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अंबेडकर नगर

अजादारी, जुलूस असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है

हिन्दुस्तान टीम,अंबेडकर नगरPublished By: Newswrap
Sun, 26 Sep 2021 11:10 PM
अजादारी, जुलूस असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है

सैदापुर। चेहलुम का शोक मुहर्रम के ताजिया दफनाए जाने के चालीसवें दिन मनाया जाता है। अजादारी, मजलिस व मातम असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। चेहलुम हजरत इमाम हुसैन की शहादत का चालीसवां होता है।

चेहलुम का ताजिया जिले सहित ग्रामीण इलाकों में भी सोमवार को देर रात तक या हुसैन-या हुसैन की सदाओं के साथ घर-घर ताजिया रखा जाएगा। मंगलवार को ताजियादारान नम आंखों से अपने-अपने गांव के नजदीक कर्बला में गमगीन माहौल में ताजिये को सुपुर्दे खाक करेंगे। सुप्रसिद्ध उर्दू कवि व स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मुहम्मद अली ने कहा है कि कत्ल-ए-हुसैन अस्ल में मरग-ए-यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। इस्लाम धर्म के लिए हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन अस. की सेवाओं और उनके बलिदानों को स्वीकार करना है।

इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद: इस्लाम धर्म के लिए हजरत इमाम हुसैन अस. का व्यक्तित्व हमेशा से बलिदान का आदर्श रहा है। इमाम हुसैन अस. का युग इस्लामी इतिहास में ऐसा युग था, जिसमें इस्लाम के विरुद्ध ऐसी शक्तियां उठ खड़ी हुई थीं, जो सीधे-साधे मुसलमानों को अपना निशाना बनाती थीं। ऐसे में हजरत इमाम हुसैन अस. ने इस्लाम की खोई हुई गरिमा को वापस लाने और उसे सुदृढ़ करने का भरसक प्रयास किया। यहां तक कि इस पथ पर चलते हुए उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की, बल्कि अपने 72 साथियों सहित कुर्बानी देकर आलमे इंसानियत को बचा लिया।

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