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29 फरवरी, 2020|9:16|IST

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पहले ही इंटरव्यू में बन गये प्राचार्य

पहले ही इंटरव्यू में बन गये प्राचार्य

दूधनाथ सिंह अपने पिता की तीन संतानों में सबसे बड़े थे। यह शिक्षार्जन में लगे हुए थे। मझले भाई जगत नारायण सिंह पिता के साथ खेती-बारी संभालने में लग गये। परिवार की गिरती आर्थिक दशा देख सबसे छोटे भाई रामाधार सिंह सेना में भर्ती हो गए। जब वह कोलकाता में तैनात थे तो शिक्षा पूरी कर दूधनाथ भी नौकरी की तलाश में वहीं पहुंच गये। काफी प्रयास के बाद रामाधार सिंह ने कोलकाता के बालीगंज स्थित रंगूटा हाईस्कूल के मैनेजमेंट को इनका साक्षात्कार लेने के लिए तैयार किया। साक्षात्कार में इन्होंने प्रबंधतंत्र को इतना प्रभावित किया कि उन्हें सीधे विद्यालय का प्राचार्य बना दिया गया।

रंगूटा हाईस्कूल में पढ़ाते समय उनका संपर्क ‘ज्ञानोदय पत्रिका के संपादक शरद देवड़ा जी से हो गया। इनकी प्रतिभा से वो इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इन्हें नौकरी छोड़ाकर अपनी पत्रिका का उप संपादक बना दिया। एक साल ही यह कार्य कर पाए थे कि सुमित्रानंदन पंत के संपर्क में आने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी पा गए और कोलकाता छोड़कर दूधनाथ इलाहाबाद आ गए।

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  • Web Title:doodhnath got principal post in his first interview