
बोले अम्बेडकरनगर...नाला-नाली की पहले हुई सफाई लापरवाही ने फिर समस्या बढ़ाई
Ambedkar-nagar News - अम्बेडकरनगर में जलनिकासी की समस्या बढ़ती जा रही है। नालियों की सफाई की लापरवाही के कारण कई मोहल्लों में जलभराव हो रहा है। अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मांग की है ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।
बोले अम्बेडकरनगर...नाला-नाली की पहले हुई सफाई लापरवाही ने फिर समस्या बढ़ाई नगर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था होने के बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। जल निकासी की समस्या को दूर करने के लिए बीते दिनों ही बोले अम्बेडकरनगर में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। लेकिन अब तक कोई विशेष कदम नहीं उठाया जा सका है। तमसा नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कहीं भी स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना नहीं की जा सकी है। शिवाजीनगर व राजभर बस्ती समेत आधा दर्जन मोहल्लों में जलभराव समस्या को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
बोले हिन्दुस्तान टीम की एक रिपोर्ट... अम्बेडकरनगर। अकबरपुर अयोध्या मार्ग स्थित राजभर बस्ती हो या फिर शिवाजीनगर कॉलोनी। इन दोनों मोहल्लों में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी है। इसके अलावा शास्त्रीनगर, उसरहा समेत कई अन्य मोहल्लों में भी जलभराव का सामना संबंधित मोहल्ले के लोगों को करना पड़ता है। दरअसल यहां नाले व नालियों की सफाई नियमित तौर पर नहीं होती है, जिससे समस्या होती है। वैसे तो नगर में नाले व नालियों की सफाई के लिए सफाई कर्मियों को लगाया गया है। अलग अलग क्षेत्र में उनकी ड्यूटी भी लगाई गई है, लेकिन मनमानी के चलते परेशानी बढ़ी रहती है। दूसरी तरफ मीरानपुर स्थित राजभर बस्ती की हालत ठीक नहीं रहती। जल निकासी का बेहतर स्रोत न होने के चलते बारिश के दिनों में नगर पालिका प्रशासन मोटर लगाकर पानी को बाहर निकालता है। जनप्रतिनिधियों द्वारा इस समस्या को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन तो देते हैं, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार शिवाजीनगर कॉलोनी में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। राबीबहाउद्दीनपुर में भी जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था न होने से जलभराव होता है। इस समस्या को लगभग चार माह पूर्व बोले अम्बेडकरनगर में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, लेकिन अब तक इसे लेकर कोई विशेष कदम नहीं उठाया जा सका है। सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा कहते हैं कि जलभराव समस्या दूर करने के लिए सिर्फ दावों से काम चलने वाला नहीं है। इसके लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। न सिर्फ नए नाले व नालियों का निर्माण कराया जाए, बल्कि क्षतिग्रस्त नाले व नालियों को दुरुस्त भी कराया जाए। स्कूल व कॉलेजों के आसपास होता है जलभराव, छात्रों को होती है मुश्किल: शहर में स्थित आधा दर्जन से अधिक ऐसे स्कूल व कॉलेज हैं, जिनके आसपास हल्की बारिश होने पर ही जलभराव हो जाता है। दरअसल संबंधित क्षेत्र में जो छोटे नाले बने हैं, उनकी नियमित रूप से साफ सफाई नहीं की जाती है। इससे बारिश के दिनों में जल निकासी में अवरोध उत्पन्न होता है। अकबरपुर के मध्य स्थित रेलवे क्रासिंग पर बने फ्लाई ओवर के नीचे जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से अक्सर जलभराव होता है। फ्लाई ओवर के नीचे जीजीआईसी, सेंट पीटर्स, सेंट जांस, बीएन इंटर कॉलेज, बीएनकेबी पीजी कॉलेज के अलावा कई अन्य स्कूल स्थित हैं। फ्लाई ओवर के नीचे से प्रतिदिन पांच हजार से अधिक छात्र छात्राएं आवागमन करते हैं। ऐसे में बारिश होती है, तो फ्लाईओवर के नीचे स्कूल व कॉलेज जाने वाले मार्ग पर जगह जगह जलभराव हो जाता है। इससे सबसे अधिक मुश्किल छात्राओं को होती है। वहीं आम लोगों का भी आवागमन प्रभावित होता है। आसपास के दुकानदारों का व्यावसाय प्रभावित होता है। हालांकि बारिश का मौसम भी निपट गया, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। ऐसे में बारिश के दिनों में यही समस्या लोगों को फिर परेशान करेगी। लेकिन नगर पालिका द्वारा इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की हो स्थापना तो नदी का पानी हो स्वच्छ:अकबरपुर से होकर गुजरने वाली तमसा नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। इसके प्रदूषण में शहर का गंदा पानी पहुंचना एक मुख्य कारण है। दरअसल तमसा नदी में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर शहर का गंदा पानी नाले के सहारे पहुंचता है। ऐसे में नदी का पानी प्रदूषित होता रहता है। हालांकि इसके लिए अस्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है, लेकिन वह नाकाफी है। नगर में लंबे समय से स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। इससे आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ती है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ जलालपुर में ही तमसा नदी में गिरने वाले एक नाले के मुहाने पर स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराए जाने को मंजूरी प्रदान हुई है। अकबरपुर में कहीं भी स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। इसी का नतीजा है कि नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। फिर भी जिम्मेदार कोई खास गंभीरता नहीं दिखाते हैं। इससे स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र कुमार कहते हैं कि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना चाहिए। सभी नाले के मुहाने पर स्थाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराए जाने की आवश्यकता है। जलभराव की चपेट में रहते हैं कई सरकारी कार्यालय के परिसर:शहर के गली मोहल्लों की बात दूर, जिला मुख्यालय पर स्थित कई सरकारी कार्यालय ऐसे हैं, जिनके परिसर में हल्की बारिश होने पर ही जलभराव हो जाता है। इसमें कृषि भवन, बिजली उपकेंद्र, पीडब्लूडी कार्यालय के अलावा कई अन्य कार्यालय के परिसर भी इस समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल में जलनिकासी के लिए जो नालियां हैं, उन्हें और बेहतर करने की जरूरत है। नियमित रूप से साफ सफाई न होने से कई नालियां चोक हो गई हैं। इससे एक तरफ जहां सामान्य दिनों में गंदा पानी फैला रहता है, तो वहीं बारिश होने की दशा में जलभराव हो जाता है। इससे मरीजों को कई प्रकार की मुश्किल होती है। कुछ ऐसा ही हाल पीडब्लूडी कार्यालय व कृषि भवन का भी है। बारिश होने की दशा में इन दोनों कार्यालय के परिसर जलाशय में तब्दील हो जाते हैं। दरअसल नाले व नालियों की बेहतर ढंग से सफाई न होने तथा गहराई कम होने से समस्या ज्यादा होती है। हालांकि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि प्रत्येक वर्ष इस समस्या के उत्पन्न होने से लोगों को आवागमन में दिक्कतें होती हैं। बस स्टेशन क्षेत्र के मनोज कुमार व बृजेश कुमार कहते हैं कि जिम्मेदारों को चाहिए कि वे इस संबंध में गंभीरता दिखाएं। इस समस्या को दूर करने के लिए नई नालियों का निर्माण कराएं। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि नालियों की नियमित रूप से साफ सफाई हो। नियमित हो साफ सफाई, तो कम हो जलभराव समस्या:नाले व नालियों की नियमित रूप से साफ सफाई नहीं होती है। इससे अक्सर गंदा पानी मोहल्ले की गलियों व सड़क के किनारे पटरियों पर बहता है। इससे लोगों विशेषकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को आवागमन में होता है। जलनिकासी के लिए नाले व नालियों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन उनकी नियमित रूप से साफ सफाई नहीं कराई जाती है। बरसात से पहले नालों की बेहतर सफाई का दावा तो नगर पालिका द्वारा किया जाता है, लेकिन ज्यादातर औपचारिकता तक ही सीमित रहता है। आधी अधूरी सफाई कराकर उसे छोड़ दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि हल्की बारिश होने पर ही जगह जगह जलभराव हो जाता है। इसका खामियाजा आमतौर पर आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है। जिम्मेदारों व जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई जाती है, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। अकबरपुर के लालजी व ललित कहते हैं कि यदि समय समय पर बेहतर तरीके से नाले व नालियों की साफ सफाई कराई जाए, तो कुछ हद तक जलभराव समस्या को दूर किया जा सकता है। हमारी भी सुनिए-: नगर में नालियों की सफाई होती तो है, लेकिन नियमित तौर पर नहीं। ऐसे में कूड़ा कचरा जमा होने से नालियों से सुचारु जल निकासी नहीं हो पाती है। इससे गंदगी पसरी रहती है। कई बार तो बदबू उठने से आसपास के लोग असहज हो जाते हैं। फिर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। जगदंबा प्रसाद बारिश के मौसम में कृषि कार्यालय के निकट जलभराव हो जाने से आवागमन बाधित हो जाता है। बारिश के बाद भी यहां नाले व नालियों की सफाई पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे गंदगी पसरी रहती है। साथ ही जल निकासी भी अवरुद्ध होती रहती है। जिम्मेदारों को ध्यान देना होगा। विनोद अयोध्या मार्ग पर बना नाला हमेशा ओवरफ्लो होने की स्थिति में रहता है। कई बार तो सड़क पर भी पानी भर जाता है। यदि नाले की सफाई नियमित तौर पर कराया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। इसके लिए शिकायत भी होती है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा। तुलसीराम बारिश के बाद अभियान चलाकर नाले व नालियों की सफाई कराई गई थी। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। कारण यह कि नाले व नालियों की समय समय पर सफाई की जरूरत होती है। लेकिन सफाईकर्मियों की मनमानी से व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। गंदगी पसरी रहती है। राजेंद्र प्रसाद दुकानों व प्रतिष्ठानों के आसपास बनी नालियों में गंदगी होने का मुख्य कारण लोगों की मनमानी भी है। चाय का गिलास व अन्य कूड़ा कचरा अक्सर नालियों में फेंक देते हैं, जिससे नालियों में गंदगी तो फैल ही जाती है, जल निकासी भी नहीं हो पाती। ऐसे में नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। अजय कुमार जिन स्थानों पर नाले व नालियां क्षतिग्रस्त हो गई है, उसे दुरुस्त कराया जाना अत्यंत जरूरी है। क्योंकि इससे एक तरफ जहां हादसे का खतरा बना रहता है, वहीं नाले व नालियों से गंदगी भी सड़क पर बिखर जाती है। इससे आसपास के लोगों की दिक्कतें बढ़ी रहती हैं। धर्मराज नगर के वार्डों में भी सफाई व्यवस्था ठीक न होने से लोगों को परेशानी होती है। चाहे व नाले नाली की सफाई हो अथवा सड़कों व सार्वजनिक स्थलों की। कूड़े का उठान शहर में नियमित तौर पर होता है। इसके बाद भी कई लोग नाले व नालियों में ही कूड़ा डाल देते हैं। जो परेशानी का सबब बनती है। निखिल चौधरी नगर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अस्थाई तौर पर बनाया गया है। लेकिन वह नाकाफी है। नाले व नालियों का गंदा पानी कई बार नदी में जाता है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित होता है। इससे कई तरह की दिक्कतें होती है। कई बार पानी से बदबू उठता रहता है। समस्या का समाधान स्थाई तौर पर होना चाहिए। जितेंद्र बोले जिम्मेदार: इस बारे में नगर पालिका परिषद अकबरपुर के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश वर्मा का कहना है कि नगर में सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। नाले व नालियों की नियमित तौर पर सफाई कराई जाती है। क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत के साथ ही नए नाले व नालियों का निर्माण भी होता है। कूड़ा उठान भी नियमित तौर पर होता है। शहर में गंदगी न पसरे इसके लिए कूड़ेदान लगवाए गए हैं। लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे सफाई व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग करें।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




