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विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां रोकने पर केंद्र व यूजीसी से जवाब तलबं

विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां रोकने पर केंद्र व यूजीसी से जवाब तलबं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां रोकने के मामले में यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति बी अमित स्थलकर एवं न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने बृजेन्द्र कुमार व 11 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

याचिका में यूजीसी के 18 व 19 जुलाई 2018 के आदेश को चुनौती दी गई है। इन आदेशों से विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती पर रोक लगा दी गई है। याचियों का कहना है कि विवेकानंद तिवारी केस में हाईकोर्ट ने विभागवार आरक्षण लागू करने का ओदश दिया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के निर्णय को सही करार देते हुए विभागवार आरक्षण की व्यवस्था को ही सही माना। अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका दाखिल कर विभागवार आरक्षण को चुनौती दी है। केंद्र सरकार पूरे विश्वविद्यालय को इकाई मानकर आरक्षण लागू करना चाहती है। इस याचिका के परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार ने यूजीसी को भर्तियां रोकने का आदेश दिया है।

याचियों का कहना है कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट ने विभागवार आरक्षण को सही करार दिया है तो फिर नियुक्तियां रोकने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।

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  • Web Title: Center and UGC respond to prevent recruitments in universities