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फूलपुर का अतीत : कार से नेहरू तो इक्के पर लोहिया करते थे प्रचार

फूलपुर का अतीत : कार से नेहरू तो इक्के पर लोहिया करते थे प्रचार

1 / 2देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के मुकाबिल समाजवाद के पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया ने भी 1962 में फूलपुर संसदीय क्षेत्र से ताल ठोंकी थी। नेहरू के पास तो वाहनों का काफिला था जबकि डॉ....

फूलपुर का अतीत : कार से नेहरू तो इक्के पर लोहिया करते थे प्रचार

2 / 2देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के मुकाबिल समाजवाद के पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया ने भी 1962 में फूलपुर संसदीय क्षेत्र से ताल ठोंकी थी। नेहरू के पास तो वाहनों का काफिला था जबकि डॉ....

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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के मुकाबिल समाजवाद के पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया ने भी 1962 में फूलपुर संसदीय क्षेत्र से ताल ठोंकी थी। नेहरू के पास तो वाहनों का काफिला था जबकि डॉ. लोहिया इक्के पर बैठकर चुनावी सभाओं में पहुंचते थे।

सोशलिस्ट पार्टी से उतरे थे मैदान में

1962 के लोकसभा चुनाव में डॉ. लोहिया फूलपुर सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी थे। पर्चा दाखिल करने से पहले कुछ लोगों ने सलाह दी कि नेहरू को शिकस्त मुश्किल हैं। इसलिए दूसरी सीट से चुनाव लड़ना बेहतर होगा। डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा कि जीत-हार नहीं बल्कि नेहरू रूपी कांग्रेस की चट्टान में दरार डालने के लिए इस सीट से चुनाव लड़ रहा हूं, हार तो तय है।

इक्के पर लगा था लाउडस्पीकर

पर्चा दाखिल करने के बाद डॉ. लोहिया फूलपुर क्षेत्र में ही जमे रहे। उस वक्त पंडित नेहरू प्रधानमंत्री थे। वह तामझाम व वाहनों के काफिले के साथ सभा में पहुंचते थे। उनके लिए सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम रहता था। दूसरी तरफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी डॉ. लोहिया के पास एक भी चार पहिया वाहन नहीं था। शहर के कुछ लोग उनको कभी-कभी कार व जीप दे देते थे। इसलिए उनको मुख्य सड़क से दूर के बाजारों व गांवों में इक्के से ही सभास्थल तक जाना पड़ता था। उस पर लाउडस्पीकर भी लगा रहता है। बीच में लोग रोक लेते थे तो डॉ. लोहिया इक्के पर लगे लाउडस्पीकर से भाषण भी शुरू कर देते थे।

प्रचार में आते थे समाजवादी धुरंधर

मुकाबला देश के प्रधानमंत्री से था। इसलिए समाजवादी विचारधारा के उस समय प्रमुख नेता मधु दंडवते, राजनारायण, जार्ज फर्नांडीज, रामानंद तिवारी व कर्पूरी ठाकुर सहित कई दिग्ग्जों ने डॉ. लोहिया के समर्थन में एक दर्जन से अधिक सभाएं की थीं। इन नेताओं ने ग्रामीण इलाकों में नुक्कड़ सभाएं करके भी महौल बनाने का प्रयास किया था।

लाई-चना पर रात बिताते थे कार्यकर्ता

उस समय डॉ. लोहिया के चुनाव प्रचारक रहे वरिष्ठ अधिवक्ता व सपा नेता विनोद चंद्र दुबे बताते हैं कि उस चुनाव में प्रचार के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ बिहार से भी बड़ी संख्या में सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता आए थे। डॉ. लोहिया का चुनाव कार्यालय फाफामऊ में था। उस समय इस बाजार में बिजली नहीं थी। रात आठ बजे तक सभी दुकानें बंद हो जाती थीं। कार्यकर्ताओं को हर शाम चुनाव प्रचार की रिपोर्ट देनी पड़ती थी। रात आठ बजे के बाद जो कार्यकर्ता इस दफ्तर में पहुंचते थे उनको लाई चना खाकर ही रात बितानी पड़ती थी। दुकानें बंद होने से खाने को कुछ मिलता ही नहीं था। पार्टी कार्यालय में रखा लाई चना ही मिलता था। इसके बाद डॉ. लोहिया को 27 बूथों पर पंडित जवाहरलाल नेहरू से अधिक वोट मिले थे।

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  • Web Title:Lohia was in front of Nehru in 1962 Phoolpur election
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