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यूपी: फ्री वाईफाई से जंक्शन पर किताबों का कारोबार गिरा

यूपी: फ्री वाईफाई से जंक्शन पर किताबों का कारोबार गिरा

इलाहाबाद जंक्शन पर फ्री वाईफाई की सुविधा ने बुक स्टॉल पर किताबों का कारोबार तकरीबन खत्म सा कर दिया है। दिनभर में गिने-चुने मुसाफिर ही बुक स्टॉल पर किताबें खरीदने आ रहे हैँ। कुछ पत्रिकाओं के दम से बुक स्टॉल जिंदा हैं। वहीं, बिक्री बढ़ाने के लिए बुक स्टॉल वालों ने छात्रों की जरूरत वाली किताबें बढ़ा दी हैं। इसकी कीमत नामचीन साहित्यकारों को चुकानी पड़ी। ऐसे में उनकी किताबें काउंटर से उठाकर सेल्फ में लगा दी गई हैं।

एएच व्हीलर बुक स्टॉल जंक्शन के प्लेटफॉर्म एक पर प्रीमियम स्थान पर है। बड़े स्टॉल में अच्छी किताबों की कमी और खालीपन दूर से ही अखरने लग रहा है। पास जाने पर बुक स्टॉल में पाककला, सिलाई-कढ़ाई, सफल जीवन के मंत्र समेत कई ऐसी किताबें दिखीं जो अब तक ठेले और सड़क किनारे किताबें बेचने वालों के यहां दिखती थीं। युवाओं के काम आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों ने भी काउंटर में आगे जगह बना ली है। जरूरी भी है। क्योंकि प्रतियोगी और समसामयिक पत्रिकाओं के दम से ही स्टॉल पर कुछ कारोबार जिंदा है। ऐसे में मुंशी प्रेमचंद, काशीनाथ सिंह, फणीश्वरनाथ रेणु, श्रीलाल शुक्ल आदि रचनाकारों की किताबें पीछे सेल्फ में रखी गई हैँ। कई नामचीन रचनाकारों की पुस्तक तो यहां उपलब्ध तक नहीं है। सर्वोदय साहित्य के बुक स्टॉल पर भी साहित्यिक और गांधीवादी विचारधारा वाली किताबों से ज्यादा मौजूदा चलन की किताबें रखी हैं। इसमें शिव खेड़ा की सफलता का मंत्र देनी वाली किताब से लेकर प्रतियोगी पत्रिकाएं तक हैं। रामकृष्ण विवेकानंद वेदांत साहित्य के स्टॉल पर रामकृष्ण परमहंस पर बच्चों के लिए कॉमिक्स से लेकर बड़ों तक के लिए किताबें हैं। प्लेटफॉर्म चार-छह पर गीता प्रेस का बुक स्टॉल है। यहां भी चुनिंदा खरीदार आते हैं।

स्टॉल संचालक डीएस राय ने कहा कि चार पीढ़ी से किताबों का कारोबार करते आए। पर जब से जंक्शन पर फ्री वाईफाई सुविधा मिली तब से कारोबार चौपट है। ट्रेन के इंतजार के लिए किताबें, नॉवेल, पत्रिकाएं खरीदने वाले भी अब स्टेशन पर फ्री वाईफाई इस्तेमाल में लगे रहते हैं। ऐसे में कारोबार तकरीबन खत्म सा हो गया है। उनके अनुसार साहित्य में रुचि रखने वाले लोग भी अब इंटरनेट पर पढ़ ले रहे हैं।

मोदी की किताब 'साक्षी भाव' बिक रही-
सर्वोदय साहित्य के स्टॉल पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के काव्य संग्रह 'साक्षी भाव' की बिक्री हो रही है। संचालक के अनुसार दो सौ रुपये कीमत वाली किताब प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के कारण ठीक बिक रही है।

ऑनलाइन बिक्री से भी असर-
डीएस राय ने माना कि साहित्य के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है लेकिन ऑनलाइन किताबों की बिक्री से लोग घर बैठे किताबें मंगा ले रहे हैं। ऑफर के तहत वहां किताबें कुछ सस्ती भी मिल जा रही हैं।

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  • Web Title:book stall business down due to free wifi at station