 2020 11:50 PM
यात्री ट्रेन बंद करने वाली कांग्रेस का जिले से साफ हुआ सूपड़ा

अम्बेडकरनगर। अकबरपुर टांडा के बीच चलने वाली यात्री ट्रेन को बंद किए जाने पर भले ही जिले की जनता ने कभी हल्ला गुल्ला न किया हो मगर ट्रेन बंद करने वालों को आईना अवश्य दिखाया है। ट्रेन बंद करने वाले दल कांग्रेस को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। इसका प्रमाण ट्रेन बंदी के बाद कभी भी स्थानीय (पहले के अकबरपुर और वर्तमान में अम्बेडकरनगर लोकसभा) संसदीय सीट पर कांग्रेस का चुनाव न जीत पाना है। आजादी के बाद से ही सत्ता के शिखर पर रहने वाली अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 1984 के बाद से कभी भी जिले में खाता नहीं खुला है। जिले की जनता ने भले ही कभी टांडा यात्री ट्रेन को बंद करने का गंभीर होकर मुद्दा ना बनाया हो लेकिन यात्री ट्रेन बंद करने वाली कांग्रेस का फिर से प्रतिनिधि नहीं चुना है। 1984 में अंतिम बार उसके सांसद रामप्यारे सुमन चुने गए थे। 10 फरवरी 1993 को जब अकबरपुर टांडा पैसेंजर ट्रेन का परिचालन बंद किया गया था तब केंद्र में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली सरकार थी। तब से आज तक पूर्व के अकबरपुर सुरक्षित और वर्तमान के अम्बेडकरनगर संसदीय सीट पर कांग्रेस का प्रतिनिधि नहीं चुना गया है। ट्रेन को पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने बंद की थी। इस लोकसभा सीट पर चुनाव की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। तब के अकबरपुर सुरक्षित सीट पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पन्नालाल चुनाव जीते थे। कांग्रेस के ही टिकट पर पन्नालाल 1957 और 1962 में भी सांसद चुन लिए गए। कांग्रेस पार्टी को 1967 व 1971 में भी इस सीट पर कांग्रेस के ही रामजी राम ने जीत दर्ज की थी। 1977 के चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर में जनता पार्टी के टिकट पर मंगलदेव विशारद सांसद चुने गए थे। 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हरा कर जनता पार्टी सेकुलर के टिकट पर रामअवध सांसद चुने गए थे। दो चुनाव बाद वर्ष 1984 में कांग्रेस को फिर कामयाबी मिली और रामपियारे सुमन सांसद चुने गए थे। इसके बाद फिर कांग्रेस को कामयाबी नहीं मिली। दिग्गज भी कांग्रेस को नहीं दिला सके जीत : ट्रेन जब 1993 में बन्द हुई तो केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी और स्थानीय सांसद राम अवध थे। ट्रेन बन्द करने से जिले के लोग इतना नाराज हुए कि 1975 में लगे आपातकाल के बाद 1977 के कांग्रेस विरोधी लहर में मिले मतों के आंकड़े को भी अब तक कांग्रेस नहीं छू सकी। अकबरपुर टांडा यात्री ट्रेन को बंद करने वाली कांग्रेस ने फिर से संसदीय सीट पर भरसक कब्जे का प्रयास किया, मगर जनता ने नकार दिया। इसके लिए कांग्रेस पार्टी ने हर तरह के दांव आजमाए, लेकिन सफलता नहीं मिली। कांग्रेस की इस दुर्गति से उसके दिग्गज भी नहीं उबार सके। कांग्रेस ने कई दिग्गजों मसलन राज्यपाल रह चुके माताप्रसाद पर, प्रदेश अध्यक्ष रहे राजबहादुर पर, बहुचर्चित फूलनदेवी के पति उमेद निषाद तक को मैदान में उतार कर सीट पर फिर से कब्जे का प्रयास किया मगर जनता ने नकार दिया। कद्दावर नेताओं के बूते भी पार्टी यहां जीत दर्ज नहीं कर पाई। वर्ष 2009 में अकबरपुर सीट अम्बेडकरनगर में तब्दील हो गई। सुरक्षित की बजाए यह सीट सामान्य श्रेणी की कर दी गई। इस परिवर्तन का भी कोई लाभ कांग्रेस के लिए सामने नहीं आ सका। ऐसे में करीब चार दशक से पार्टी को सफलता का इंतजार बना हुआ है।अन्य दलों को भी जनता ने दिखाया आईना :ट्रेन बंद करने से नाराज जनता ने फिर से कांग्रेस के प्रतिनिधि को जहां लोकसभा में नहीं भेजा वहीं अन्य दलों को भी आईना दिखाने का काम किया है। अपवाद स्वरूप जीत कर सीट छोड़ देने वाली बसपा मुखिया मायावती ही दोबारा चुनाव जीत सकी हैं। मायावती के अलावा किसी भी दल के प्रत्याशी को मतदाताओं ने दोबारा मौका नहीं दिया है। जनता ने जीत कर संसद में पहुंच कर बंद ट्रेन के बाबत चर्चा तक न करने और ट्रेन के फिर से फिर से परिचालन करने की मांग न करने के प्रतिकार में फिर से किसी को दोबारा अपना प्रतिनिधि नहीं चुना है।कहीं कांग्रेस की ही तरह भाजपा का न हो जाए हाल :अगर जल्द ही ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हुआ तो जिले की खासकर टांडा की जनता भाजपा को भी कांग्रेस की तरह आईना दिखाने का काम करेगी। कांग्रेस की ही तरह भाजपा का भी सूपड़ा साफ कर देगी। कांग्रेस की ही तरह भाजपा भी संसद में फिर से पहुंचने के लिए तरस जाएगी।

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