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बच्चा बोला,पढ़ना चाहता हूं साहब लेकिन फीस के पैसे नहीं

बच्चा बोला,पढ़ना चाहता हूं साहब लेकिन फीस के पैसे नहीं

संक्षेप:

Ambedkar-nagar News - अम्बेडकरनगर में 12 वर्षीय चंद्र प्रकाश वर्मा ने डीएम से फीस के लिए सहायता मांगी। उसके पिता का निधन हो गया और मां उसे छोड़ गई। डीएम अनुपम शुक्ल ने बच्चे की पीड़ा को सुनकर उसे प्रति माह 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। बच्चे की आँखों में अब पढ़ाई का नया सपना है।

Jan 21, 2026 05:10 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अंबेडकर नगर
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अम्बेडकरनगर, संवाददाता। पढ़ना चाहता हूं साहब लेकिन फीस के पैसे नहीं हैं। शनिवार को जनता दर्शन के दौरान डीएम के सामने 12 वर्षीय एक बच्चे ने रुंधे गले से जब अपनी बात रखी तो पूरा माहौल भावुक हो गया। बच्चे की आंखों में पढ़ाई के लिए मजबूत संकल्प को देख कर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल ने तत्काल प्रति माह 25 सौ रुपए की आर्थिक सहायता दिलाई, बल्कि बच्चे के सर पर हाथ फेरते हुए उसको दुलारा और मनोबल भी बढ़ाया। नगर के गोविंद गणेशपुर निवासी चन्द्र प्रकाश वर्मा (12) अपने चाचा विवेक वर्मा के साथ शनिवार को जनता दर्शन के बीच डीएम कार्यालय पहुंचा।

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मासूम चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी, लेकिन आंखों में पढ़ाई जारी रखने का मजबूत संकल्प था। चन्द्र प्रकाश ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 2015 में उसके पिता जय प्रकाश वर्मा का निधन हो गया और मां उसे छोड़कर चली गई है। इस तरह वह पूरी तरह अनाथ हो गया। वर्तमान में वह अपनी बुआ लालमती के साथ अयोध्या में रहकर एक निजी वद्यिालय में कक्षा छह में अध्ययन कर रहा है। स्कूल की फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्च परिवार के लिए बोझ बन चुके हैं, जिससे उसकी पढ़ाई कभी भी रुक सकती है। बच्चे ने बताया कि अब तक उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल सका था। बच्चे की पीड़ा को डीएम अनुपम शुक्ल ने पूरी संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने न केवल उसका हौसला बढ़ाया, बल्कि चॉकलेट देकर उसे दुलारा भी। इसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी राकेश कुमार से फोन पर बात कर आवश्यक जानकारी ली और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत चन्द्र प्रकाश को प्रतिमाह 2500 रुपये की सहायता राशि तत्काल दिलाने के नर्दिेश दिए। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया कि पात्रता के अनुसार उसे अन्य सभी सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा। डीएम की इस मानवीय और त्वरित पहल से चन्द्र प्रकाश की आंखों में अब फिर से सपनों की चमक लौट आई और वह पढ़ाई के लिए अब नई तैयारी के साथ अपने घर लौटा।