आपदा से निपटने के लिए बढ़ानी होगी सक्रियता

Feb 28, 2026 05:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अंबेडकर नगर
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Ambedkar-nagar News - अयोध्या में नागरिक सुरक्षा संगठन की स्थापना के 60 साल बाद भी संगठन का विकास अधूरा है। सरकार के निर्देशों के बाद कुछ नागरिक वार्डेन नियुक्त हुए हैं, लेकिन प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी बनी हुई है। आपातकालीन स्थिति में उनकी भूमिका अभी भी स्पष्ट नहीं है। संगठन की गतिविधियाँ शहर तक सीमित हैं।

आपदा से निपटने के लिए बढ़ानी होगी सक्रियता

अयोध्या। स्थापना के छह दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद नागरिक सुरक्षा संगठन अभी आकार नहीं ले पाया है। वर्षो से नेपथ्य में पड़े इस संगठन में कई वर्षों बाद केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जनपद में तैनाती शुरू हुई है, मगर अभी हर वार्ड ने दो-तीन नागरिक वार्डेन भी तैनात नहीं हो पाए हैं। नागरिक सुरक्षा संगठन में सिविल वार्डेन का आंकड़ा 58 तक पहुंचा है मगर इनको अभी कई प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाने हैं। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक के बीच तनाव और ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान उपजे हालत के बाद सिविल वार्डेन को सक्रिय कर दिया गया,लेकिन अभी रफ्तार नहीं पकड़ी है।

पुलिस-प्रशासन से लेकर संबंधित विभागों के साथ औपचारिक समन्वय बैठक ही हो पा रही है। इस मुद्दे को हिंदुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था,जिसके बाद प्रशासन ने थोड़ी तेजी पकड़ी है और 40 नए सिविल वार्डेन नियुक्त हुए हैं,मगर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जिले में अभी संगठन के अपने शैशवावस्था में होने के कारण सुविधाओं और संसाधनों की उपलब्धता पहले चरण में है। संगठन की प्रारंभिक टीम के गठन के बाद इसका विस्तार किया गया है और में कलेक्ट्रट में आपदा रक्षा विभाग कार्यालय के बगल नागरिक सुरक्षा संगठन का कार्यालय शुरू कर दिया गया है। कार्यालय में काम-काज को निपटाने के लिए चार कर्मियों की नियुक्ति हुई है नियुक्त सिविल वार्डेन में कई लोग स्काउट गाइड से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रपति व राज्यपाल पुरस्कार हासिल ऐसे लोग आपदा का प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं। मगर शेष लोगों को अभी प्राथमिक प्रशिक्षण ही मिल पाया है और विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाना है। अभी सिविल वार्डेन को उपकरणों की किट भी नहीं मिल पाई है। आपदा की स्थिति में अपनी भूमिका को निभाने के लिए सिविल वार्डेन को पुलिस-प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों से समन्वय कर अपनी भूमिका का निर्वहन करना है, लेकिन अभी इनकी पुलिस-प्रशासन व विभागों के साथ समसन्वय बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। नियुक्त सिविल वार्डेन को अभी केवल आपरेशन सिंदूर के समय आयोजित मॉक ड्रिलऔर फिर अभी पिछले माह ब्लैक आउट मॉक ड्रिल में के दौरान बुलाया गया। अभी किसी आपदा में नागरिक सुरक्षा संगठन के वार्डेन धरातल पर नहीं उतारा गया। इनकी नियुक्त स्वयंसेवक के रूप में की गई है और किसी मानदेय का भुगतान नहीं किया जाना है। नागरिक सुरक्षा संगठन के कार्यालय का संचालन नियमित नियुक्त तनख्वाह पाने वाले कर्मियों से कराया जा रहा है,जिनका भुगतान सरकार कर रही है। फील्ड ड्यूटी के दौरान जरूरी खर्च की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जानी है। सिविल वार्डेन के रूप में अभी महिलाओ को समुचित स्थान हासिल नहीं पाया है। सरकारी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण नेपथ्य में चले गए नागरिक सुरक्षा संगठन को इधर ऑपरेशन सिंदूर के बीच फिर से संजीवनी मिली है और सरकार के निर्देश पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है,जिसके कारण सिविल वार्डेन की तैनाती हुई और नागरिक सुरक्षा संगठन का प्राथमिक ढांचा खड़ा हुआ। हालांकि अभी सिविल वार्डेन की तादात ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। चीफ वार्डेन,डिप्टी चीफ वार्डेन,दो डिविजनल वार्डेन और एक स्टाफ आफिसर डिविजनल वार्डेन समेत कुल 58 लोगों की बतौर सिविल वार्डेन नियुक्ति हो पाई है। चयनित सिविल वार्डेन को नियुक्ति प्रमाण पत्र वितरित किया गया है। पहले चरण में नियुक्त पदाधिकारियों समेत कुल 18 वार्डेन को नागरिक सुरक्षा संगठन के प्रदेश मुख्यालय के तत्कालीन उपनियंत्रक मनोज वर्मा की ओर से जुलाई माह में प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिसमें आगजनी,बाढ़ और वज्रपात तथा युद्ध की स्थिति में सिविल वार्डेन की भूमिका के विषय में बताया गया था। पिछले माह आपदा रक्षा विभाग के विशेषज्ञ यथार्थ तिवारी की ओर से आपदा में जान-माल की सुरक्षा का गुर सिखाया गया है। प्रशासन के नोडल अधिकारी के साथ भी सिविल वार्डेन की बैठक हुई है और सामाजिक दायित्व के तहत सिविल वार्डेन की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। हालांकि नवनियुक्त 40 वार्डेन अभी आपदा से निपटने की मॉक ड्रिल से ही रूबरू हो पाए हैं। इनको प्रशिक्षण दिए जाने के लिए शिविर का आयोजन किया जाना है,मगर अभी नागरिक सुरक्षा मुख्यालय से प्रशिक्षण शिविर के लिए कोई कार्यकम नहीं मिल पाया है। वहीं प्रशासन अन्य सिविल वार्डेन की नियुक्ति प्रक्रिया में जुटा है। विभागीय जानकारों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति या आपदा के दौरान लोगों की सहायता और सुरक्षा के लिए नागरिक सुरक्षा संगठन का गठन हुआ था और इसके तहत सिविल वार्डेन नियुक्त किये जाने शुरू हुए। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय तक आपदा में जान-माल की सुरक्षा और सुविधाओं व सेवाओं की बहाली का जिम्मा आपदा सुरक्षा संगठन के पास था। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान आपात स्थिति के लिए सिविल वार्डेन के महत्व को स्वीकार किया गया और नागरिक सुरक्षा संगठन पर मंथन शुरू हुआ। जिसके बाद जल, थल और नभ से हमलों के समय जान-माल की सुरक्षा और सुविधाओं व सेवाओं की पुनर्बहाली में मदद के लिए वर्ष 1968 में अलग से नागरिक सुरक्षा अधिनियम बनाया गया और उसी वर्ष मई माह में यह संसद से पास हुआ। जरूरत के मुताबिक वर्ष 2009 में इस अधिनियम में संशोधन हुआ और वर्ष 2010 में लागू इस संशोधन में आपदा प्रबंधन को जोड़ा गया। जिसमें परमाणु,बायोलॉजिकल,केमिकल हथियार से हमला और प्राकृतिक व मानवीय आपदा को समाहित किया गया। प्रदेश में इस संगठन की कमान महानिदेशक स्तर के पुलिस अधिकारी के पास है। शहर तक सिमटा संगठन, तहसील और ब्लाक में नहीं की गई नियुक्ति केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर नागरिक सुरक्षा संगठन के कानून के मुताबिक निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन करवा छह अगस्त को 18 सदस्यीय सिविल वार्डेन समिति का गठन किया गया। जिसमें 40 सेक्टर वार्डेन की नियुक्ति इनकी संख्या 58 हो गई है। देहात क्षेत्र के रहने वाले कुछ लोगों को सिविल वार्डेन के रूप में जगह मिली है लेकिन सिविल वार्डेन का क्रियाकलाप और सक्रियता अभी शहर क्षेत्र में ही सिमटा हुआ है। तहसील और ब्लाक क्षेत्र में न तो नागरिकम सुरक्षा संगठन के वार्डेन की नियुक्ति हो पाई है और न ही संगठन का क्रियाकलाप दिखता है। इस बाबत विभागीय अधिकारी और संगठन के पदाधिकारी बताते हैं कि नागरिक सुरक्षा संगठन मुख्यालय ने अभी केवल शहरी क्षेत्र में सिविल वार्डेन की नियुक्ति का निर्देश दिया है। जानकर बताते हैं कि नगर निगम कुल 350 सिविल वार्डेन की नियुक्ति की जानी है। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि अभी लक्ष्य प्रत्येक वार्ड में दो-तीन वार्डेन की नियुक्ति का है। नियुक्ति प्रक्रिया के पहले चरण में नागरिक सुरक्षा संगठन के तहत चीफ वार्डन के रूप में अतुल कुमार सिंह,डिप्टी चीफ वार्डन के रूप में अनूप मल्होत्रा,डिवीजनल वार्डन चौक के रूप में उत्तम बंसल व विवेकानंद पांडेय,स्टाफ आफिसर के रूप में हर्ष अग्रवाल तथा सेक्टर वार्डन के रूप में अंशिका सिंह,डा.उपेंद्रमणि त्रिपाठी,राजीव अग्रवाल,गोविंद अग्रवाल,आशीष अग्रवाल,सचिन अग्रवाल,अवधेश कुमार अग्रहरी,ललित रंजन भटनागर,रितेश कुमार जायसवाल,अमित कुमार सिंह,अमित कुमार,वृजेंद्र कुमार दुबे एवं आशीष तिवारी को नियुक्त किया गया है। दूसरे चरण की चल रही नियुक्ति प्रक्रिया में अभी तक 40 वार्डेन की तैनाती कर लकी गई है और प्रक्रिया जारी है। आपदा से मोर्चे के लिए मॉक ड्रिल में परखी गई तैयारी आपदा की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों की तैयारी को परखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सिविल डिफेंस,पुलिस,होमगार्ड,एसडीआरएफ,फायर, और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से सिविल लाइन स्थित पोस्ट आफिस तिराहे पर मॉक ड्रिल कराई गई। इस ब्लैक आउट मॉक ड्रिल के तहत तय कार्यक्रम के मुताबिक पुलिस बल के जवानों ने सिविल लाइन स्थित पोस्ट आफिस तिराहे की ओर जाने वाले सभी वाहनों को रोक दिया। आसपास के आवागमन के विभिन्न मार्गों पर लोगों और वाहनों की भीड़ बढ़ने लगी और चेतावनी के लिए अग्निशमन विभाग के जवान की ओर से हस्तचालित मशीन से चेतावनी का सायरन बजाया गया। सायरन की ध्वनि वातावरण में गूंजते ही कंट्रोल रूम की खबर पर विद्युत विभाग की ओर से आपूर्ति बाधित की गई। चारो तरफ अंधेरा छाने और सन्नाटा पसरने के बाद मुताबिक सड़क पर डिवाइडर के दोनों ओर ड्रिल से जुड़े लोग घायल की तरह लेट गए। छेखने-चिल्लाने,गंभीर रूप से घायल होने का दृश्य पैदा किया गया। आपदा की स्थिति देख इसी दौरान सिविल डिफेंस व एसडीआरएफ के जवान सक्रिय होते हैं और अपने हाथों में स्ट्रेचर लेकर दौड़ते हुए आते है। पैरा मेडिकल स्टाफ भी दौड़ते हुए घायलों तक पहुंचता है। तिराहे पर कृत्रिम आग लगा आगजनी का प्रदर्शन किया जाता है और आग के विकराल होते ही अग्निशमन दस्ता मौके पर पहुंच अग्निशमन दस्ते के जवान आग पर काबू पाने की मशक्कत में जुट जाते हैं और आग पर काबू पाकर अपने कौशल का प्रदर्शन करते हैं। इस तरह मॉक ड्रिल का समापन होता है और फिर प्रशासन तथा संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इसकी समीक्षा की जाती है। हालांकि इसके पूर्व आपदा पर नियंत्रण पा लेने की सुचना देने के लिए फिर से सायरन बजाया जाता है और मामले की जानकारी पर विद्तयुत बहाल तथा आवागमन के लिए मार्ग खोल दिया जाता है। नोडल अधिकारी, नागरिक सुरक्षा संगठन एडीएम सिटी योगानन्द पाण्डेय ने बताया कि नागरिक सुरक्षा संगठन को मजबूत और सक्रिय किया जा रहा है। संगठन के संचालन के लिए जरूरी अवस्थापना सुविधाएं कार्यालय, स्टाफ पूरा कर लिया गया है और समन्वय और चयन को आगे बढ़ाया जा रहा है। लोग बोले सरकार ने आपदा से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम किये हैं। मगर आपात स्थिति में सिविल वार्डेन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जो हालात को नियंत्रित करेगा। -अनूप मल्होत्रा पारंपरिक आपदाओं के साथ नई प्रकृति की आपदाएं सामने आने लगी हैं। सिविल वार्डेन उनको बचाव की जानकारी भी प्रदान करेगा और बचाव के प्रयास भी करेगा। -डाॅ. उपेंद्र मणि सक्रियता बढ़ी है। चीफ वार्डेन समेत कुल 18 की टीम गठित हुई थी जो 60 तक पहुंच गई है। दो मॉक ड्रिल हुआ है।-हर्ष अग्रवाल आपदा में सिविल वार्डेन की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया और नागरिक सुरक्षा संगठन का ढाँचा खड़ा हुआ है। अभी यह शुरुआती दौर में है, जिसका काफी विस्तार होना है। -बृजेन्द्र दुबे पीआरडी जवानों को भी आपदा से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया था। भविष्य की जरूरत के लिए इनका तैयार रहना जरूरी है। -दिनेश प्रताप मिश्र, पीआरडी जवान

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